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अमीर यूरोपीय देश एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन को क्यों बर्बाद कर रहे हैं? जानिए वजह

यूरोपीय देशों को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति कर दी गई है, मगर पांच डोज में से चार का अभी तक उपयोग नहीं किया जा रहा है. जानिए आखिर क्या है वजह?

दुनिया को डर है कि वैक्सीन असमता कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार को धीमा कर सकती है, इस बीच अमीर देश वैक्सीन को बर्बाद और राजनीति कर रहे हैं. यूरोप ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का 400 मिलियन डोज खरीदा और अब जिंदगी बचानेवाली दवा को बर्बाद कर रहा है. यही हाल जर्मनी का भी है, उसे एस्ट्राजेनेका की तरफ से वैक्सीन के 14 लाख डोज आपूर्ति किए गए, लेकिन 24 फरवरी तक सिर्फ 1 लाख 89 हजार डोज लोगों को डोज लगाया गया. बिना इस्तेमाल के डोज की संख्या 12 लाख 62 हजार बच गई है.

इटली में करीब 5 लाख डोज की आपूर्ति की गई थी, उसमें से सिर्फ एक लाख डोज का इस्तेमाल किया गया है. बिना इस्तेमाल के डोज की संख्या 4 लाख 20 हजार है. बेल्जियम को वैक्सीन का 2 लाख डोज मिला, उसमें से उसने 24 फरवरी तक 10 हजार तक भी लोगों को नहीं लगाया. यूरोपीय सेंटर फोर डिजीज प्रीवेंशन एंड कंट्रोल के डेटा के मुताबिक, देश के पास वैक्सीन के 1 लाख 91 हजार डोज बिना इस्तेमाल के बचे हुए हैं. गार्जियन अखबार के मुताबिक, यूरोपीय देशों को आपूर्ति की गई ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के 5 में से 4 डोज का अब भी इस्तेमाल किया जाना है.

यह क्या समझाता है? यूरोपीय देशों ने मुहैया फाइजर वैक्सीन का 80 फीसद इस्तेमाल कर लिया है. ऐसे में सवाल पैदा होता है कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को क्यों बर्बाद किया जा रहा है? जनवरी में, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों ने कहा था कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन उम्र दराज ग्रुप के लिए 'अर्ध अप्रभावी' है. जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड बुजुर्गों पर मानव परीक्षण के डेटा का हवाला देते हुए एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को 65 साल से ऊपर के लोगों को नहीं दे रहे हैं.

यूरोपीय यूनियन ने सभी उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन की मंजूरी दी है. लेकिन सरकारी नियामक संस्थाएं 65 साल से नीचे के लोगों के लिए वैक्सीन को सीमित कर रही हैं. जर्मनी में गाइडलाइन्स को अपडेट करने की मांग की जा रही है लेकिन काफी गलत जानकारी भी है. जनवरी में जर्मन के दैनिक ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें उसने बताया था कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन 65 साल से ऊपर के बुजुर्गों पर सिर्फ 8 फीसद ही प्रभावी हो सकती है.

एस्ट्राजेनेका ने रिपोर्ट को 'पूरी तरह गलत' बताया था और उसका खंडन पहले ही जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कर दिया था. उसने कहा था कि 56 और 69 साल पर किए गए रिसर्च में लोगों की संख्या 8 फीसद थी. उस ग्रुप के मानव परीक्षण में शामिल वॉलेंटियर की तादाद 10 फीसद से कम थी लेकिन नतीजे अब तक सकारात्मक रहे. रिपोर्ट कहती है कि वैक्सीन 80 साल और ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा पहले डोज के चंद हफ्तों बद 80 फीसद तक कम कर रही है.

यूरोपीय देश बुजुर्गों को डोज क्यों नहीं लगा रहे? फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि वैक्सीन अब गंभीर स्वास्थ्य का खतरा वाले 65-75 वर्षीय लोगों को मुहैया होगी, उसके बाद राष्ट्रपति ने अपना इरादा बदल लिया. माना जा रहा था कि यूरोप को मार्च के अंत तक एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का 80 मिलियन डोज मिल जाएगा. जनवरी में एस्ट्राजेनेका ने बताया था कि कंपनी सिर्फ 31 मिलियन डोज की आपूर्ति करने में सक्षम होगी यानी सहमत मात्रा से 60 फीसद कम, जबकि एस्ट्राजेनेका ने बेल्जियम की फैक्ट्री में उत्पादन संबंधी वजह बताई थी, जिसे यूरोपीय यूनियन ने समझौते का उल्लंघन माना.

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