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50 सालों में बेहद खराब हो चुका है धरती का संतुलन, संभल जाएं नहीं तो चुकानी पड़ सकती है बड़ी कीमत- UN रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के World Meteorological Organization की रिपोर्ट में ये बात कही गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक प्रकृति के साथ इस खिलवाड़ का खामियाजा अंत में इंसान को खुद ही अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है.

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कहा है कि बीते 50 सालों में धरती का संतुलन बेहद ज्यादा बिगड़ चुका है. यहीं वजह है कि रोजाना धरती के किसी ना किसी कोने से छोटी या बड़ी त्रासदी के होने की खबर सामने आ रही हैं. साथ ही में UN ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इंसान ने जल्द ही प्रकृति के साथ अपनी मनमानी नहीं रोकी तो क़ुदरत के इस क्रोध को रोकना बिलकुल असंभव हो जाएगा. 

संयुक्त राष्ट्र (UN) के World Meteorological Organization (WMO) की रिपोर्ट में ये बात कही गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रकृति के साथ इस खिलवाड़ का खामियाजा अंत में इंसान को खुद ही अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है. आइए जानते हैं क्या कहते हैं UN की इस रिपोर्ट के आंकड़े.

जानमाल के नुकसान का बना है कारण 

दुनिया का एक भी कोना ऐसा नहीं है जहां बीते पचास सालों में क़ुदरती कहर ना बरपा हो. इस दौरान बड़ी संख्या में जानमाल का नुकसान भी हुआ है. लाखों लोगों को क़ुदरत के कहर के हाथों अपनी जान गंवानी पड़ी है. कहीं कहीं तो पूरा का पूरा गांव-शहर इसका शिकार हो चुका है. 

WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, "कुदरत के तांडव ने दुनिया को सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाया बल्कि लाखों जिंदगियों को भी लील लिया है. कुदरती आपदाओं के चलते दुनिया को रोजाना औसतन 1475 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. यही नहीं रोजाना औसतन 115 लोग इन आपदाओं में अपनी जान गंवाते हैं. रोजाना कहीं चक्रवाती तूफान तो कहीं बारिश से बाढ़ के हालात इस जानमाल के नुकसान का कारण बन रहे हैं. 

1970 से 2019 के बीच विश्व भर में आई 1 हजार आपदाएं

WMO की रिपोर्ट के मुताबिक 1970 से 2019 के बीच इन पचास सालों में दुनिया भर में अलग-अलग रूप में 11 हजार आपदाएं आई हैं. जिसके चलते पूरी दुनिया को 266 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. साथ ही में इन आपदाओं में करीब 20 लाख लोगों मौत हुई है. मरने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा विकासशील देशों में दर्ज हुई है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन देशों के पास इस तबाही के दौरान इस से निपटने की तैयारी ही नहीं थी.

रिपोर्ट के मुताबिक 1970 से 1979 के बीच आपदाओं की वजह से रोजाना 358 करोड़ का नुकसान होता था, लेकिन 2010 से 2019 के बीच आपदा की वजह से दुनिया को रोजाना 2797 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ. 

हालांकि राहत की बात ये है कि पहले के मुकाबले अब लोगों की जान कम जा रही है. 1970 से 1980 के बीच रोजाना औसतन 170 लोग आपदा से जुड़ी घटानाओं में अपनी जान गंवा रहे थे. 1990 से 1999 के बीच मरने वालों की औसत संख्या घटकर 90 हो गई जबकि 2010 से 2019 के बीच आपदा से जुड़ी घटानाओं में मृत्यु की संख्या औसतन 40 पर पहुंच गई है जो सबसे कम है. 

भारत को हो रहा है चक्रवाती तूफानों से सबसे ज्यादा नुकसान

भारत को सबसे ज्यादा नुकसान चक्रवाती तूफानों से हो रहा है. देश के 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सीधे-सीधे चक्रवाती तूफानों से प्रभावित हो रहे हैं. 80 के दशक में देश में औसतन तीन चक्रवाती तूफान आते थें, लेकिन 2010 से 2019 के बीच देश में हर साल चार चक्रवाती तूफान आए हैं. साल 2018 और 2019 में तो हालात और भी खराब रहे जब देश ने 7-7 चक्रवाती तूफ़ानों का सामना किया है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, इन क़ुदरती आपदाओं की सबसे ज्यादा मार एशियाई महाद्वीप पर पड़ी है. 1970 से 2019 के बीच एशिया में 3454 आपदाएं आई हैं. जिनमें 9 लाख 75 हजार 622 लोगों की मौत हुई है और 87.66 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 

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