छपरा: खुद को IAS अधिकारी बताकर DM से मिलने पहुंचा, ऐसे खुल गई फर्जी युवक की पोल, गिरफ्तार
Saran News: फर्जी आईएएस की पहचान रितेश कुमार पंडित के रूप में हुई है जो छपरा जिले के बसाढ़ी गांव का निवासी है. आरोपी पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया है.

बिहार के छपरा में एक फर्जी आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है. युवक खुद को आईएएस अधिकारी बताते हुए एसपी समेत कई अधिकारियों से मुलाकात की और फिर छपरा के डीएम आईएएस वैभव श्रीवास्तव से मिलने पहुंचा. सूत्रों के मुताबिक जिसके बाद डीएम ने उससे बैच पूछा और तो उसने 2022 बैच का आईएएस अधिकारी बताया. उसने कहा कि वो उत्तरप्रदेश के मिर्ज़ापुर में नगर आयुक्त है, जिसके बाद जिलाधिकारी ने उनसे और भी चीजें पूछी और फिर उसका भंडाफोड़ हो गया.
युवक ने फर्जी IAS बनकर डीएम से करीब 20 मिनट तक बातचीत की. इस दौरान जिलाधिकारी को कुछ गड़बड़ लगी तो उन्होंने आईडी मांगी. इस पर आरोपी घबराया और बाद में सख्ती से पूछताछ करने पर उसने सच बताया कि वह न तो आईएएस अधिकारी है और न ही किसी सरकारी पद है. व्यक्ति की पहचान रितेश कुमार पंडित के रूप में हुई जो छपरा जिले के बसाढ़ी गांव का है. आरोपी पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया है. समाहरणालय के कर्मचारियों ने बताया कि छह महीने पहले भी यह युवक दो बार आकर पहले के जिलाधिकारी से मिला था.
बिहार के छपरा में फर्जी IAS अधिकारी गिरफ्तार छपरा जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से मिलने चैंबर में पहुंचा खुद को 2022 बैंच का आईएएस अधिकारी और यूपी के मिर्ज़ापुर में नगर आयुक्त के रूप में कार्यरत अधिकारी बताया पुलिस ने फ़र्ज़ी आईएएस रितेश कुमार गिरफ्तार @Saran_dm @SaranPolice pic.twitter.com/gRDOgliGA9
— Ashutosh Nath (ABP NEWS) (@AshutoshSrivaTV) February 2, 2026
फर्जी आईएएस की कैसे खुली पोल?
जानकारी के अनुसार सोमवार (02 फरवरी) को दोपहर तीन बजे युवक छपरा समाहरणालय आया. उसने वहां तैनात आदेशपाल को अपना नाम रितेश कुमार पंडित, पिता कृष्णा पंडित ग्राम बसाढ़ी थाना छपरा मुफस्सिल के रूप में अपनी पहचान बताई. युवक ने दावा किया कि वह मेरठ में पदस्थापित आईएएस अधिकारी है और किसी जरूरी कार्य से जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से मुलाकात करना है. इसके बाद उसका आत्मविश्वास और उसकी हनक देख कर आदेशपाल ने उस युवक को जिलाधिकारी कार्यालय तक भेज दिया.
शक होने पर डीएम ने दस्तावेज मांगे
डीएम से 20 मिनट से ज्यादा समय तक बातचीत हुई, इस दौरान बातचीत में उसकी भाषा, जानकारी और व्यवहार में काफी संदिग्ध लग रहा था. जिलाधिकारी को उस पर शक होने लगा फिर आधिकारिक पहचान पत्र या सेवा से जुड़े दस्तावेज दिखाने की बात कही गई. फिर वो डर गया. उसने कोई जवाब नहीं दिया. जब काफी सख्ती से उससे पूछताछ की गई तो उसने स्वीकार किया कि वो न आईएएस अधिकारी है और न ही किसी सरकारी पद पर कार्यरत है.
थाने में पूछताछ में युवक ने क्या बताया?
बताया जा रहा है कि थाने में पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि जिलाधिकारी से मिलने के पहले वह एसएसपी विनीत कुमार के पास भी गया था, उसके बाद डीएम से मिलने पहुंच गया. फर्जी आईएएस बने युवक ने ये भी बताया है कि पूर्व जिलाधिकारी और एसपी से भी वो कई बार मिल चुका था.
काम कराने के नाम पर लोगों से वसूलता है मोटी रकम!
कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने बताया कि वो दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी करता था. उसने यह भी बताया हैं कि वह लोगों पर रौब जमाने और सरकारी दफ्तरों में काम निकलवाने के लिए खुद को आईएएस अधिकारी बताया करता है. वह फर्जी पहचान के नाम पर अलग-अलग दफ्तरों में जाया करता हैं. काम कराने के नाम पर लोगों से मोटी रकम भी वसूलता है. टाउन थाना पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू किया.
सारण जिला प्रशासन ने लोगों से क्या अपील की?
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों से ठगी की है. वहीं सारण जिला प्रशासन की ओर से आम लोगों से अपील गई है कि वो किसी भी व्यक्ति की बातों में नहीं आएं. साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और इस बारे में जिला प्रशासन को बताएं.
एसएसपी सदर ने क्या कहा?
छपरा सदर ASP रामपुकार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया, ''जिला पदाधिकारी कलेक्ट्रेट में उपस्थित थे. युवक ने उनके आदेश पाल को यह बताया कि हम दूसरे स्टेट के आईएएस हैं, उनसे मिलना है. जब बातचीत में जिला पधाधिकारी को संदेह हुआ तो उसकी जांच की गई. स्थानीय थाना को भी सूचना दी गई. उसके बाद ज्ञात हुआ कि वह आईएएस अधिकारी नहीं है. अपने को आईएएस बता करके गुमराह करने का काम कर रहा है. उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और अन्य बिंदुओं की जांच हो रही है.''






















