'मैं साफ-साफ कह दूं कि...', एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने पर मनिका बत्रा का ताजा बयान, पूछे ये सवाल
Manika Batra Reaction: एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने पर मनिका बत्रा का ताजा बयान आया है. उन्होंने कहा कि वह क्लैरिटी की कमी और मनमानी स्वीकार नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने कई सवाल पूछे हैं.

एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने पर मनिका बत्रा का ताजा बयान आया है. उन्होंने कहा कि वह क्लैरिटी की कमी और मनमानी स्वीकार नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने कहा, "पिछले 2 दशकों से, मुझे सबसे ऊंचे लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है. अपने पूरे करियर में, मैंने जीत, हार, सिलेक्शन और नॉन-सिलेक्शन को स्वीकार किया है. यह टेबल टेनिस का एक हिस्सा है. लेकिन, जो बात मुझे स्वीकार करने में मुश्किल होती है, वह है क्लैरिटी की कमी और मनमानी." उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें जवाब नहीं मिले, या संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगी.
मनिका बत्रा ने अपने बयान में कई सवाल पूछे. उन्होंने लिखा, "पिछले कई दिनों से लोगों को यह कहते हुए देखा है कि मैं एशियन गेम्स टीम में जगह बनाना चाहती हूं. मैं स्पेशल कंसीडरेशन की माँग कर रही हूं. मैं यह साफ-साफ कह दूं कि मैं ये सेलेक्ट होने के लिए नहीं कर रही हूं. मैं किसी से भी ये नहीं कह रही हूं कि फैसला पलटे. मैं जवाब मांग रही हूं. मुझे सेलेक्ट नहीं करने का कोई खास कारण मुझे नहीं बताया गया है."
उन्होंने आगे कहा, "अभी मैं वर्ल्ड में 51वें नंबर पर हूं. हर हफ्ते टेबल टेनिस में रैंकिंग अपडेट होती है और रोलिंग पॉइंट्स सिस्टम पर काम करती है. इससे सवाल उठते हैं कि रैंकिंग का मूल्यांकन करते समय किस टाइमलाइन पर विचार किया गया था? क्या असेसमेंट पिछले 12 महीने, छह महीने, पिछले दो महीने, या एक हफ्ते के रैंकिंग स्नैपशॉट पर आधारित था?"
सिलेक्शन प्रोसेस पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा, "अगर कोई खिलाड़ी रैंकिंग में लगातार टॉप 50 में रहा, एक-दो हफ्ते में वह 50 से 51 पर आ जाता है, तो क्या इससे वह अचानक अयोग्य हो जाता है? ये ऐसे सवाल हैं जिनके क्लियर जवाब मिलने चाहिए. इस सीजन मेरा प्रदर्शन शानदार, मैंने टॉप एशियन प्लेयर्स और हाई-रेटेड चीनी अपोनेंट्स के खिलाफ जीत दर्ज की है. मुझे लगता है कि करंट फॉर्म और प्रदर्शन भी इवैल्यूएशन प्रोसेस का हिस्सा होना चाहिए. करंट फॉर्म एक ऐसी चीज है जिसे मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स भी एशियन गेम्स के लिए प्लेयर्स/टीम चुनते समय ध्यान में रखने का निर्देश देता है."
'हमें जानने का हक'
मनिका बत्रा ने आगे कहा, "मैं नेशनल इवेंट्स का बहुत सम्मान करती हूं और उनमें हिस्सा लेने पर मुझे हमेशा गर्व रहा है. लेकिन इंटरनेशनल सर्किट पर रेगुलर हिस्सा लेने वाले एथलीट्स को अक्सर एक इंटेंस ग्लोबल कैलेंडर, रिकवरी पीरियड्स, ट्रैवल, वीजा प्रोसेसिंग और बड़े इवेंट्स की तैयारी को मैनेज करना पड़ता है. डोमेस्टिक पार्टिसिपेशन को इंटरनेशनल कमिटमेंट्स से अलग करके नहीं देखा जा सकता. मैं यह देखकर भी हैरान हूं कि भारत के लिए प्रूवन रिकॉर्ड वाले प्लेयर्स को बाहर रखा गया. जिन एथलीट्स ने देश के लिए मेडल्स और नतीजे दिए हैं, उन्हें यह जानने का हक़ है कि ऐसे फैसले कैसे लिए गए."
अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए उन्होंने लिखा, "पिछले एशियन गेम्स में भारत के ऐतिहासिक महिला डबल्स मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं. जब ऐसी कामयाबियों वाले एथलीट्स को बाहर रखा जाता है, तो जाहिर है कि उन क्राइटेरिया और इवैल्यूएशन प्रोसेस पर सवाल उठते हैं, जिनकी वजह से ये निर्णय लिए गए. मुझे बताया गया है कि फ़ाइनल सिलेक्शन में वोटिंग प्रोसेस शामिल था. अगर यह सच है, तो मेरा मानना है कि एथलीट्स को यह जानने का अधिकार है कि ये फैसले किसने और किस आधार पर लिए. क्या कारण थे? क्या उन्हें डॉक्यूमेंट किया गया था? क्या उन्हें बताया गया था? क्या हितों के टकराव का खुलासा हुआ था?"
"क्या वोटिंग पर निर्भर कोई भी सिस्टम पक्षपात, निजी राय या पिछले मतभेदों से पूरी तरह मुक्त हो सकता है? अगर हां, तो निष्पक्षता और जवाबदेही पक्का करने के लिए क्या सुरक्षा उपाय मौजूद हैं? मेरा यह भी मानना है कि एथलीट्स को यह जानने का अधिकार है कि ये निर्णय कौन ले रहा है और वे सिलेक्शन प्रोसेस में क्या क्वालिफ़िकेशन या अनुभव लाते हैं. सिलेक्शन कमिटी के कितने सदस्यों ने इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है? कितनों ने ओलंपिक गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स या टेबल टेनिस के सबसे ऊंचे लेवल पर हिस्सा लिया है?"
"अगर मेरे खिलाफ वोट हुआ, तो उन वोटों के पीछे क्या कारण थे? क्या वे डॉक्यूमेंटेड परफॉर्मेंस क्राइटेरिया पर आधारित थे, या अपनी राय पर? इन सवालों के जवाब ट्रांसपेरेंट होने चाहिए। आइडियली, इन डिटेल्स को ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की भावना के साथ TTFI वेबसाइट पर डाल दिया जाना चाहिए था. ये जायज सवाल हैं, सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि हर उस एथलीट के लिए जो भारत को रिप्रेजेंट करने के लिए अपनी जिंदगी लगा देता है. मेरी चिंता सिर्फ एक सिलेक्शन डिसीजन को लेकर नहीं है. मेरी चिंता प्रोसेस में कंसिस्टेंसी, ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी को लेकर है."
कानूनी कार्यवाई की धमकी
मनिका बत्रा ने आगे लिखा, "मैंने लगभग 20 साल तक भारत को रिप्रेजेंट किया है. मैं कोई नासमझ एथलीट नहीं हूं जो एक सिलेक्शन डिसीजन पर इमोशनल होकर रिएक्ट करे. अगर मैंने पब्लिक में अपनी आवाज उठाने का फैसला किया है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि मुझे सच में लगता है कि कुछ जरुरी सवाल हैं जिनका जवाब नहीं मिला है. मैंने पहले भी ऐसा ही किया था, जिससे भारत में टेबल टेनिस के एडमिनिस्ट्रेशन में बड़े पैमाने पर गवर्नेंस रिफॉर्म हुए थे और कुछ लोग नाराज हो जाते."
"जब इंडियन टेबल टेनिस की बात आती है, तो मैं ट्रांसपेरेंसी, कंसिस्टेंसी और फेयरनेस की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती. इस खेल ने मुझे सब कुछ दिया है, और अगर मुझे लगता है कि कुछ सही नहीं है, तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं आवाज उठाऊं. मुझे पूरी उम्मीद है कि एक साफ और सही बात बताई जाएगी. लेकिन अगर मुझे इस फैसले के आधार के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलते हैं, तो मेरे पास अपनी लीगल टीम के जरिए कानूनी मदद सहित मेरे पास मौजूद सभी उपायों को आजमाने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा. इसलिए मैंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय खेल मंत्री से इस मामले को देखने का अनुरोध किया है."























