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Patna Coaching Files: 'कभी पटना था कोचिंग हब, अब सिर्फ प्रचार हो रहा', सगीर अहमद ने बताई बदलते दौर की कहानी

Patna News In Hindi: पटना में कोचिंग संचालक खान सर और रोशन आनंद आमने-सामने हैं. लोग सोच रहे है कि कोचिंग माफिया ने शिक्षा को बर्बाद कर दिया है. एबीपी न्यूज बात कर हालात के बारे में पूरी जानकारी ली है.

इन दिनों पटना में कोचिंग विवाद जमकर हो रहा है. कोचिंग संचालक खान सर और रोशन आनंद आमने-सामने हैं. लोगों के जेहन में यह बात उठ रही है कि कोचिंग माफिया बिहार की शिक्षा को बर्बाद कर दिए. लेकिन बता दें कि बिहार में कोचिंग का प्रचलन नया नहीं है. भले अभी के समय में देश में कोटा एजुकेशन हब के नाम से जाना जाता है, लेकिन एक समय ऐसा था जब पूरे देश में पटना कोचिंग हब के नाम से जाना जाता था और ऐसे कई नामचीन शिक्षकों ने कोचिंग संचालन शुरू किया था, जिनका नाम बिहार ही नहीं पूरे देश में लिया जाता है. उस वक्त बिहार ही नहीं, पूरे देश के छात्र पटना जाकर पढ़ाई करते थे.

एबीपी न्यूज ने कोचिंग विभूतियों से पहल कर ली हलात की जानकारी

वैसे तो पटना में कई नामचीन शिक्षक हुए, जिनको आज भी छात्र पूछते हैं. एबीपी न्यूज उन कोचिंग विभूतियों से रूबरू होकर पहले और अभी के हालात के बारे में पूरी जानकारी ली और पुराने एवं कोचिंग संस्थान में अपनी पहचान बना चुके कोचिंग शिक्षकों से बात की गई. आज हम बात कर रहे हैं उस शिक्षक की, जिसने पटना में रीजनिंग की पढ़ाई को जन्म दिया था.

उस वक्त पूरे देश में रीजनिंग की पढ़ाई नहीं होती थी. जनरल कंपटीशन जैसे SSC, UDC, बैंकिंग की परीक्षाओं में रीजनिंग के सवाल आते थे, लेकिन शिक्षक नहीं थे. उस वक्त वन मैन सगीर अहमद ने रीजनिंग की पढ़ाई की शुरुआत की थी. वह मुख्य रूप से बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं. वे 1987 में पटना आए थे. वह मुख्य रूप से गणित के शिक्षक हुआ करते थे, लेकिन रीजनिंग की पढ़ाई का जन्म उन्होंने दिया था और बिहार ही नहीं, पूरे देश के छात्र उनसे रीजनिंग की पढ़ाई करने आते थे.

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कोचिंग संचालकों ने शिक्षा को बर्बाद किया, पहले नहीं था ऐसा

एबीपी न्यूज से खास बातचीत में सगीर अहमद ने कहा कि अभी के समय में जिस तरह से कोचिंग संचालकों ने शिक्षा को बर्बाद कर दिया है, पहले ऐसा नहीं था. छात्र शिक्षक की पूजा करते थे. 1987 में जब हम यहां आए थे तो कुछ बड़े और नामचीन शिक्षकों की कोचिंग में पढ़ाते थे. उन शिक्षकों ने कहा कि आप पटना में रीजनिंग की पढ़ाई की शुरुआत करिए, छात्र लोग आते हैं लेकिन यहां रीजनिंग के कोई शिक्षक नहीं हैं. हमने रीजनिंग का अध्ययन किया और तीन से चार सालों में रीजनिंग की पूरी किताब लिख दी थी.

1991 में हमने अपनी कोचिंग शुरू की. उस वक्त किरण प्रकाशन ने हमारे रीजनिंग के प्रश्नों को प्रतियोगिता किरण में छापना शुरू किया. उसके बाद रीजनिंग एडवांस की भी पुस्तक मेरी निकली थी. 1990 से 2000 के बीच में रीजनिंग के कोई भी शिक्षक नहीं थे. आज जो भी शिक्षक हैं, वह हमारे ही शिष्य हैं.

हमसे रीजनिंग पढ़ने के लिए बिहार ही नहीं, पूरे देश के छात्र आते थे. अभी हम अगर गिनती करें तो 10,000 से ज्यादा जनरल कंपटीशन में पास हुए हमारे छात्र हैं. हमने अपनी कोचिंग में रीजनिंग और गणित दोनों की पढ़ाई कराई. छात्र क्लास लेने के लिए लाइन लगाते थे. जिन्हें मौका नहीं मिल पाता था, वह अन्य छात्रों की मदद से अपनी पढ़ाई करते थे.

'कोचिंग संस्थान में शिक्षा नहीं दी, सिर्फ प्रचार किया जा रहा'

सगीर अहमद सर ने एबीपी न्यूज को बताया कि अभी का समय बहुत खराब चल रहा है. किसी भी कोचिंग संस्थान में शिक्षा नहीं दी जा रही है, सिर्फ प्रचार किया जा रहा है. पहले फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब से प्रचार नहीं होता था, माउथ पब्लिसिटी होती थी. जो छात्र पढ़कर जाते थे, वही कहते थे कि वह अच्छे टीचर हैं. अब नाटक-नौटंकी करके लोग पढ़ाई करते हैं. दरोगा, सिपाही की पढ़ाई में कुछ है नहीं और उसके लिए यह कोचिंग संचालक छात्रों को माला पहनाते हैं. यह कैसा समय आ गया है. हमारे समय में छात्र सफल होने पर शिक्षक को आकर माला पहनाते थे. अभी उल्टा चल रहा है और इसमें कहीं न कहीं सरकार भी दोषी है.

खान को लेकर सगीर अहमद ने कहा कि 2010 के बाद खान सर आए थे, हमारे कोचिंग में पढ़ाना भी शुरू किए थे, लेकिन मैं इस बात को किसी से कहता नहीं हूं और न ही वह कहते हैं. अच्छी बात है कि वह अभी फेमस टीचर हैं. लेकिन छात्रों के हित में सभी को सोचना चाहिए. उस वक्त भी प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन सभी शिक्षक और कोचिंग संचालक छात्रों के हित की बात करते थे.

'पटना में 2009 तक सब अच्छा था, लेकिन जातिवाद में संस्थान हुए बदनाम'

सगीर अहमद ने कहा कि अभी लोग कोटा पढ़ाई करने जाते हैं, लेकिन 2000 के पहले तो कोटा का जन्म भी नहीं हुआ था. 2003 में कोटा उभरने लगा, उससे पहले तो पूरे देश के छात्र पटना जाकर पढ़ाई करते थे. उस समय छात्रों को शिक्षक से डर बना रहता था. शिक्षक की एक झलक पाने के लिए छात्र बेताब रहते थे. पटना में 2009 तक सब अच्छा चला था, लेकिन जातिवाद और कुछ आपसी प्रतिद्वंद्विता 2009 में आई और उस वक्त पटना में कोचिंग संस्थान बहुत बदनाम हुए थे. उसी वक्त से पटना में कोचिंग का स्तर गिरता गया और कोविड के बाद तो नाटक-नौटंकी शुरू हो गई.

अब लोग अपना चेहरा दिखाने के लिए फेसबुक और यूट्यूब पर आते हैं. अभी पढ़ाई नहीं हो रही है, छात्रों को गुमराह किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मैं दावा करता हूं कि बिहार के कोई भी छात्र सेंट्रल के जनरल कंपटीशन में पास नहीं होंगे, क्योंकि जिस तरह से कोचिंग में पढ़ाई हो रही है, वह पढ़ाई नहीं, सिर्फ नाटक हो रहा है. अगर सब्जेक्ट-वाइज पढ़ाई नहीं कर पाएंगे तो सेंट्रल कंपटीशन में छात्र सफल नहीं हो सकते हैं. कुल मिलाकर अभी शिक्षा का स्तर गिर चुका है और सरकार भी कहीं न कहीं इसमें दोषी है.

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