नौकरी के लिए भटक रहा कंचनजंगा पर तिरंगा फहराने वाला दिव्यांग, मिल चुका है राष्ट्रपति सम्मान
Bihar News: कंचनजंगा समेत कई चोटियों पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रपति से सम्मान पाने वाला छपरा के दिव्यांग नौकरी के लिए भटक रहे हैं. उन्होंने सरकार से सहयोग मांगी है.

देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन बिहार के छपरा के रहने वाले दिव्यांग पर्वतारोही उदय कुमार की कहानी सिस्टम पर सवाल खड़े करती है. जिस शख्स ने एक पैर गंवाने के बाद भी हौसला नहीं खोया और कई ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया, वही आज परिवार चलाने के लिए सरकारी नौकरी की तलाश में कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है.
उदय कुमार ने ट्रेन हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया. बैसाखी के सहारे उन्होंने पर्वतारोहण में कई उपलब्धियां हासिल कीं और देश का नाम रोशन किया.
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एक पैर से चढ़े पहाड़, कंचनजंगा पर लहराया विशाल तिरंगा
उदय कुमार ने बताया कि साल 2023 में उन्होंने कंचनजंगा रेंज की करीब 16,500 फीट ऊंचाई पर 708 वर्ग फीट का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया था. इसके अलावा उन्होंने अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो पर करीब 19,341 फीट की ऊंचाई पर 7,800 स्क्वायर फीट का विशाल तिरंगा लहराया था. उन्होंने बताया कि इसका वजन करीब 80 किलो था. इतना ही नहीं, उदय ने 13 हजार फीट की ऊंचाई से स्काई डाइविंग करते हुए हवा में तिरंगा फहराया और समुद्र के अंदर 35 फीट गहराई में स्कूबा डाइविंग के दौरान भी देश का झंडा लहराया.
राष्ट्रपति से मिला तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार, फिर भी नौकरी का इंतजार
उदय कुमार को देश के प्रतिष्ठित तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि यह सम्मान देश के चुनिंदा लोगों को दिया जाता है और उन्हें राष्ट्रपति भवन में सम्मान मिला था. जनवरी 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया था. इसके अलावा उन्हें कई अन्य पुरस्कार भी मिल चुके हैं.
लेकिन उदय का कहना है कि सम्मान मिलने के बाद भी उनकी आर्थिक परेशानियां खत्म नहीं हुईं. वह बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति के तहत नौकरी की मांग को लेकर लगातार अधिकारियों और मंत्रियों से मिल रहे हैं.
हादसे में पैर गंवाया, परिवार ने भी झेला दर्द
उदय कुमार ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि 29 अक्टूबर 2015 को ट्रेन हादसे में उनका पैर कट गया था. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद वह मानसिक रूप से टूट गए थे. एक बार बच्चों को संभालने के दौरान वह उनके ऊपर गिर गए, जिससे उनके छोटे बच्चे का हाथ टूट गया. यह देखकर उनकी मां को हार्ट अटैक आया और उनकी मौत हो गई. पिता का निधन पहले ही हो चुका था. इसके बावजूद उदय ने हार नहीं मानी और देश के लिए कुछ करने का संकल्प लिया.
अब एवरेस्ट फतह करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक संकट बना बाधा
उदय कुमार का अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है. लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका सपना मुश्किलों में घिरा हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाती है तो वह अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर पाएंगे और आगे की चुनौतियों के लिए तैयारी कर सकेंगे. उदय ने सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि उन्होंने देश के सम्मान के लिए कई जोखिम उठाए हैं, अब उन्हें अपने परिवार के भविष्य के लिए सरकार के सहयोग की जरूरत है.
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