बख्तियारपुर के लोग बोले- बदलना चाहिए नाम, लेकिन 'नीतीशपुर' मंजूर नहीं
बख्तियारपुर का नाम बदलने की चर्चा के बीच स्थानीय लोगों ने 'नीतीशपुर' नाम का विरोध किया है. लोगों का कहना है कि नाम बदलना चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति के नाम पर रखने से विवाद बढ़ सकता है.

बिहार के बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है. बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने बख्तियारपुर का नाम 'नीतीशपुर' रखने का सुझाव दिया है लेकिन स्थानीय लोग नाम बदलने को लेकर सहमत नहीं हैं.
दरअसल, बख्तियारपुर मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का जन्मस्थान है. उन्होंने यहीं प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक हासिल की और उनका बचपन भी यहीं बीता. स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा नाम तुर्क सेनापति बख्तियार खिलजी से जुड़ा है और इसे बदलने की मांग लंबे समय से होती रही है.
लोगों ने इसके लिए आंदोलन और आक्रोश मार्च भी निकाले हैं. अब सरकार की ओर से नाम बदलने की चर्चा शुरू होने पर कई लोग इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं.
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'नीतीशपुर' के नाम पर लोगों ने जताई आपत्ति
बख्तियारपुर निवासी विद्या विनोद सिंह ने कहा कि शहर का नाम बदला जाना चाहिए, लेकिन 'नीतीशपुर' रखना उचित नहीं होगा. उनका कहना है कि नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन बख्तियारपुर में स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों का भी योगदान रहा है. ऐसे में किसी एक नेता के नाम पर शहर का नाम रखने से विवाद पैदा हो सकता है. कुछ ऐसा ही विचार अन्य बुजुर्गों की भी रहा.
युवाओं ने सुझाए 'मगध द्वार' जैसे नाम
स्थानीय युवा गोपाल कुमार ने भी नाम बदलने का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि 'नीतीशपुर' नाम रखने से जातिगत विवाद बढ़ने की आशंका है. उनके मुताबिक बख्तियारपुर मगध का प्रवेश द्वार माना जाता है, इसलिए 'मगध द्वार' जैसा नाम रखा जा सकता है. उन्होंने बलरामपुर जैसे अन्य नामों का भी सुझाव दिया. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर शहर का नाम रखना उचित नहीं होगा.
चार साल पहले नीतीश ने बताया था 'फालतू बात'
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब चार साल पहले भी बख्तियारपुर का नाम बदलने की चर्चा हुई थी. उस समय नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और उन्होंने इसे 'फालतू की बात' बताया था. लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नाम बदलने की मांग उठाई और आंदोलन भी किए, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी.
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