हिंदी न्यूज़फोटो गैलरीबिजनेसOverdraft Facility: इमरजेंसी के समय बैंक की इस खास सुविधा का उठाएं लाभ, जानें ओवरड्राफ्ट के सभी डिटेल्स
Overdraft Facility: इमरजेंसी के समय बैंक की इस खास सुविधा का उठाएं लाभ, जानें ओवरड्राफ्ट के सभी डिटेल्स
Written By : ABP Live | Updated at : 24 Jun 2022 10:44 AM (IST)
ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी
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Overdraft Facility: बैंक अपने ग्राहकों को अलग-अलग तरह सुविधाएं देता है. यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारे खाते में जितने पैसे होते हैं हम उतना ही निकाल सकते हैं लेकिन, क्या आपको पता है कि अपनी जरूरत के अनुसार खाते में पैसे न होते हुए भी निकाल सकते हैं. कई बार हमें जीवन में अचानक पैसों को जरूरत पड़ जाती है. ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में लोन लेने का ख्याल आता है लेकिन, आप लोन के बजाय एक और सुविधा का लाभ उठा सकते हैं.
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इस सुविधा का नाम है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी. इस सुविधा के जरिए बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) अपने ग्राहकों को इमरजेंसी फंड देते हैं. ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी भी एक तरह का लोन ही है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने खाते में जमा पैसे से भी ज्यादा लोन ले सकता है.
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ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी और बैंक लोन में कुछ बड़े फर्क है. ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी में ब्याज का कैलकुलेशन रोज के आधार पर होता है. वहीं लोन में ब्याज का कैलकुलेशन महीने के आधार पर होता है. ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी पर आपको ज्यादा ब्याज का भुगतान करना पड़ता है. बैंक आपको कितनी राशि की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी देगी यह केवल बैंक पर निर्भर करता है.
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बैंक और NBFC दो तरह की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी देते हैं जो सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड. सिक्योर्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी में आपको एफडी, घर, प्रॉपर्टी, सैलरी आदि कुछ गिरवी रखना पड़ता है. वहीं अनसिक्योर्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी में आपको किसी तरह की प्रॉपर्टी को गिरवी नहीं रखना पड़ता है. अनसिक्योर्ड ओवरड्राफ्ट में आपको क्रेडिट कार्ड के जरिए विड्रॉल की सुविधा मिलती है.
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इसके साथ ही लोन लेने के बाद आपको हर महीने EMI के रूप में पैसों का प्रीपेमेंट करना पड़ता है. वहीं ओवरड्राफ्ट अमाउंट को आप एक बार में चुका सकते हैं. इसके साथ ही लोन लेने के मुकाबले ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का लाभ उठाना आसान होता है.
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बैंक के नियमों के मुताबिक ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी सिंगल और ज्वाइंट दोनों रूप में लिया जा सकता है. ऐसे में इन पैसों को लौटाने की जिम्मेदारी दोनों व्यक्ति की होती है. इसके साथ ही अलग दोनों लोग पैसों को नहीं चुकाते हैं तो गिरवी रखी हुई संपत्ति से पैसे वसूले जाते हैं.