Exclusive: NEET छात्रा की मौत का सच क्या? 127 पन्नों की मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अलग-अलग, अब बड़ा खुलासा
Patna NEET Student Death: हॉस्टल में बेहोश मिली छात्रा की इलाज के दौरान 5 दिन बाद मौत हो गई. मेडिकल रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट पर चोट का जिक्र नहीं किया गया. वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अलग आई.

पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत मामले ने हर स्तर पर सिस्टम की लापरवाही को उजागर किया है. पटना के मुन्नाचक इलाके में स्थित शंभू हॉस्टल में रहकर छात्रा नीट की तैयारी कर रही थी. 6 जनवरी को बच्ची अपने कमरे में बेहोश पाई गई. हॉस्टल के कर्मचारी उसे एक के बाद एक तीन अस्पताल लेकर गए.
छात्रा को सबसे पहले सहज सर्जरी क्लीनिक, फिर प्रभात मेमोरियल अस्पताल और फिर पटना के मेदांता अस्पताल ले जाया गया. 6 से 9 जनवरी तक अस्पताल बदलने का सिलसिला चलता रहा, लेकिन इस दौरान पुलिस पूरे सीन में कहीं नहीं दिखी. 11 जनवरी को छात्रा ने दम तोड़ दिया.
पुलिस पर लापरवाही का बड़ा आरोप
9 जनवरी को पटना के चित्रगुप्तनगर में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन न तो अस्पताल और न ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया. तीन दिन तक छात्रा अस्पताल में रही. इस दौरान न हॉस्टल सील किया गया और न वह कमरा जहां बच्ची बेहोश पाई गई थी. इन जगहों से पुलिस को अहम सबूत मिल सकते थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
127 पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा
अब एक और बात सामने आ रही है. अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक एक दूसरे से मेल नहीं खा रहीं. इसकी वजह से शासन और प्रशासन लगातार सवालों के घेरे में हैं. लापरवाही की हद यह है कि 127 पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट में कहीं भी प्राइवेट पार्ट में चोट की बात नहीं लिखी गई. इसी को आधार मानते हुए पुलिस ने बिना जांच किए यौन शोषण की आशंका को सिरे से नकार दिया.
#BREAKING | पटना में NEET की छात्रा से रेप मामले में नया खुलासा, अस्पताल की रिपोर्ट से अलग है पोस्टमार्टम की रिपोर्ट
— ABP News (@ABPNews) January 19, 2026
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बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के प्राइवेट पार्ट में चोट और सूजन का जिक्र मिला. यहां से मामला पलट गया. पुलिस ने एसआईटी जांच की बात की.
पोस्टमार्टम में प्राइवेट पार्ट में चोट का जिक्र
दरअसल, पटना नीट छात्रा से रेप के मामले में नया खुलासा हुआ है. अस्पताल की रिपोर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अलग है. अस्पताल की रिपोर्ट में सिर पर चोट का जिक्र है, लेकिन प्राइवेट पार्ट में सूजन की बात नहीं लिखी गई. वहीं, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में कंधे-सीने और प्राइवेट पार्ट्स में चोट की बात है, लेकिन सिर पर चोट के निशान का जिक्र नहीं किया गया. सवाल उठता है कि आखिर यह विरोधाभास क्यों है?
एबीपी के रिपोर्टर ने ग्राउंड पर स्थिति का पता लगाने की कोशिश की तो मालूम हुआ कि मामले में लीपापोती की कोशिश की जा रही है. सहज में बच्ची की सर्जरी के बाद उसे प्रभात मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया था, जहां उसका तीन दिन तक इलाज चला. उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था, इसलिए उसे मेदांता भेज दिया गया.
रिपोर्ट में होता चोट का जिक्र तो रेप के एंगल से हो सकती थी जांच
127 पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें हैं. बच्ची की मौत 11 जनवरी को इलाज के दौरान हुई थी. पीएम रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि प्राइवेट पार्ट के आसपास चोट लगी है, सूजन है. लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई. अगर यह बात नहीं छुपाई जाती, पुलिस को पता होती तो पुलिस उसी समय रेप के एंगल से जांच शुरू कर देती. सबूत मिलने लगते और गिरफ्तारी भी हो सकती थी. इसलिए अब सवाल उठ रहा है कि यह लीपापोती क्यों की गई है?
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Source: IOCL

























