US Iran War: सीजफायर का असर आसमान तक! 40 दिन बाद इराक ने खोला एयरस्पेस, ईरान अब भी ‘नो-फ्लाई जोन’
US Iran War Update: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद इराक ने अहम फैसला किया है. उसने अपना एयरस्पेस खोल दिया है.

पश्चिम एशिया में युद्धविराम का असर अब जमीन से लेकर आसमान तक दिखने लगा है. अमेरिका-ईरान सीजफायर की घोषणा के बाद इराक ने बड़ा फैसला लेते हुए बुधवार से अपना एयरस्पेस फिर से खोल दिया है. Iraqi Civil Aviation Authority ने सुरक्षा समीक्षा के बाद सभी कमर्शियल उड़ानों को फिर से शुरू करने की मंजूरी दे दी है.
एविएशन अथॉरिटी के प्रमुख बेंगिन रेकानी ने साफ कहा, “आज से एयरस्पेस और सभी इराकी एयरपोर्ट्स को खोल दिया जाएगा.” यह फैसला करीब 40 दिनों की बंदी के बाद लिया गया है, जब क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते उड़ानों पर रोक लगा दी गई थी.
ट्रंप के ऐलान के बाद बदला माहौल
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार को ऐलान किया, “हमने ईरान पर बमबारी और हमले को दो हफ्तों के लिए रोकने पर सहमति जताई है.” यह घोषणा उस डेडलाइन से कुछ घंटे पहले आई, जिसमें ईरान को स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ खोलने या बड़े हमले का सामना करने की चेतावनी दी गई थी. सीजफायर के इस संकेत ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ एविएशन सेक्टर को भी राहत दी.
ईरान का आसमान अब भी खाली
हालांकि इराक ने अपना एयरस्पेस खोल दिया है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक 8 अप्रैल को शाम 4 बजे (IST) तक ईरान के ऊपर एयर ट्रैफिक लगभग न के बराबर रहा. दरअसल, मिसाइल हमलों और सैन्य गतिविधियों के खतरे के चलते दुनियाभर की एयरलाइंस अभी भी ईरान के एयरस्पेस से दूरी बनाए हुए हैं.
इस पूरे संकट की जड़ 28 फरवरी को शुरू हुई वह सैन्य टकराव है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था. इसके बाद ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया. इस संघर्ष में अब तक 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व तक को नुकसान हुआ.
भारत पर भी गहरा असर
इस संकट का असर भारत के एविएशन सेक्टर पर भी साफ दिखा. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 10,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. जहां पहले भारतीय एयरलाइंस रोजाना 300–350 उड़ानें मिडिल ईस्ट के लिए ऑपरेट करती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 80–90 रह गई है. लंबे रूट, बढ़ती ईंधन लागत और एयरस्पेस प्रतिबंधों ने एयरलाइंस पर दबाव बढ़ा दिया है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ने से टिकट भी महंगे हुए हैं.
इराक का एयरस्पेस खुलना एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन जब तक ईरान के ऊपर उड़ानें सामान्य नहीं होतीं, तब तक वैश्विक एविएशन पूरी तरह पटरी पर लौटता नहीं दिख रहा. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह सीजफायर लंबे समय तक कायम रहेगा—क्योंकि अगर शांति बनी रही, तो आसमान में फिर से वही रफ्तार लौट सकती है, जो पिछले डेढ़ महीने से थम सी गई थी.
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Source: IOCL



























