बाढ़-पलायन या जातीय गणित, अलौली बनी बिहार चुनाव की सबसे हॉट सीट! ये वोटर तय करेंगे किसकी होगी जीत
Bihar Election 2025: खगड़िया की अलौली विधानसभा सीट जातीय समीकरण और विकास की चुनौतियों के कारण हमेशा सियासत में खास रही है. इस सीट पर मुसहर, यादव और मुस्लिम वोटर निर्णायक है.

बिहार के खगड़िया जिले की अलौली (सुरक्षित) विधानसभा सीट हमेशा से राज्य की सियासत में चर्चा का केंद्र रही है. 1962 में गठित यह सीट जातीय समीकरण और सामाजिक मुद्दों के कारण लगातार सुर्खियों में रहती है. यहां के चुनावी नतीजे अक्सर प्रदेश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करते हैं.
अलौली की चुनावी कहानी काफी दिलचस्प रही है. कांग्रेस ने शुरुआती वर्षों में 1962, 1967, 1972 और 1980 में जीत हासिल की. लेकिन समाजवादी विचारधारा के दलों का इस सीट पर दबदबा ज्यादा रहा है.
अलौली में समाजवादी खेमे की पार्टियों ने 11 बार जमाया कब्जा
अलौली के चुनाव में अब तक 11 बार समाजवादी खेमे की पार्टियों ने कब्जा जमाया है. जनता दल, राजद, जेडीयू और लोजपा ने दो-दो बार जीत दर्ज की है, जबकि संयुक्त समाजवादी पार्टी, जनता पार्टी और लोकदल को एक-एक बार सफलता मिली है. 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के रामवृक्ष सदा ने जेडीयू की साधना देवी को मात्र 2,773 वोटों से मात दी थी. 2015 में महागठबंधन के सहारे राजद-जेडीयू गठजोड़ ने लोजपा नेता पशुपति पारस को हराया था. 2020 में चिराग पासवान के एनडीए से अलग होने के कारण वोटों का बिखराव हुआ, जिसका सीधा फायदा राजद को मिला.
अलौली का क्या है जातीय समीकरण
2020 में इस सीट पर कुल 2,52,891 मतदाता थे, जो अब बढ़कर 2,67,640 हो गए हैं. इनमें अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 25.39 प्रतिशत है. सबसे बड़ी जातीय आबादी सदा (मुसहर) समुदाय की है, जिनकी संख्या करीब 65,000 है और यह समुदाय चुनावी नतीजों में निर्णायक साबित होता है. यादव मतदाता लगभग 45,000 हैं, जबकि मुस्लिम वोटरों की संख्या 15,000 यानी करीब 7.6 प्रतिशत है.
इसके अलावा कोयरी और कुर्मी समाज की कुल संख्या 35,000 है, पासवान समुदाय 10,000, मल्लाह 12,000 और राम समुदाय 6,000 के करीब है. अगड़ी जातियों की संख्या लगभग 8,000 और अन्य समुदायों की 70,000 है. इन विविध जातीय समीकरणों के कारण कोई भी दल केवल एक जाति पर भरोसा करके जीत दर्ज नहीं कर सकता.
अलौली क्षेत्र में क्या है विकास की चुनौतियां
अलौली क्षेत्र आज भी विकास की बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा है. सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव यहां की सबसे बड़ी समस्या है. यह इलाका बाढ़ और कटाव से लगातार प्रभावित रहता है, जिससे आधी से ज्यादा खेती योग्य जमीन जलमग्न हो जाती है. रोजगार की कमी के कारण पलायन यहां का गंभीर मुद्दा है.
Source: IOCL
























