शांति समझौते के बाद यूक्रेन की रक्षा कैसे होगी? पेरिस में बड़ा मंथन, वेनेजुएला संकट से बदली अमेरिका की भूमिका
Ukraine Security Paris Summit: रूस ने साफ कहा है कि जब तक पूरा समझौता नहीं होता, सीजफायर संभव नहीं है. साथ ही क्रेमलिन ने यूक्रेन में NATO देशों की सेना की तैनाती को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

यूक्रेन और रूस के बीच अगर भविष्य में शांति समझौता होता है, तो उसके बाद यूक्रेन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए, इसी मुद्दे पर यूक्रेन के सहयोगी देशों की एक अहम बैठक मंगलवार को पेरिस में हुई. इस बैठक में कई बड़े फैसले होने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए बातचीत का नतीजा अनिश्चित माना जा रहा है.
अमेरिका का फोकस बदला, यूरोप में बढ़ी चिंता
इस बैठक पर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब ट्रंप प्रशासन का ध्यान वेनेजुएला की ओर जाता दिखा और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के बयानों से यूरोप में तनाव बढ़ गया. वहीं रूस ने भी अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है और अपनी शर्तों पर कायम है.
‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ से मैक्रों को थी उम्मीद
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बैठक को लेकर पहले उम्मीद जताई थी. उन्होंने कहा था कि यह समूह, जिसे ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ कहा जा रहा है, कई महीनों से इस बात पर काम कर रहा है कि अगर रूस युद्ध रोकता है तो भविष्य में किसी भी रूसी हमले को कैसे रोका जाए.
शांति और सुरक्षा को लेकर ठोस वादों की बात
31 दिसंबर को दिए अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा था कि बैठक में शामिल देश यूक्रेन की सुरक्षा और स्थायी शांति के लिए ठोस वादे करेंगे. उनके कार्यालय के मुताबिक, यह बैठक खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में नेता खुद मौजूद हैं.
35 देशों के प्रतिनिधि, 27 राष्ट्राध्यक्ष शामिल
मैक्रों के कार्यालय ने बताया कि इस बैठक में 35 प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें 27 देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री थे. अमेरिका की ओर से स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर ने बैठक से पहले मैक्रों से मुलाकात की.
रूस की सख्त शर्तें, NATO सेना को नकारा
रूस ने साफ कहा है कि जब तक पूरा समझौता नहीं होता, सीजफायर संभव नहीं है. साथ ही क्रेमलिन ने यूक्रेन में NATO देशों की सेना की तैनाती को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
जेलेंस्की और सैन्य अधिकारियों की अहम मुलाकातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बैठक से पहले मैक्रों से मुलाकात की. इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और यूक्रेन के सैन्य प्रमुखों की बैठक हुई, जिसमें NATO के शीर्ष अमेरिकी कमांडर भी शामिल रहे. बातचीत का फोकस यूक्रेन को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटी पर रहा.
किन मुद्दों पर बनी सहमति की कोशिश
बैठक में पांच अहम मुद्दों पर चर्चा हुई-
- सीजफायर की निगरानी कैसे होगी
- यूक्रेन की सेना को कैसे मजबूत किया जाए
- जमीन, समुद्र और हवा में बहुराष्ट्रीय सेना की तैनाती
- भविष्य में रूस के किसी हमले की स्थिति में क्या किया जाएगा
- यूक्रेन के साथ लंबी अवधि का रक्षा सहयोग
वेनेजुएला संकट से बदली अमेरिका की भूमिका
मैक्रों के कार्यालय ने बताया कि पहले इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आने वाले थे, लेकिन वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद उन्होंने अपनी योजना बदल दी.
ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान से यूरोप एकजुट
इसी बीच ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की बात दोहराई. इसके बाद फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन ने डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया.
यूक्रेन को अमेरिका से ठोस भरोसे की जरूरत
यूक्रेन चाहता है कि उसे अमेरिका से साफ और मजबूत सुरक्षा गारंटी मिले, ताकि बाकी देश भी उसी आधार पर आगे आएं. कीव को डर है कि बिना ठोस गारंटी के कोई भी सीजफायर रूस को दोबारा हमला करने का मौका दे सकता है.
बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर बातचीत में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है. उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच चर्चा का मकसद युद्ध को खत्म करना और यह सुनिश्चित करना है कि वह दोबारा शुरू न हो.
Source: IOCL






















