एक्सप्लोरर

तख़्तापलट 7:  पाकिस्तान का वो प्रधानमंत्री जो हटा तो देश में मार्शल लॉ लग गया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों पर आधारित खास सीरीज तख्तापलट में पढ़िए कहानी सातवें वजीर-ए-आजम सर फिरोज खान नून की, जिन्हें हटाने के बाद पूरे मुल्क में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था.

1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद सर फिरोज खान नून ही वो पहले शख्स थे, जिन्हें तब पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने सऊदी अरब और दूसरे इस्लामिक मुल्कों में भेजा ताकि वो इस्लामिक मुल्कों में पाकिस्तान की अहमियत कायम कर सकें और बता सकें कि अब दुनिया के सामने एक और मुल्क है जो पूरी तरह से इस्लामिक है. इसका एक मकसद ये भी था कि इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान को मान्यता दें और साथ ही एक नए बने इस्लामिक मुल्क को आर्थिक मदद भी दें ताकि वो अपने पैरों पर खड़ा हो सके. सर फिरोज खान नून अपने मकसद में कामयाब भी रहे थे.

1950 में पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम रहे लियाकत अली खान ने फिरोज खान नून को पूर्वी पाकिस्तान का गवर्नर बना दिया. लेकिन फिरोज खान नून की व्यक्तिगत दिलचस्पी पश्चिमी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में थी. वो पूर्वी पाकिस्तान की सियासत में जरा भी दिलचस्पी नहीं ले रहे थे. और यही वजह थी कि जब भाषा के नाम पर 1952 में पूर्वी पाकिस्तान बनाम पश्चिमी पाकिस्तान की लड़ाई शुरू हुई तो उन्होंने इस लड़ाई को रोकने की कोई सियासी पहल नहीं की, बल्कि वो ढाका छोड़कर पंजाब लौट आए. हालांकि नवंबर के आखिरी महीनों में कुछ दिनों के लिए उन्हें फिर से पूर्वी पाकिस्तान का गवर्नर बनाया गया था. लेकिन 1953 में जब पंजाब में जमात-ए-इस्लामी ने अहमदिया मुस्लिमों के खिलाफ दंगे किए और जब वहां के मुख्यमंत्री मुमताज दौलताना उस दंगे को रोकने में नाकाम रहे तो प्रधानमंत्री रहे ख्वाजा नजीमुद्दीन ने मुमताज दौलताना को पद से हटा दिया था और उनकी जगह ली थी तब पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर रहे सर फिरोज खान नून ने.

लेकिन 1955 आते-आते फिरोज खान नून मुस्लिम लीग से अलग हो गए और वो रिपब्लिकन पार्टी के साथ चले गए. उन्हें रिपब्लिकन पार्टी का अध्यक्ष भी बना दिया गया. इस्कंदर मिर्जा के राष्ट्रपति बनने के बाद फिरोज खान नून को हुसैन सुहरावर्दी की सरकार में विदेश मंत्री बना दिया गया. ये सरकार तीन पार्टियों की मिली जुली सरकार थी, जिसमें मुस्लिम लीग, अवामी लीग और रिपब्लिकन पार्टी शामिल थी. अवामी लीग के सुहरावर्दी के इस्तीफे के बाद मुस्लिम लीग के चुंदरीगर वजीर-ए-आजम बने थे और उनके इस्तीफे के बाद नंबर था रिपब्लिकन पार्टी के नेता का. और तब फिरोज खान नून रिपब्लिकन पार्टी के निर्विवाद नेता थे, जिन्हें अवामी लीग के साथ ही नेशनल अवामी पार्टी और कृषक श्रमिक पार्टी ने भी समर्थन देकर वजीर-ए-आजम बना दिया. 16 दिसंबर, 1957 को सर फिरोज खान नून ने पाकिस्तान के सातवें वजीर-ए-आजम के तौर पर शपथ ली.

वजीर-ए-आजम बनने के बाद नून ने दो बड़े काम किए, जिससे राष्ट्रपति इस्कंदर अली मिर्जा को अपनी कुर्सी पर खतरा नज़र आने लगा. पहला बड़ा काम नून का था ग्वादर बंदरगाह को पाकिस्तान के साथ लाना, जिसके लिए उन्होंने ओमान के सुल्तान के साथ समझौता किया था और तीन मिलियन डॉलर देकर ग्वादर को अपने कब्जे में ले लिया था. नून का दूसरा बड़ा काम था कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए भारत के साथ समझौते की दिशा में कदम बढ़ाना.

नून के इस कदम से राष्ट्रपति इस्कंदर अली मिर्जा को खतरा महसूस होने लगा. तिस पर तुर्रा ये कि 1958 में जब इस्कंदर अली मिर्जा का कार्यकाल खत्म हो रहा था तो चार पार्टियों की गठबंधन की सरकार चला रहे फिरोज खान नून ने इस्कंदर अली मिर्जा को फिर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने से मना कर दिया. उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के साथ ही उन्हें सहयोग दे रही अवामी लीग, नेशनल अवामी पार्टी और कृषक श्रमिक पार्टी ने खुद का राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया. इससे इस्कंदर अली मिर्जा नाराज हो गए. और फिर उन्होंने 7-8 अक्टूबर, 1958 की रात अपने ही बनाए प्रधानमंत्री को पाकिस्तानी सेना की मदद से सत्ता से बेदखल कर दिया और पूरे देश में मार्शल लॉ लगा दिया गया. पाकिस्तान का संविधान भंग कर दिया गया. असेंबली भंग कर दी गई. प्रांतों की सरकारें भंग कर दी गईं. पाकिस्तानी सेना के मुखिया जनरल अयूब खान को चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर बना दिया गया और उन्हें ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर नामित किया गया.

8 अक्टूबर 1958 से ही पूरा पाकिस्तान सेना के अधीन आ गया. अपनी आजादी के महज 11 साल के अंदर ही पाकिस्तान में लोकतंत्र की बजाय तानाशाही लागू हो गई और सब कुछ सेना के हवाले हो गया. लेकिन इसका जो गुनहगार था, उसे अभी और भुगतना था. पाकिस्तान की इस हालत के लिए जिम्मेदार इस्कंदर अली मिर्जा ही थे, जिन्होंने पूरी सत्ता जनरल अयूब खान को सौंप दी थी. और 20 दिन के अंदर ही अयूब खान ने इस्कंदर अली मिर्जा को भी पद से बर्खास्त कर उन्हें लंदन निर्वासित कर दिया. अब अयूब खान ही सब कुछ थे. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सैन्य प्रमुख...

तख्तापलट सीरीज के अगले एपिसोड में पढ़िए कहानी नूरुल अमीन की, जो 13 साल के मार्शल लॉ के बाद हुए चुनाव में पाकिस्तान के आठवें वजीर-ए-आजम बने लेकिन 13 दिनों के अंदर ही उन्हें भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. 

तख्तापलट सीरीज 1: जब लाखों की भीड़ में हुई थी पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री की हत्या, पढ़ लीजिए पूरी कहानी

तख्तापलट सीरीज 2: पाकिस्तान के गवर्नर जनरल ने पीएम ख्वाजा नजीमुद्दीन को पद से बर्खास्त क्यों किया था?

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Brazil Bus Accident: दक्षिणी ब्राजील में भीषण सड़क हादसा, बस-ट्रक की टक्कर में 11 लोगों की मौत, 7 घायल
दक्षिणी ब्राजील में भीषण सड़क हादसा, बस-ट्रक की टक्कर में 11 लोगों की मौत
एमपी: जबलपुर में अभद्र टिप्पणी पर बवाल, आपस में भिड़े दो पक्ष, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
एमपी: जबलपुर में अभद्र टिप्पणी पर बवाल, आपस में भिड़े दो पक्ष, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
TRP Report: 'अनुपमा' से फिर छीना नंबर 1 का ताज, 'ये रिश्ता' की टॉप 5 में हुई एंट्री, जानें बाकी टॉप 10 शोज का हाल
अनुपमा' से फिर छीना नंबर 1 का ताज, 'ये रिश्ता' की टॉप 5 में हुई एंट्री, जानें टॉप 10 शोज का हाल
रेहान-अवीवा की सगाई के बाद पहली फोटो आई सामने, पिता रॉबर्ट वाड्रा बोले- बेटे को जीवनसंगिनी मिली
रेहान-अवीवा की सगाई के बाद पहली फोटो आई सामने, पिता रॉबर्ट वाड्रा बोले- बेटे को जीवनसंगिनी मिली

वीडियोज

Jabalpur में उग्र भीड़ पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, घटना के बाद इलाके पर तनाव का आसर
Prayagraj Magh Mela में आज करीब 25 से 30 लाख श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी ।Magh Mela
Jabalpur में मचा बवाल, दो गुटों के बीच शुरू विवाद को शांत करने के लिए पुलिस ने किया लाठीचार्ज
Prayagraj के सबसे बड़े आध्यात्मिक मेले की आज से शुरूआत,संगम पहुंचे लाखों श्रद्धालु ।Magh Mela
Indore में खराब पानी से हुई मौतों पर ABP News के हाथ लगी अहम जानकारी, खुसाला देख उड़ जाएगा होश

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.72 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.62 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Brazil Bus Accident: दक्षिणी ब्राजील में भीषण सड़क हादसा, बस-ट्रक की टक्कर में 11 लोगों की मौत, 7 घायल
दक्षिणी ब्राजील में भीषण सड़क हादसा, बस-ट्रक की टक्कर में 11 लोगों की मौत
एमपी: जबलपुर में अभद्र टिप्पणी पर बवाल, आपस में भिड़े दो पक्ष, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
एमपी: जबलपुर में अभद्र टिप्पणी पर बवाल, आपस में भिड़े दो पक्ष, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
TRP Report: 'अनुपमा' से फिर छीना नंबर 1 का ताज, 'ये रिश्ता' की टॉप 5 में हुई एंट्री, जानें बाकी टॉप 10 शोज का हाल
अनुपमा' से फिर छीना नंबर 1 का ताज, 'ये रिश्ता' की टॉप 5 में हुई एंट्री, जानें टॉप 10 शोज का हाल
रेहान-अवीवा की सगाई के बाद पहली फोटो आई सामने, पिता रॉबर्ट वाड्रा बोले- बेटे को जीवनसंगिनी मिली
रेहान-अवीवा की सगाई के बाद पहली फोटो आई सामने, पिता रॉबर्ट वाड्रा बोले- बेटे को जीवनसंगिनी मिली
अमेरिका में होने वाला था बड़ा अटैक! FBI ने आतंकी साजिश की नाकाम, जाल बिछाकर ISIS से जुड़े शख्स को दबोचा
US में होने वाला था बड़ा अटैक! FBI ने आतंकी साजिश की नाकाम, ISIS से जुड़े आरोपी को दबोचा
मार्केट कैप से एक झटके में साफ 50000 करोड़, सरकार के एक फैसले से भरभराकर गिरा ITC का शेयर
मार्केट कैप से एक झटके में साफ 50000 करोड़, सरकार के एक फैसले से भरभराकर गिरा ITC का शेयर
PGIMER में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, मेडिकल और नॉन-मेडिकल पदों पर बंपर भर्ती, जानें डिटेल्स
PGIMER में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, मेडिकल और नॉन-मेडिकल पदों पर बंपर भर्ती, जानें डिटेल्स
अकबर के दरबार का प्रिय रत्न, दर्दनाक था जिसका अंत; अंतिम संस्कार के लिए शव तक नहीं हुआ नसीब
अकबर के दरबार का प्रिय रत्न, दर्दनाक था जिसका अंत; अंतिम संस्कार के लिए शव तक नहीं हुआ नसीब
Embed widget