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'दुनिया पर संकट खत्म...', सीजफायर के बाद बोले खामेनेई के प्रतिनिधि, न्यूक्लियर प्रोग्राम पर भी कह दी बड़ी बात

ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने कहा कि दूसरे देशों को एहसास है कि अगर इस खाड़ी, फारस की खाड़ी में लड़ाई और संकट होता है, तो उन्हें नुकसान होगा इसलिए अब उन्हें एक साथ आवाज उठानी होगी .

ईरान में संघर्ष विराम की घोषणा की चौतरफा प्रशंसा हो रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक ट्रुथ सोशल पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. ईरान की ओर से भी 2 हफ्ते की अस्थाई सहमति जताई गई है. बदले भू-राजनीतिक हालात के बीच कुछ सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं. भारत में ईरानी के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ईरान की सोच-विचार और उसकी कोशिशों के बारे में बताया है. आईएएनएस से एक्सक्लूसिव बातचीत में इलाही ने स्पष्ट कहा कि ईरान ये संघर्ष नहीं चाहता था और हम कभी भी न्यूक्लियर वेपन के समर्थक नहीं रहे.

डॉ. इलाही मानते हैं कि अमेरिका संघर्षविराम के लिए मजबूर हुआ. उन्होंने इसकी वजहें भी गिनवाईं. उन्होंने कहा, 'यूएस को संघर्ष विराम का ऐलान करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वे जंग जारी नहीं रख सकते थे. उन्होंने बहुत बड़ी गलती की थी. पिछले 41 दिनों में वे जंग रोकना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके. आखिर में, जब उन्हें एहसास हुआ कि वे इस युद्ध को जारी नहीं रख सकते और वे और हारेंगे, तो उन्होंने सीजफायर के नाम पर इस युद्ध को रोकने का ऐलान किया.'

इलाही ने कहा, 'मुझे लगता है कि शुरू से ही हम जंग नहीं चाहते थे. यह जंग हम पर थोपी गई थी. दूसरी बात, हमें एहसास हुआ कि इस जंग से अलग-अलग देशों के बहुत से अलग-अलग लोगों को नुकसान हुआ है, और हम ऐसा नहीं चाहते थे.'

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि सीजफायर से कोई स्थाई हल निकल सकता है? तो ईरान के सुप्रीम लीडर के रिप्रेजेंटेटिव बोले, 'हमारी शर्त के साथ, अगर वे हमारी शर्तें मान लेते हैं, तो हां, यह इस जंग का अंत होगा.'

अमेरिका का आरोप कि ईरान यूरेनियम संवर्द्धन में लगा है पर ईरान का क्या मत है? डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने सुप्रीम लीडर की बात याद करते हुए कहा, '...शुरू से ही, शायद 30 साल या उससे भी पहले, हमारे सुप्रीम लीडर ने साफ-साफ ऐलान किया था कि परमाणु हथियार हमारे धर्म के हिसाब से हराम है, ये हमारे पास नहीं हो सकता. हम नहीं चाहते, हम नहीं चाहते थे, हम अभी नहीं चाहते और भविष्य में भी नहीं, कभी नहीं, हम न्यूक्लियर वेपन नहीं चाहते और यह बात सब जानते हैं.'

आखिर जो संकट पैदा हुआ उसकी वजह क्या रही? गल्फ देशों ने भी ईरान पर कुछ आरोप लगाए हैं. इस पर इलाही ने कहा, 'इस इलाके में झगड़े, संकट तब से पैदा हुए जब से अमेरिका 7,000 मील दूर से इस इलाके में आया और इस इलाके में बहुत सारे झगड़े और मुश्किलें लेकर आया. यह पहली बात है. दूसरी बात जो मैं ऐलान करना चाहता हूं, वह यह है कि हम जानते हैं कि अमेरिका हम पर न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन से हमला नहीं करता. वे बेस कहां हैं जिनका इस्तेमाल करके अमेरिका ने हम पर हमला किया? बिल्कुल, वे बेस इसी अरब देश में थे.'

ईरान को उम्मीद है कि दुनिया समझ चुकी है कि इस क्षेत्र को छेड़ा तो नुकसान किसी एक को नहीं पूरी दुनिया को उठाना पड़ सकता है. इलाही ने उम्मीद जताई कि वैश्विक संकट खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि यह ग्लोबल संकट खत्म हो जाएगा, लेकिन दूसरे देशों को एहसास है कि अगर इस खाड़ी, फारस की खाड़ी में लड़ाई और संकट होता है, तो उन्हें नुकसान होगा इसलिए अब उन्हें एक साथ आवाज उठानी होगी और इस इलाके में किसी भी देश पर हमला करने से रोकना होगा.'

 

यह भी पढ़ें:-:
Israel Iran War: सीजफायर के कुछ ही घंटे बाद ईरान के ऑयल रिफाइनरी पर ब्लास्ट, तेहरान का UAE-कुवैत पर हमला

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