बिहार: शिक्षा विभाग की नीतियों से प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का फूटा गुस्सा, सरकार से लगाई गुहार
Patna News: बिहार में प्रिंटिंग प्रेस संचालकों ने शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है. संचालकों का कहना है कि हम लोगों का कारोबार बुरी तरह ठप हो चुका है.

बिहार में शिक्षा विभाग की नीतियों से नाराज प्रिंटिंग प्रेस संचालकों ने सरकार से गुहार लगाई है. इसकी वजह यह है कि बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने 2025 से 2030 तक एक करोड़ को नौकरी और रोजगार देने की घोषणा की है. परंतु सरकार की शिक्षा विभाग की नीतियों के कारण कई प्रिंटिंग प्रेस बंद होने के कगार पर आ चुके हैं. पटना के लंगर टोली, दरियापुर, मथुरा टोली इलाकों में सैकड़ों की संख्या में प्रिंटिंग प्रेस भरे पड़े हैं. सरकारी उदासीनता के कारण प्रेसों में ताला लगने की नौबत आ गई है.
प्रिंटिंग प्रेस संचालक ने क्या बताया?
प्रिंटिंग प्रेस संचालक अजीत कुमार ने बताया कि हम लोग विद्यालयों में होने वाली परीक्षा के प्रश्न पत्र, कॉपी की छपाई, उत्तर पुस्तिका एवं कई तरह के कार्य की छपाई करते थे. पूरे साल शिक्षा विभाग से कुछ ना कुछ काम मिलता रहता था. जिससे हम लोगों का रोजगार अच्छे से चल रहा था.
उन्होंने आगे कहा कि 2023 से हम लोगों का रोजगार खत्म हो गया है. क्योंकि उसी वक्त शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव के के पाठक बनकर आए थे. वह कई तरह के नियम लाकर शिक्षकों पर भी नकेल कसते थे, लेकिन उनके जाने के बाद कई नियमों पर विराम लग गया. उन्होंने बताया कि इससे शिक्षकों के लिए तो ठीक हो गया, लेकिन हम लोग का रोजगार ठप हो चुका है.
प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का छलका दर्द
एक प्रेस संचालक रविंद्र कुमार ने कहा कि सरकार रोजगार देने की बात करती है. हम लोग लघु उद्योग में आते हैं लेकिन सरकार हम लोग को रोजगार देने के बजाय रोजगार छीन ली है और बिहार के बाहर दूसरे राज्यों को इसका फायदा मिल रहा है. दरअसल पहले 9, 10th और 11 की परीक्षा जो स्कूल में होते थे उसके अधवार्षिक और वार्षिक के प्रश्न पत्र की छपाई हम लोग करते थे .लेकिन के के पाठक ने इस पर रोक लगा दी.
अब वह बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दे दी गई है .बिहार विद्यालय परीक्षा समिति दूसरे राज्यों से क्वेश्चन पेपर छपवाकर मांगवाती है. कई सौ करोड़ का टेंडर होता है, लेकिन हम लोग का रोजगार दूसरे राज्य के प्रेस वाले ले रहे हैं.
कई बार उठा चुके हैं मांग
प्रेस संचालकों ने बताया कि इसके लिए हम लोगों ने कई बार मांग उठाई. के के पाठक ने विद्यालयों में शिक्षकों के आने-जाने के टाइमिंग सहित कई नियम निकाले थे. जिस पर शिक्षकों ने गुहार लगाई और विधानसभा में यह मामला गूंजा. सरकार ने केके पाठक के सभी नियम निरस्त कर दिए थे.
उनका कहना है कि अब इस नियम पर विचार नहीं हुआ. हम लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मिल चुके हैं. उद्योग मंत्री और शिक्षा मंत्री से भी मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
बिहार के बाहरी राज्यों को दिया जाता है टेंडर
यहां तक कि कक्षा एक से लेकर कक्षा 8 तक जो परीक्षा होती है. वह भी स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस वाले को दी जाती थी उसे भी बंद करके टेंडर निकाला जाता है और उसे भी बिहार के बाहर के राज्यों को छपाई के लिए दे दिया जाता है. संचालकों का कहना है कि हम यही मांग करते हैं कि छपाई टेंडर किसी को दें, लेकिन छपाई हम लोग से कराएं. पूरे बिहार के 38 जिलों में जिला स्तर पर विद्यालयों से छपाई का आर्डर मिलता था.
प्रेस संचालकों ने सरकार से किया आग्रह
प्रिंटिंग प्रेस संचालकों ने आग्रह किया कि हम लोगों की मांग पर ध्यान दिया जाए, नहीं तो हम लोग भूखे मर जाएंगे. उन्होंने कहा कि प्राइवेट काम कभी-कभी मिलते हैं. इसमें लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं. इसके साथ ही यहां पेपर की बिक्री कम हो गई है. रोजगार खत्म हो चुका है, फिर सरकार कैसे रोजगार देने की बात कर रही है.
Source: IOCL

























