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दक्षिण अफ्रीका के सीनियर खिलाड़ियों को मेंटर की भूमिका निभानी चाहिए: फिलेंडर
दक्षिण अफ्रीका के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज वर्नन फिलेंडर अपने करियर के अंतिम पड़ाव में ‘मेंटर’ की भूमिका का लुत्फ उठा रहे हैं और चाहते हैं कि उनके समकक्ष खिलाड़ी खेल को कुछ वापस लौटाएं.

दक्षिण अफ्रीका के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज वर्नन फिलेंडर अपने करियर के अंतिम पड़ाव में ‘मेंटर’ की भूमिका का लुत्फ उठा रहे हैं और चाहते हैं कि उनके समकक्ष खिलाड़ी खेल को कुछ वापस लौटाएं. डेल स्टेन और मोर्ने मोर्कल की मौजूदगी वाली तेज गेंदबाजी तिकड़ी का फिलेंडर अहम हिस्सा रहे हैं लेकिन बाकी दोनों के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद इस प्रारूप में उन पर अधिक जिम्मेदारी आ गई है. दक्षिण अफ्रीका की ओर से 58 टेस्ट में 21.64 के शानदार औसत के साथ विकेट चटकाने वाले फिलेंडर ने पीटीआई को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘डेल और मोर्ने चैंपियन गेंदबाज रहे. उस समूह का मैं आखिरी गेंदबाज हूं लेकिन नई प्रतिभा ने मुझे रोमांचित किया है. केजी (कागिसो रबादा) ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है. दक्षिण अफ्रीका की गेंदबाजी में गहराई काफी अच्छी है और यह मेरी भूमिका है कि मैं नए खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करूं.’’ दक्षिण अफ्रीका की टीम का अब सभी प्रारूपों में वैसा दबदबा नहीं रहा जैसा हुआ करता था और एबी डिविलियर्स तथा हाशिम अमला जैसे सीनियर खिलाड़ियों के संन्यास लेने से ड्रेसिंग रूम में शून्य पैदा हो गया है. फिलेंडर ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहूंगा कि अब हमारी टीम कमजोर है. काफी खिलाड़ी सामने आ रहे हैं और कई खिलाड़ी टीम में जगह बनाने की कोशिश में लगे हैं.’’ मौजूदा टेस्ट से पहले अपने करियर में 214 विकेट चटकाने वाले फिलेंडर ने कहा, ‘‘हम सभी के करियर में कभी ना कभी ऐसा समय आता है जब हमें वह करना होता है जो निजी तौर पर आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है. आपको इन फैसलों का सम्मान करना होगा लेकिन मुझे लगता है कि हमारी व्यवस्था से अब भी स्तरीय खिलाड़ी आ रहे हैं.’’ फिलेंडर ने हालांकि सीनियर खिलाड़ियों से अपील की कि वे काउंटी क्रिकेट की सुरक्षा या टी20 लीग की चमक-धमक चुनने की जगह खेल को कुछ वापस दें. इस तेज गेंदबाज ने कहा, ‘‘हालांकि मैं चाहूंगा कि अधिक सीनियर खिलाड़ी संन्यास के बाद खेल को कुछ वापस दें. टीम को फिलहाल अनुभवी लोगों की जरूरत है. निजी तौर पर युवा खिलाड़ियों के मेंटर के रूप में मेरी भी बड़ी भूमिका है और मैं इसका लुत्फ उठा रहा हूं.’’ घरेलू हालात में घातक गेंदबाजी करने वाले फिलेंडर को यह थोड़ा अनुचित लगता है कि उन्हें ‘हरी पिचों पर गेंदबाजी करने वाला’ गेंदबाज कहा जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप स्वेदश से बाहर मेरा रिकार्ड देखो तो यह उतना बुरा नहीं है. भूमिका हालात के अनुसार बदल जाती है. यहां भारत में मेरी भूमिका विकेट चटकाने की है लेकिन यहां स्पिनर बड़ी भूमिका निभाते हैं. और हमें सुनिश्चित करना होगा कि हम रन गति पर अंकुश लगाकर अपना काम करें.’’
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Source: IOCL

















