पटना में BJP ऑफिस के बाहर हल्लाबोल! KYP सेंटर बंद होने पर भड़का गुस्सा
पटना में KYP संचालकों ने बंद केंद्रों को दोबारा शुरू करने की मांग पर बीजेपी कार्यालय का घेराव किया. संचालकों का दावा है कि 1,700 सेंटर बंद और 20 हजार रोजगार प्रभावित हैं.

बिहार में कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) केंद्रों के संचालन को लेकर संचालकों का विरोध तेज हो गया है. KYP सेंटरों को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में संचालक मंगलवार को पटना स्थित बीजेपी कार्यालय के बाहर पहुंच गए. प्रदर्शनकारियों ने बैनर-पोस्टर लेकर जोरदार नारेबाजी की और सरकार से जल्द सेंटरों को फिर से संचालित करने की मांग की.
प्रदर्शन कर रहे KYP संचालकों का दावा है कि राज्य में करीब 1,700 KYP केंद्र बंद हो चुके हैं. इससे लगभग 20 हजार लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है. संचालकों का कहना है कि लंबे समय से इन केंद्रों के जरिए युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा था, लेकिन अचानक संचालन बंद होने से केंद्र संचालकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.
बीजेपी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन
KYP संचालक बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यालय पहुंचे और वहां प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते हैं. उनका आरोप है कि श्रम संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाले इस कार्यक्रम को लेकर सरकार से उनकी बातचीत नहीं हो पा रही है. सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें बीजेपी कार्यालय का घेराव करना पड़ा.
10 साल से युवाओं को मिल रहा था प्रशिक्षण
संचालकों के मुताबिक, पिछले करीब 10 वर्षों से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कुशल युवा कार्यक्रम के तहत युवाओं को कंप्यूटर, संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास और अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा था. उनका कहना है कि KYP का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल उपलब्ध कराना था. ऐसे में केंद्रों का संचालन बंद होने से युवाओं के प्रशिक्षण पर भी असर पड़ रहा है.
पुराने सेंटर चलाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि पुराने KYP केंद्रों को दोबारा संचालित किया जाए. उनका कहना है कि पुराने केंद्रों के संचालन पर फैसला लेने के बजाय नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की बात की जा रही है. संचालकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को पूरे बिहार में फैलाया जाएगा. प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराने की मांग की है.




















