सम्राट सरकार में 'डस्टबिन घोटाला'? रोहिणी आचार्य ने मढ़ दिए आरोप
Bihar Politics: रोहिणी आचार्य ने सीएम सम्राट की सरकार पर आरोप मढ़ दिए हैं. रोहिणी ने सम्राट सरकार पर डस्टबिन घोटाले का आरोप लगाया है. रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए निशाना साधा है.

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटाले का आरोप लगाया था. अब उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने भी आरोप मढ़ दिए हैं. रोहिणी ने सम्राट सरकार पर डस्टबिन घोटाले का आरोप लगाया है. रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए निशाना साधा है.
रोहिणी ने पोस्ट में लिखा, "सम्राट सरकार का एक और झोल, डस्टबिन भी हुआ अनमोल..." उन्होंने आगे लिखा, "बिहार में डस्टबिन भी ‘वीवीआईपी’ हो गया. जिस डस्टबिन की कीमत 1500 रुपये बताई जा रही है, उसे 15000 रुपये में खरीदा गया है. यानी कूड़ेदान छोटा, लेकिन बिल दस गुना बड़ा बना है.
सम्राट सरकार का एक और झोल
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) August 11, 2026
डस्टबिन भी हुआ अनमोल ..
बिहार में डस्टबिन भी ‘वीवीआईपी’ हो गया !!
जिस डस्टबिन की कीमत ₹1,500 बताई जा रही है, उसे ₹15,000 में खरीदा गया है यानी कूड़ेदान छोटा, लेकिन बिल दस गुना बड़ा ..!!
सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय से बिहार की जनता पूछ रही है… pic.twitter.com/8QTFMlVqpZ
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रोहिणी आचार्य ने सीएम पर दागा सवाल
रोहिणी आचार्य ने आगे सवाल करते हुए कहा कि सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय से बिहार की जनता पूछ रही है कि आखिर इस ‘महंगे कूड़ेदान’ का राज क्या है?" उन्होंने यह भी पूछा कि ये कूड़ा रखने का डिब्बा है या सरकारी खजाना खाली करने का नया जुगाड़?" रोहिणी ने पोस्ट में एक फोटो भी साझा की है. इसमें 5 तरह के डस्बिन दिखाए गए हैं. इस पर 'बिहार में डस्टबिन घोटाला' लिखा है.
रोहिणी ने आरजेडी में बदलाव का किया था समर्थन
पिछले दिनों रोहिणी आचार्य ने राष्ट्रीय जनता दल की बिहार भर में सभी समितियों के विघटन के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच रोहिणी आचार्य ने इस निर्णय का स्वागत किया और पार्टी नेता तेजस्वी यादव को नई संगठनात्मक संरचना के गठन पर सलाह दी थी.
रोहिणी आचार्य ने कहा था कि राजद की सभी संगठनात्मक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने का निर्णय बहुत पहले ही ले लिया जाना चाहिए था. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से नई समितियों के गठन के दौरान लालू प्रसाद यादव के वरिष्ठ नेताओं, समर्पित कार्यकर्ताओं और प्रतिबद्ध समर्थकों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था.
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