नेशनल जियोग्राफी ने उन पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है. मरने से पहले सुसेन हर समय अपने पास एक कार्ड रखती थी ताकि कहीं भी उनकी मौत हो तो डॉक्टर्स को जानकारी दी जा सके जिससे जल्द से जल्द उनकी बॉडी फ्रोजन हो सके और खराब ना हो.
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एक महिला ने अपनी बॉडी डॉक्टर्स को ये सोच कर दान की है कि मेडिकल स्टूडेंट्स ह्यूमन बॉडी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल कर सकें. सुसेन का जब निधन हुआ तो उनकी उम्र 87 साल की थी. वो ये जानती थीं कि वो या उनकी बॉडी इस दुनिया के किसी ना किसी काम आएगी और वो हिस्ट्री बनेंगी. सभी फोटोः national geographic
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सुसेन पहली ऐसी महिला हैं जिनके हिप्स टाइटेनियम के थे. उनकी बॉडी को फ्रोजन किया हुआ है और वो रिसर्च के लिए उनके टुकड़े भी धीरे-धीरे किए जा रहे हैं.
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डॉक्टर्स ने इस बात का खुलासा किया कि सुसेन की बॉडी के 27 हजार टुकड़े किए जाएंगे जिससे स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट में मदद मिल सके. इसके बाद इनकी बॉडी के हर टुकड़े का डिजीटल रिकॉर्ड रखा जाएगा और हर पार्ट कंप्यूटर से स्कैन होगा.
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सुसेन ने मरने से कुछ साल पहले ख्वाहिश जताई थी कि वे मेडिकल स्टूडेंट्स के काम आना चाहती हैं. जब सुसेन ने ये ख्वाहिश जाहिर की उसके बाद वे 15 साल तक जिंदा रहीं. इस दौरान उनके ऊपर छोटी सी डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई.