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SIR: बिहार के इन 3 जिलों में वोटरों के कटे सबसे ज्यादा नाम, लिस्ट में राजधानी पटना भी शामिल

Bihar SIR: बिहार के पूरे ड्राफ्ट लिस्ट पर नजर डालें तो राज्य के तीनों जिलों पटना, मधूबनी और पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक  नाम काटे गए. इम तीन जिलों मे स्थायी रूप से स्थानांतरित सबसे ज्यादा 3.9 लाख वोटर हैं.

बिहार में चुनाव से पहले चुनाव आयोग बड़े पैमाने पर एसआईआर की प्रक्रिया जोर शोर से चला रहा है. पहले चरण के बाद आयोग ने जो डेटा ड्राफ्ट लिस्ट के रूप में दिया उसमें 65 लाख लोगों के नाम कटे हुए पाए गए. इसमें वो लोग शामिल हैं, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए, मृत पाए गए या पहले से कहीं और नामांकित हैं. इनमें कुछ ऐसे नाम भी कट गए जिनका कोई पता नहीं चला. 

पटना, मधूबनी और पूर्वी चंपारण में कटे नाम

अब बिहार के पूरे ड्राफ्ट लिस्ट पर नजर डालें तो राज्य के तीनों जिलों पटना, मधूबनी और पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक  नाम काटे गए. इम तीन जिलों मे स्थायी रूप से स्थानांतरित सबसे ज्यादा 3.9 लाख वोटर हैं. इसके बाद 3.42 लाख वोटरों की मौत हो गई है. वहीं, 2.25 लाख अनुपस्थित रहे हैं और 1.04 लाख वोटर कहीं दूसरी जगह रजिस्टर्ड हैं. सबसे ज्यादा नाम काटे जाने वाले में पहले नंबर पर पटना जिला है, उसके बाद मधुबनी दूसरे नंबर पर और पूर्वी चंपारण तीसरे नंबर पर है. नाम काटे जाने वाले वोटरों में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक हैं. 

वहीं 18-40 वर्ष की आयु के मतदाता हटाए गए मतदाताओं के एक तिहाई से अधिक हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन जिलों में कुल 10.63 लाख नाम हटाए गए. यह राज्य के 38 जिलों में हटाए गए कुल 65 लाख नामों का 16.35% है. ये तीन जिले राज्य के चार सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में शामिल है. इनमें कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों में से 36 शामिल हैं. भाजपा-जदयू गठबंधन ने 2020 के विधानसभा चुनाव में इन तीन जिलों में 22 सीटें जीती थीं, जबकि विपक्षी महागठबंधन ने 14 सीटें जीती थीं.

पटना में सबसे ज्यादा कटे नाम

बात पटना की करें तो यहां 3.95 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए. पटना राज्य का सबसे अधिक आबादी वाला जिला है. पटना में, 1.55 लाख स्थायी स्थानांतरण, 1.34 लाख मृत, 73,225 अनुपस्थित और 32,481 पहले से नामांकित थे. 40 वर्ष से कम आयु के या उससे कम आयु वर्ग के 1.26 लाख नाम हटाए गए. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 67,011 स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं और 30,551 मतगणना अवधि के दौरान अनुपस्थित थे. पटना में 40 वर्ष से अधिक आयु वालों में से 2.69 लाख लोगों को ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिया गया है. महिला मतदाताओं के नाम अधिक हटाए गए हैं.

वहीं बात मधुबनी की करें तो नाम काटे जाने के मामले में ये दूसरे नंबर है. एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं  का प्रतिशत 5.42% है.यहां भी नाम हटाने का सबसे बड़ा कारण स्थायी स्थानांतरण है. यह कुल हटाए गए नामों का 1.18 लाख या 33.52% था. इसके बाद मृत 1.01 लाख, अनुपस्थित 99,082 और पूर्व-नामांकित 33,993 हैं. मधुबनी में मतदाता जो 40 वर्ष से कम उम्र के थे, हटाए गए कुल मतदाताओं का 1.44 लाख हैं. इनमें स्थयी रूप से स्थानांतरित होने वालों की संख्या 90,529 है.

मधुबनी जिले में आने वाली 10 विधानसभा सीटों में से प्रत्येक में, सबसे ज़्यादा नाम 30 से 39 आयु वर्ग के लोगों के काटे गए. लिंग के आधार पर काटे गए नामों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों की तुलना में बहुत ज़्यादा है. मधुबनी में भी, महिला मतदाताओं के नाम काटे जाने का सबसे आम कारण स्थायी स्थानांतरण है.

तीसरे नंबर पर है पूर्वी चंपारण जिला

वहीं सबसे ज्यादा नाम कटने वाले जिले में पूर्वी चंपारण तीसरे नंबर पर है. एसआईआर के दौरान कुल 3.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए. जिले में हटाए गए मतदाता राज्य के कुल 65 लाख मतदाताओं का 4.86 प्रतिशत हैं. पूर्वी चंपारण में 1.18 लाख या 37.25% नाम हटाए जाने के साथ परमानेंट तरीके से शिफ्ट सबसे ज्यादा दिया जाने वाला कारण था. इसके बाद 1.07 लाख 'मृत', 52,934 (16.75%) 'अनुपस्थित', और 37,952 (12.01%) 'पहले से एनरोल' थे.

पूर्वी चंपारण में भी 40 साल से कम उम्र के मतदाताओं के नाम सबसे ज्यादा हटाए गए, जिनकी संख्या 1.33 लाख है. इस आयु वर्ग में, 'परमानेंट तरीके से शिफ्ट 64,263 और अनुपस्थित 30,010 सबसे ज्यादा दिया जाने वाला कारण है. 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के जिन 1.83 लाख मतदाताओं के नाम हटाये गए. उनमें से 94,877 के नाम मृत होने के कारण सबसे ज्यादा बताए गए, जबकि 53,441 के नाम परमानेंट तरीके से शिफ्ट होने के कारण काटे गए.

पूर्वी चंपारण में भी 30 से 39 आयु वर्ग में सबसे ज्यादा 75,813 नाम हटाए गए, इसके बाद 40 से 49 आयु वर्ग में 58,039 (18.37%) और 20 से 29 आयु वर्ग में 53,590 (16.96%) नाम हटाए गए. पूर्वी चंपारण जिले में आने वाली 12 विधानसभा सीटों में से हर एक में 30 से 39 आयु वर्ग के लोगों के नाम सबसे ज्यादा हटाए गए.

बता दें कि बिहार में हुए इस एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और आयोग पर हमलावर है. 65 लाख विपपक्ष का कहना है कि मतदाताओं के नाम हटा देना कोई छोटी बात नहीं है. इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है. हैरान करने वाली बात ये है कि नाम कटने वालों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है, जो स्थाई रूप से कहीं और चले गए हैं. साथ ही हटाए गए मतदाताओं में 18 से 40 वर्ष की आयु के मतदाता एक तिहाई से भी ज़्यादा हैं.

ये भी पढे़ं: Bihar SIR: 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11 प्रतिशत के दस्तावेज मिले- चुनाव आयोग

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