'तुम केवल प्यास जगा सकते हो, बुझा नहीं सकते', मटुकनाथ से बोली 'जानू', खुद सुनाई कहानी
Matuknath Choudhary Love Story: मटुकनाथ चौधरी लव गुरु के नाम से चर्चित रहे हैं. कभी प्रोफेसर हुआ करते थे. अभी रिटायर्ड हो गए हैं. एक पोस्ट से ऐसा लग रहा है कि वे फिर से इश्क में डूबे हैं.

लव गुरु के नाम से मशहूर मटुकनाथ चौधरी एक बार फिर से चर्चा में हैं. एक समय था जब वह अपनी प्रेमिका जूली को लेकर सुर्खियों में आए थे और अब फिर से चर्चा के पीछे भी कहानी इश्क वाली ही है. मटुकनाथ चौधरी कभी प्रोफेसर हुआ करते थे. अभी रिटायर्ड हो गए हैं. उन्होंने हाल ही में अपने फेसबुक पेज से इश्क की कहानी सुनाई है.
वे लिखते हैं, "एक स्त्री मुझे प्यार करती है…जो स्त्री मुझे प्यार करती है, उसकी एक ही इच्छा है कि मैं उनकी रचनाओं को ध्यानपूर्वक पढूं और उनपर टिप्पणियां करूं. अगर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने में मुझे कभी संकोच हो तो प्राइवेट रूप से मैसेंजर में जाकर कर दूं. मैं सोचने लग गया हूं कि यह प्रेम है या ड्यूटी?"
'प्यार में सौदा नहीं…'
मटुकनाथ चौधरी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा है, "मैं तो सोचता हूं कि प्रेम के बदले प्रेम हो सकता है और रचना पढ़ने के बदले में रचना पढ़ना. प्रेम के बदले रचना पढ़ना क्या प्रेम है? मैंने एक दिन उनसे कह दिया कि यह सब मुझसे नहीं होगा. प्रेम के बदले प्रेम होता है, न कि रचना पढ़ना. सुना नहीं है गीत? "बदले में दिल ले, बदले में दिल दे, ओ रे साहिबा, प्यार में सौदा नहीं…"
फेसबुक पेज पर अपनी कहानी सुनाते हुए मटुकनाथ ने यह भी लिखा है कि कैसे उस स्त्री के एक जवाब से उनका दिल भी टूट गया. कहते हैं, "उस स्त्री ने मुझे मुंहतोड़ जवाब दे दिया… मैं तो ऐंठकर रह गया. बोलीं- आप किस लायक हैं कि मैं आपको प्यार के बदले प्यार दूं? आप जिस लायक हैं, वही काम आपसे लूंगी न? आप पढ़ सकते हैं, लिख सकते हैं, वह कीजिए. यह सुनकर मैं चिढ़ गया. क्या इतने भर के लायक मैं रह गया हूं? उसने स्पष्ट कह दिया- तुम केवल प्यास जगा सकते हो, बुझा नहीं सकते. अब तो मेरे पास कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं."
'कम से कम तुमसे जुड़ा तो रहूंगा…'
इसी तरह बातचीत की और लाइन मटुकनाथ ने पेज पर लिखी है. हालांकि कहीं भी उन्होंने किसी के नाम का जिक्र नहीं किया है. अंत में लिखते हैं, "मैं एक कविता पढ़ रहा था. पढ़ क्या रहा था, उसी के बारे में सोच रहा था आखिर इस दर्द की दवा क्या है? इसी बीच उसका फोन आ गया- मुझसे नाराज हो जानू? हाय, इस 'जानू' शब्द को सुनते ही जान में जान आ गई. मुरझा रहा पौधा हरा हो गया. नाराज क्यों होऊंगा? तुझपे नाराज होऊंगा तो प्रसन्न किस पर होऊंगा? आगे से तुम्हारी रचनाएं पढ़ा करूंगा और और उनपर टिप्पणियां भी किया करूंगा. इस माध्यम से कम से कम तुमसे जुड़ा तो रहूंगा."
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Source: IOCL
























