'भारत-पाक विवाद को निपटाने में सिस्टम बेअसर', US का बड़ा बयान
मार्को रुबियो ने UNGA के दौरान कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सिस्टम भारत-पाकिस्तान जैसे संभावित संघर्षों से निपटने में प्रभावी नहीं है.

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि दुनिया में बड़े विवादों को सुलझाने के लिए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है. उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव का भी उदाहरण दिया.
रुबियो ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की उपयोगिता को समझता है और संयुक्त राष्ट्र में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था अपनी क्षमता के मुताबिक काम नहीं कर पा रही है. उन्होंने कहा कि कई नेताओं ने UNGA के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है. रुबियो के मुताबिक यह व्यवस्था अपने मूल मकसद और अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ गई है और दुनिया के कई बड़े संघर्षों से प्रभावी ढंग से निपटने में असमर्थ है.
रुबियो ने किसका दिया उदाहरण?
रुबियो ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सिस्टम होता तो वह थाईलैंड-कंबोडिया के बीच संघर्ष, भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव और दूसरे बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने में मदद कर सकता था. उनके मुताबिक फिलहाल ऐसी प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती.
अमेरिका के लिए राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर
रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आलोचना का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अलग हो रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि जब ऐसी व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं करती, तब देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेते हैं. रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका अपने राष्ट्रीय हित को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के हित से ऊपर रखेगा. यह टिप्पणी अमेरिका की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की ट्रंप प्रशासन की नीति को दोहराती है.
भारत-पाकिस्तान का जिक्र क्यों आया?
रुबियो का बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने UN महासभा में एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को खत्म कराने में भूमिका निभाई थी. ट्रंप लंबे समय से 10 मई 2025 को हुए युद्धविराम का श्रेय अमेरिकी मध्यस्थता को देते रहे हैं. हालांकि, भारत का आधिकारिक रुख अलग रहा है. भारत के अनुसार 10 मई 2025 को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों, खासकर दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी. भारत ने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है. भारत सरकार के 2025 के आधिकारिक बयान में भी कहा गया था कि पाकिस्तान के DGMO ने भारतीय DGMO से संपर्क किया.






















