बिहार: 2026 में भ्रष्ट अफसरों पर और कसेगा शिकंजा, निगरानी ब्यूरो के DG का ऐलान
Bihar News: निगरानी ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि पिछले 25 सालों के दौरान निगरानी में प्रतिवर्ष औसतन 72-73 एफआईआर होती थी, लेकिन 2025 में यह वार्षिक औसत बढ़कर 122 एफआईआर हो गई.

नए साल में बिहार में निगरानी ब्यूरो भ्रष्ट लोकसेवकों को दबोचने के साथ ही सजा दिलाने पर भी विशेष रूप से फोकस करेगा. भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े जाने वाले लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही इन्हें समय पर सजा दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे. इसके लिए निगरानी ब्यूरो में नए स्पीडी ट्रायल कोषांग का गठन जल्द कर लिया जाएगा. इसके अलावा डीए, ट्रैप की कार्रवाई की गति बढ़ाने और इनके मामलों का निपटारा समय पर करने के लिए स्पीडी कोषांग का गठन होगा.
यह जानकारी निगरानी ब्यूरो के डीजी (महानिदेशक) जितेंद्र सिंह गंगवार ने दी. वह वर्ष के अंतिम दिन बुधवार को निगरानी ब्यूरो कार्यालय के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे. डीजी ने कहा, ''नए वर्ष में खासतौर से तीसरी पहल भी की जा रही है. इसके तहत नए डिजिटल तकनीकों से लैस एक नए भवन का निर्माण कराया जाएगा. इसमें आधुनिक तरीके से जांच के संसाधन मौजूद होंगे.
2025 में औसतन 122 एफआईआर हुई दर्ज
डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने आगे कहा, ''वर्ष 2025 में निगरानी ब्यूरो की उपलब्धियां बेहतरीन रही हैं. पिछले 25 वर्ष के दौरान निगरानी में प्रतिवर्ष औसतन 72-73 एफआईआर होती थी, लेकिन 2025 में यह वार्षिक औसत बढ़कर 122 एफआईआर हो गई है. इस वर्ष 30 दिसंबर को सबसे ज्यादा एक दिन में 20 एफआईआर दर्ज की गई है. अगर वर्षभर का औसत देखें, तो कुल कार्यदिवस में हर दूसरे दिन एक एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं, पिछले वर्ष 2024 में महज 15 एफआईआर दर्ज की गई थी.''
घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के कितने मामले?
उन्होंने बताया कि इस वर्ष इससे करीब आठ गुणा ज्यादा मामले दर्ज कर कार्रवाई की गई. सबसे ज्यादा हुई ट्रैप की कार्रवाई. जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया, ''इस वर्ष जितने मामले दर्ज हुए हैं, उसमें सबसे ज्यादा 101 एफआईआर सिर्फ ट्रैप यानी घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने वाले लोकसेवकों से संबंधित दर्ज हुई है. इसमें 107 भ्रष्ट लोकसेवकों को पकड़ा गया है, जिसमें 7 महिला पदाधिकारी और 6 बिचौलिए शामिल हैं. यह कुल दर्ज मामले का 81-82 प्रतिशत है. इसमें 37 लाख 80 हजार 300 रुपये घूस की राशि के तौर पर जब्त की गई. पिछले वर्ष महज 8 मामले इससे संबंधित दर्ज हुए थे.
हर महीने औसतन ट्रैप की 8 से 9 कार्रवाई
डीजी ने कहा, ''अगर पिछले 25 वर्ष में दर्ज हुए ट्रैप के मामलों का वर्षवार औसत देखें, तो यह 47 एफआईआर का है. जबकि इस वर्ष यह औसत शतक से अधिक यानी 101 है. प्रत्येक महीने औसतन 8 से 9 कार्रवाई हुई है. 2025 में जो ट्रैप की कार्रवाई की गई है, उनमें 24 मई को एक लोकसेवक को 3 लाख रुपये घूस लेते और एक अन्य लोकसेवक को वाशिंग मशीन के साथ राशि घूस लेते पकड़ा जाना है.
निगरानी ब्यूरो के इतिहास में संभवत पहली बार ऐसा हुआ है कि एक ही दिन 27 अगस्त को ट्रैप की चार कार्रवाई अलग-अलग जिलों औरंगाबाद, खगड़िया, दरभंगा और भोजपुर में अलग-अलग विभाग के पदाधिकारियों को लेकर की गई. इसके अलावा 17 दिसंबर को एक ही दिन ट्रैप के 2 और डीए की 1 कार्रवाई की गई है.
डीए केस में दोगुणी हुई कार्रवाई- DG
डीजी ने कहा कि डीए (आय से अधिक संपत्ति) के मामले में 2024 में सिर्फ 2 एफआईआर दर्ज हुई थी. जबकि 2025 में 15 भ्रष्ट लोकसेवकों पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है. यह कुल कार्रवाई का करीब 12 प्रतिशत है. इन सभी मामलों में 12 करोड़ 77 लाख रुपये की अवैध संपत्ति पकड़ी गई है. अनुसंधान पूरा होने पर इस राशि में बढ़ोतरी होने की संभावना है. सभी डीए के मामलों में सबसे बड़ा केस भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता पर 2 करोड़ 74 लाख रुपये का डीए केस का है.
अलग-अलग विभाग के अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
इसके अलावा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 4, ग्रामीण कार्य विभाग के 3 और पुलिस महकमा के 2 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है. अगर डीए के मामले में पिछले वर्षों का औसत 8 एफआईआर सालाना का था. जबकि इस बार इससे दोगुणा 15 मामले दर्ज किए गए हैं. उन्होंने कहा कि पद के गलत दुरुपयोग से जुड़े मामले (एओपीए) में पिछले वर्ष 5 मामले दर्ज किए गए थे. इस वर्ष 6 मामले दर्ज हुए हैं. इसमें धीमी प्रगति की मुख्य वजह संबंधित पदाधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करने से पहले इसके लिए उनके विभाग से अनुमति लेने का नया प्रावधान है.
निपटारे की दर तेजी से बढ़ रही- डीजी
डीजी ने आगे कहा, ''निगरानी ब्यूरो में लोक सेवकों के खिलाफ चल रहे जांच के मामलों के निपटारे की गति भी काफी बढ़ी है. 2020 में 17 नए मामले दर्ज हुए और 23 का निपटारा हुआ. 2021 में 13 नए मामले दर्ज हुए और 62 का निपटारा किया गया. वहीं, 2025 में 80 मामले दर्ज हुए और सर्वाधिक 121 का डिस्पोजल किया गया. पिछले वर्षों तक निगरानी से सजा दिलाने में औसतन 12 से 13 वर्ष का समय लग रहा था. परंतु इस वर्ष से इसे कम कर दिया गया है. आने वाले समय में सजा दिलाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए स्पीडी ट्रायल की व्यवस्था की जा रही है. इसकी कमान डीआईजी-2 मृत्युंजय कुमार संभालेंगे.''
नियोजित शिक्षक मामले में अब तक कितनी FIR?
नियोजित शिक्षकों से जुड़े मामले की जांच के बारे में डीजी गंगवार ने कहा, ''साल 2016 से यह जांच चल रही है. अब तक शिक्षा विभाग ने 6 लाख 56 हजार 595 सर्टिफिकेट निगरानी ब्यूरो को जांच के लिए दे चुकी है. इसकी जांच में अब तक 1711 एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें 2916 शिक्षकों को अभियुक्त बनाया गया है. इस वर्ष 130 एफआईआर दर्ज की गई है.''
इस मौके पर डीआईजी मृत्युंजय कुमार, एसपी नवीनचंद्र झा, एसपी मनोज कुमार, एसपी सुबोध कुमार विस्वास, डीएसपी विनोद कुमार पांडेय समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.
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