बिहार: गया में मानवाधिकार वकील ने किया जिंदा दारोगा का 'पिंडदान', सिस्टम पर उठे सवाल
Gaya News: दारोगा ने अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपना मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया. सर्टिफिकेट के अनुसार रामचंद्र सिंह की मृत्यु 15 दिसंबर 2009 को ही चुकी थी.

बिहार के गया में मानवाधिकार अधिवक्ता ने जीवित दारोगा का पिंडदान किया है. कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. मुजफ्फरपुर के चर्चित मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने एक जीवित दारोगा का गया में श्राद्ध कर पिंडदान किया है. जब सिस्टम किसी को कागजों में मार दें तो समाज उसे प्रतीकात्मक रूप से अंतिम रूप से विदाई देने को मजबूर हो जाता है.
मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के नूरी गांव से जुड़ा है. वर्ष 2012 में सरकारी शिक्षक अनंत राम पर झूठा बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया गया. इस मामले में आईओ तत्कालीन दारोगा रामचंद्र सिंह को सौंपा गया.
दारोगा पर लगा ये आरोप
आरोप है कि दारोगा ने गलत और फर्जी जांच तैयार कर शिक्षक को जेल भेज दिया. उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी. ट्रायल के दौरान जब मामले की सच्चाई सामने आने लगी तो कोर्ट ने दारोगा रामचंद्र सिंह को गवाही के लिए बुलाया.
दारोगा ने अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपना मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया. सर्टिफिकेट के अनुसार रामचंद्र सिंह की मृत्यु 15 दिसंबर 2009 को ही चुकी थी. जो व्यक्ति 2009 में मर चुका है वह 2012 में जांच कैसे कर सकता है. इसके बाद दारोगा की पोल खुल गई. इससे पहले ही रामचंद्र सिंह ने अपना तबादला करवा लिया.
पुलिस रिकॉर्ड में ट्रेसलेस हुआ दारोगा
पुलिस रिकॉर्ड में ट्रेसलेस हो गया. निचली अदालत ने शिक्षक अनंत राम को 7 साल की सजा सनाई, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने शिक्षक को सभी आरोपों से बरी कर दिया. इसके साथ ही उनकी नौकरी भी वापस कर दी गई.
पीड़ित शिक्षक की ओर से राष्ट्रीय और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग की पैरवी कर रहे अधिवक्ता एस के झा ने दारोगा का श्राद्ध कार्य किया है. बताया कि वह जिंदा है और पटना में रहता है. इसकी जानकारी पुलिस विभाग को भी दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
Source: IOCL



























