पटना PMCH में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 4 सूत्री मांगों को लेकर OPD और OT रहेगी ठप
Bihar News In Hindi: PMCH के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. यह हड़ताल OPD और ऐच्छिक ऑपरेशन थिएटरों तक सीमित रहेगी.

बिहार का सबसे बड़ा पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बार फिर जूनियर डॉक्टर आज बुधवार (8 जुलाई) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. PMCH के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA ) ने अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर बीते मंगलवार (7 जुलाई) की शाम को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी थी. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के सचिव, PMCh प्राचार्य और अधीक्षक को सूचना दे दी गई है. जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से जानकारी दी गयी हैं कि PMCH के जूनियर डॉक्टरों ने सर्वसम्मति से तत्काल प्रभाव से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है.
हड़ताल OPD और ऐच्छिक ऑपरेशन थिएटरों तक रहेगी सीमित
एसोसिएशन की ओर से बताया गया है कि यह हड़ताल केवल बाह्य रोगी विभाग (OPD), सामान्य वार्डों और ऐच्छिक (Elective) ऑपरेशन थिएटरों तक सीमित रहेगी. जबकि आपातकालीन सेवाएं, गहन चिकित्सा इकाइयां (ICU), प्रसूति कक्ष (Labour Room), आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर तथा अन्य सभी जीवनरक्षक सेवाएं पहले की तरह संचालित होती रहेंगी, ताकि गंभीर रोगियों के उपचार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
इस बार जूनियर डाक्टर अपनी सुरक्षा के साथ-साथ मरीजों की समस्या को भी सामने रखते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए हैं. एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया है कि यह निर्णय तब लिया गया है जब सक्षम अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन, लिखित पत्राचार एवं अनुरोध करने के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा तथा गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित गंभीर मुद्दों पर कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई.
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हड़ताल पर जाने की मुख्य मांगों में से एक, जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा
हड़ताल पर जाने की जो मांगे हैं, उनमें मुख्य रूप से जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा बताया गया है. इसमें कहा गया है अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल सुदृढ़ किया जाए और पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए. चिकित्सकों के विरुद्ध हिंसा की प्रत्येक घटना में संस्थागत स्तर पर अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए.
इसके अलावा हड़ताल में मरीजों की समस्या को भी उठाया गया है, जिसमें कहा गया है कि आवश्यक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, उपभोग्य सामग्रियों, जांच सुविधाओं, ICU बेड, मरीज परिवहन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा स्नातकोत्तर रेजिडेंट चिकित्सकों के संशोधित स्टाइपेंड एवं वरिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सकों के संशोधित वेतन को जनवरी 2026 से प्रभावी करते हुए तत्काल लागू किया जाए.
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से कहा गया है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान चिकित्सकों के साथ हिंसा एवं धमकी की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है. अस्पताल प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. साथ ही, अस्पताल परिसर में चिकित्सकों के साथ हिंसा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध संस्थागत स्तर पर त्वरित एवं प्रभावी कानूनी कार्रवाई का अभाव भी अत्यंत चिंताजनक है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा एवं मनोबल दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
प्रशासनिक एवं आधारभूत संरचना की गंभीर कमियां है PMCH में
इसके अलावा दूसरे नंबर पर मरीजों की समस्याओं को जूनियर डॉक्टरों ने उठाया है और कहा है कि प्रशासनिक एवं आधारभूत संरचना की गंभीर कमियां PMCH में है. जिन पर उपचाररत चिकित्सकों का कोई नियंत्रण नहीं है. इसके लिए मरीजों एवं उनके परिजनों द्वारा चिकित्सकों को दोषी ठहराया जाता है. अस्पताल के अनेक विभाग जीवनरक्षक दवाओं, टांके (Sutures), एंटीसेप्टिक घोल, एंडोट्रेकियल ट्यूब, मरीज मॉनिटर तथा अन्य अनेक आवश्यक उपभोग्य सामग्रियों एवं उपकरणों की गंभीर कमी के बावजूद कार्य करने को मजबूर हैं.
इसके अलावा ICU बेड की भारी कमी, प्रभावी ट्रायेज प्रणाली का अभाव, मरीजों के परिवहन हेतु ट्रॉलियों की कमी, पर्याप्त एम्बुलेंस एवं शव वाहन का अभाव तथा अनेक आवश्यक जांच सुविधाओं की अनुपलब्धता जैसी गंभीर समस्याएं लगातार बनी हुई हैं. इन कमियों के कारण मरीजों एवं उनके परिजनों में स्वाभाविक रूप से असंतोष उत्पन्न होता है, किन्तु उसका सीधा दुष्परिणाम उपचाररत चिकित्सकों को भुगतना पड़ता है, जो अक्सर आरोप, दुर्व्यवहार एवं शारीरिक हिंसा का शिकार बनते हैं.
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