बिहार: शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, शिक्षा सेवक और शिक्षिका सस्पेंड
बांका में शिक्षा विभाग ने फर्जीवाड़े पर कार्रवाई की. चांदन में फर्जी मैट्रिक प्रमाणपत्र पर बहाल शिक्षा सेवक चयनमुक्त होंगे, जबकि बाराहाट में शिक्षिका कमला देवी की सेवा समाप्त कर दी गई.

फर्जी दस्तावेज और सेवा संबंधी अनियमितताओं के मामलों में बांका में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है. विभाग ने चांदन प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय फूलजोरा में फर्जी मैट्रिक प्रमाणपत्र के आधार पर बहाल शिक्षा सेवक बालमुकुंद तुरी को चयनमुक्त करने का निर्देश दिया है. वहीं, बाराहाट प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय भूरना (कन्या) में पदस्थापित शिक्षिका कमला देवी की सेवा समाप्त करते हुए उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया है.
पहला मामला चांदन प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय फूलजोरा से जुड़ा है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (साक्षरता) संजय कुमार यादव की ओर से जारी आदेश के अनुसार, बरमसिया निवासी मंटू रजक ने शिक्षा सेवक बालमुकुंद तुरी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज के आधार पर बहाली की शिकायत की थी. शिकायत की जांच में तुरी की ओर से प्रस्तुत मैट्रिक का प्रमाणपत्र किसी वैध बोर्ड से जारी नहीं पाया गया. इसके बाद विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा.
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दो बार नोटिस, जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई
विभाग की ओर से बालमुकुंद तुरी को एक अगस्त और फिर दो सितंबर को स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया था. आदेश के मुताबिक, दोनों बार नोटिस के बावजूद उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया.
जवाब नहीं मिलने और प्रमाणपत्र के वैध बोर्ड से जारी नहीं होने की स्थिति में विभाग ने इसे फर्जी मानते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया. चयन समिति और संबंधित प्रधानाध्यापक को मार्गदर्शिका 2018 के तहत तुरी को तत्काल प्रभाव से चयनमुक्त करने को कहा गया है.
बाराहाट में शिक्षिका की सेवा समाप्त
दूसरी कार्रवाई बाराहाट प्रखंड के ग्राम पंचायत नियोजन इकाई भूरना में हुई. पंचायत सचिव सह सदस्य सचिव संतोष कुमार सिंह ने संबंधित पत्रों और जिला शिक्षा पदाधिकारी की स्थापना शाखा के निर्देश के आधार पर प्राथमिक विद्यालय भूरना (कन्या) में कार्यरत शिक्षिका कमला देवी को पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी सेवा समाप्ति के पीछे लगाए गए आरोपों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है.
दोहरी कार्रवाई से विभाग में हड़कंप
शिक्षा विभाग की ओर से एक साथ की गई इन दोनों कार्रवाइयों से विभाग में हड़कंप मच गया है. खासकर फर्जी प्रमाणपत्र या अन्य अनियमितताओं के आधार पर नौकरी कर रहे कर्मियों के बीच कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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