UNSC में सुधार के लिए G4 ने दिखाई ताकत, भारत संग 4 देश, जॉइंट स्टेटमेंट जारी
G4 देशों भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने UNSC सुधार की मांग दोहराई है. चारों देशों ने स्थायी और अस्थायी सदस्यता बढ़ाने, अफ्रीका को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया.

भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के समूह G4 ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जल्द सुधार की मांग दोहराई है. 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में G4 ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.
G4 देशों के विदेश मंत्रियों ने 80वें महासभा सत्र के दौरान सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर हुई Intergovernmental Negotiations (IGN) की चर्चा की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि करीब 18 साल से चल रही इस प्रक्रिया के बावजूद सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार की दिशा में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है. G4 का कहना है कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना करीब 8 दशक पुरानी है और यह आज की दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को पूरी तरह नहीं दिखाती. उनके अनुसार इससे परिषद के प्रतिनिधित्व, भरोसे और काम करने की क्षमता पर सवाल उठते हैं.
MEA | G4 nations—India, Brazil, Germany, Japan—issue joint statement pushing for UNSC reforms. Foreign Ministers meet on the margins of the 81st UNGA session in New York and call the current UN Security Council structure an "anachronistic, eight-decades-old architecture" that is… pic.twitter.com/KEDINBxVWn
— ANI (@ANI) September 24, 2026
स्थायी और अस्थायी दोनों सीटें बढ़ाने की मांग
G4 ने सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सदस्यता बढ़ाने की मांग दोहराई है. चारों देशों का कहना है कि अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन जैसे क्षेत्रों को परिषद में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. G4 ने अफ्रीकी देशों के सुधार प्रस्ताव का भी स्वागत किया है. समूह ने अफ्रीका को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दिए जाने की उसकी मांग का समर्थन जारी रखने की बात कही है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने भी 22 सितंबर को सुरक्षा परिषद सुधार की जरूरत और खास तौर पर अफ्रीका के कम प्रतिनिधित्व को प्रमुख मुद्दा बताया था.
ब्रिजिंग प्रपोजल पर G4 की आपत्ति
G4 ने IGN में सामने आए तथाकथित ‘ब्रिजिंग प्रपोजल’ पर भी आपत्ति जताई. G4 के मुताबिक यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार करने के पक्ष में मौजूद सदस्य देशों की राय को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाता. G4 ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद सुधार पर बातचीत में आम सहमति को पहले से जरूरी शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए. समूह का कहना है कि UN चार्टर और IGN के मौजूदा अधिकार-क्षेत्र के तहत सुधार पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यही जरूरी नहीं है कि पहले सभी देश एक राय पर पहुंचें.
अब टेक्स्ट आधारित बातचीत शुरू करने पर जोर
G4 ने कहा कि आगे वह दूसरे सुधार समर्थक देशों और समूहों के साथ मिलकर एक ऐसा साझा मॉडल तैयार करने की कोशिश करेगा, जो सदस्य देशों के बीच मौजूद व्यापक समर्थन को बेहतर तरीके से दिखा सके. इसके बाद टेक्स्ट-आधारित बातचीत शुरू करने पर जोर दिया गया है. G4 का मानना है कि लिखित प्रस्ताव पर बातचीत शुरू होने से अलग-अलग देशों की राय और मतभेद को ज्यादा स्पष्ट तरीके से सामने लाया जा सकेगा. संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार के लिए IGN प्रक्रिया 2008 से चल रही है.
भारत की भूमिका क्या है?
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है. भारत G4 के साथ ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर इस मुद्दे को आगे बढ़ाता रहा है. G4 ने कहा है कि चारों देश संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस मुद्दे पर आपसी तालमेल बनाए रखेंगे. बैठक में संबंधित अधिकारियों को आगे की बातचीत जारी रखने और नई दिल्ली में होने वाली अगली डायरेक्टर जनरल स्तर की बैठक में इसकी समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है.
UNSC सुधार इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी है. मौजूदा परिषद में 5 स्थायी सदस्य हैं. इसमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन है, जबकि 10 अस्थायी सदस्य दो साल के लिए चुने जाते हैं.






















