Vande Mataram: नीतीश सरकार का आदेश, बिहार के सभी स्कूलों में 'वंदे मातरम्' गाना जरूरी
Vande Mataram Mandatory: जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, अब राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम् को गाना अनिवार्य होगा. सभी छह अंतरे गाए जाएंगे. कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकेंड निर्धारित की गई है.

बिहार के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' गाना जरूरी होगा. केंद्र सरकार की ओर से 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय गीत के गायन और उसके सम्मान को लेकर निर्देश जारी किया गया था. स्कूलों के साथ-साथ सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों के लिए भी इसे अनिवार्य किया गया है. अब नीतीश सरकार की तरफ से भी इसे लागू करने को लेकर निर्देश जारी कर दिया गया है.
बीते बुधवार (25 मार्च, 2026) को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग से इसको पालन करने के लिए सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, स्थानीय आयुक्त, सभी प्रमंडलीय आयुक और सभी जिला अधिकारी एवं एसपी को पत्र जारी किया गया है. निर्देश दिया गया है कि सख्ती से इसका पालन हो.
3 मिनट 10 सेकेंड की अवधि निर्धारित
जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, अब राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम् को गाना अनिवार्य होगा. सभी छह अंतरे गाए जाएंगे. छात्रों को 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना होगा. राष्ट्र गीत को गाने या बजाने की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकेंड निर्धारित की गई है.
केंद्र सरकार के निर्देश में यह बताया गया है कि स्कूली शिक्षा को अनुशासित और राष्ट्रवादी बनाने के लिए, सुबह की प्रार्थना या छुट्टी के समय राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत (वंदे मातरम्) को अनिवार्य किया गया है. साथ ही स्कूल के प्राधिकारियों को छात्रों के बीच राष्ट्र गीत, राष्ट्र गान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति श्रद्धा बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं.
राष्ट्रपति या राज्यपाल के औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन और प्रस्थान के समय, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले और बाद में, जब परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाया जाए या परेड के अलावा अन्य सांस्कृतिक समारोहों में झंडा फहराया जाए उस वक्त वंदे मातरम् को अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा नागरिक सम्मान समारोहों के दौरान राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान बजाना अनिवार्य होगा.
किसी भी सांस्कृतिक समारोह में सामूहिक गायन के लिए पर्याप्त संख्या में गायकों की मंडली और लाउडस्पीकर की व्यवस्था करने को कहा गया है ताकि जनता स्वर में स्वर मिलाकर गा सके.
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