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US Tariff: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद IEEPA पर बहस तेज, ट्रंप प्रशासन अपनाएगा दूसरा रास्ता, जानें पूरा मामला

US Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले के बाद IEEPA चर्चा में. जानिए IEEPA क्या है, ट्रंप को क्यों झटका लगा और प्रशासन किन वैकल्पिक कानूनी रास्तों से टैरिफ लागू करेगा.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ आदेशों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका दिया है. हालांकि बदले हालात में अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि अदालत ने सिर्फ इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार पर रोक लगाई है न कि टैरिफ नीति पर.

डलास इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए बेसेंट ने कहा, “यह साफ कर लिया जाए कि फैसला क्या था और क्या नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ कोई व्यापक फैसला नहीं दिया है. छह जजों ने केवल यह कहा कि IEEPA का इस्तेमाल 1 डॉलर का भी रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता.”

टैरिफ रेवेन्यू में बदलाव नहीं: बेसेंट

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रशासन टैरिफ लागू करने के लिए अल्टरनेटिव लीगल अथॉरिटीज का इस्तेमाल करेगा. उन्होंने कहा, 'हम सेक्शन 232 और सेक्शन 301 टैरिफ अथॉरिटीज का लाभ उठाएंगे, जिन्हें हजारों कानूनी मामलों में वैध ठहराया गया है.' उन्होंने यह भी कहा कि सेक्शन 122 अथॉरिटी, संभावित रूप से बढ़े हुए सेक्शन 232 और 301 टैरिफ के साथ मिलकर, 2026 में टैरिफ रेवेन्यू में “लगभग कोई बदलाव” नहीं आने देगी.

सुप्रीम कोर्ट का 6-3 फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के IEEPA कानून का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर आयात टैरिफ लगाते समय अपने कानूनी अधिकारों का अतिक्रमण किया. अदालत के अनुसार IEEPA राष्ट्रपति को व्यापक आयात शुल्क लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता, क्योंकि यह शक्ति संविधान के तहत कांग्रेस के पास है. इस फैसले के बाद ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की और कहा कि वह 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करेंगे. यह प्रावधान 150 दिनों के लिए 15% तक का अस्थायी आयात अधिभार लगाने की अनुमति देता है.

IEEPA क्या है?

IEEPA यानी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, 1977 में पारित अमेरिकी संघीय कानून है. यह कानून राष्ट्रपति को “नेशनल इमरजेंसी” की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन को कंट्रोल करने का व्यापक अधिकार देता है. लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस के अनुसार, यह कानून 1976 के नेशनल इमरजेंसी एक्ट के बाद पारित किया गया था, ताकि राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों को परिभाषित और सीमित किया जा सके. इसमें पारदर्शिता और रिपोर्टिंग की शर्तें भी शामिल की गईं.

IEEPA के तहत राष्ट्रपति आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) लगा सकते हैं, विदेशी संपत्तियां फ्रीज कर सकते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले देशों या संस्थाओं के साथ व्यापार पर रोक लगा सकते हैं

77 बार इस्तेमाल हुआ IEEPA

आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने IEEPA का इस्तेमाल आमतौर पर विदेशी सरकारों, आतंकवादी संगठनों या राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर अंकुश लगाने के लिए किया है. पिछले सितंबर तक IEEPA के तहत 77 राष्ट्रीय आपात स्थितियां घोषित की जा चुकी थीं.इस कानून का पहला बड़ा इस्तेमाल तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ईरान बंधक संकट (1979) के दौरान किया था, जब अमेरिका में रखी ईरानी सरकारी संपत्तियों को फ्रीज किया गया था.

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