दिल्ली: बच्चा गोद दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी
Delhi News: स्कैम ऐसे किया गया कि रजिस्ट्रेशन फीस, बुकिंग चार्ज, बेबी रिसीविंग चार्ज, ट्रांसपोर्ट और दूसरे खर्चों के नाम पर कई बार पैसे मंगवाए. भरोसा दिलाने के लिए फर्जी NGO की रसीदें भी बनाई गईं.

बच्चा गोद लेने की चाह रखने वाले लोगों को निशाना बनाकर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की साइबर थाना पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बरेली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों पर आरोप है कि वे ऑनलाइन अपना मोबाइल नंबर डालकर दावा करते थे कि वे कानूनी तरीके से बच्चा गोद दिला सकते हैं. भरोसा जीतने के लिए फर्जी NGO की रसीदें, नकली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और दूसरे मेडिकल दस्तावेज भेजे जाते थे.
मामले का खुलासा बुराड़ी की रहने वाली 30 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद हुआ. महिला ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई कि उससे 1.37 लाख रुपये की ठगी हुई है. महिला इंटरनेट पर बच्चा गोद लेने की जानकारी तलाश रही थी. इसी दौरान उसकी बात एक मोबाइल नंबर पर हुई. सामने वाले ने अपना नाम सचिन अग्रवाल बताया और खुद को चाइल्ड अडॉप्शन कराने वाली संस्था का प्रतिनिधि बताया.
ऐसे जाल में फंसाया
आरोपी ने महिला को भरोसा दिलाया कि एक नवजात लड़का गोद लेने के लिए उपलब्ध है और उसकी डिलीवरी 3 नवंबर 2025 को होगी. इसके बाद उसने रजिस्ट्रेशन फीस, बुकिंग चार्ज, बेबी रिसीविंग चार्ज, ट्रांसपोर्ट और दूसरे खर्चों के नाम पर कई बार पैसे मंगवाए. भरोसा दिलाने के लिए फर्जी NGO की रसीदें, नकली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज भी भेजे गए.
जब महिला ने बच्चे की जैविक मां से मिलने की इच्छा जताई तो आरोपी ने संस्था की नीति का हवाला देकर मना कर दिया. उसने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद मुलाकात करा दी जाएगी. इतना ही नहीं, आरोपियों ने महिला से बच्चे के कपड़े तक खरीदवा दिए. तय तारीख पर ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर फिर पैसे मांगे और रकम मिलते ही फोन बंद कर फरार हो गए.
ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की. जांच के दौरान करीब 100 मोबाइल नंबरों, IMEI, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), गूगल अकाउंट, IP लॉग, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की गहन जांच की गई. पुलिस ने Flipkart, Swiggy और Blue Dart जैसे प्लेटफॉर्म से भी जानकारी जुटाई. जांच में पता चला कि आरोपी लगातार अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदल रहे थे ताकि पुलिस उन्हें पकड़ न सके.
लगातार तकनीकी निगरानी और सर्विलांस के बाद पुलिस ने 31 जुलाई 2026 को बरेली में छापेमारी कर 46 वर्षीय सचिन अग्रवाल और उसके साथी 52 वर्षीय राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. को गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ में क्या खुलासा हुआ?
जांच में पता चला कि जिस मोबाइल नंबर से महिला से बात की गई और जिस बैंक खाते में ठगी की रकम आई, दोनों सचिन अग्रवाल के नाम पर थे. पूछताछ में सचिन ने खुलासा किया कि उसने यह पूरी ठगी अपने साथी राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. के साथ मिलकर की थी. उसके बयान और पुलिस के पास मौजूद सबूतों के आधार पर राकेश को भी गिरफ्तार किया गया.
पुलिस के मुताबिक, राकेश पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट है. वह फर्जी NGO की रसीदें, नकली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, अस्पतालों और डॉक्टरों की मुहरें और दूसरे फर्जी दस्तावेज तैयार करता था. इन्हीं दस्तावेजों के जरिए लोगों को यकीन दिलाया जाता था कि बच्चा गोद लेने की पूरी प्रक्रिया असली है.
क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 2 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, 1 पासबुक, 6 डेबिट कार्ड, 2 पैन कार्ड और अस्पतालों व डॉक्टरों की 14 मुहरें बरामद की हैं. जब्त मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि इस गिरोह के दूसरे साथियों, इस तरह की अन्य साइबर ठगी और अब तक ठगे गए दूसरे पीड़ितों का भी पता लगाया जा सके. फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी है.
















