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परमाणु हमले के खतरे पर लगा ब्रेक, समिट से अमेरिका-उत्तर कोरिया दोनों हुए कामयाब

सिंगापुर शिखरवार्ता के लिए रविवार को जब उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक और अमेरिका के राष्ट्रपति सिंगापुर पहुंचे थे तो दोनों मुल्कों के बीच इस पहली बार शिखर वार्ता को लेकर बहुत सारे सवाल और अनेक आशंकाएं थी.

नई दिल्लीः ऐतिहासिक, अनपेक्षित और अभूतपूर्व!! अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच पहली बार हुई शिखर वार्ता इतिहास की नई तारीख लिख गई. पहली बार बातचीत की मेज़ पर मिले डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग उन की मुलाकात ने दुनिया पर मंडराते परमाणु हमले के खतरे पर ब्रेक लगा दिया. हालांकि इस बतचीत से निकले करारनामे पर अमल से तय होगा कि इतिहास में इस बैठक की तारीख कौन सी स्याही से लिखी जाएगी.  ट्रंप पर भारी पड़ा तानाशाहः दक्षिण कोरिया के साथ युद्भाभ्यास बंद करेगा अमेरिका

सिंगापुर शिखरवार्ता के लिए रविवार को जब उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक और अमेरिका के राष्ट्रपति सिंगापुर पहुंचे थे तो दोनों मुल्कों के बीच इस पहली बार शिखर वार्ता को लेकर बहुत सारे सवाल और अनेक आशंकाएं थी. सिंगापुर के सेंटोसा  द्वीप जिसका नाम संस्कृत के शब्द संतोष पर रखा गया, पर मंगलवार सुबह जब डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग की गाड़ियों का काफिला पहुंचा तो हवा में यह सवाल तैर रहे थे कि काफी तुनकमिजाज़ रखने वाले दोनों नेता जब मिलेंगे तो आखिर बात बन पाएगी? लेकिन मंगलवार को तमाम सवाल और  शंकाएं, समझौते और आश्वासन में बदल गयी जब आश्चर्यजनक तौर पर राष्ट्रपति ट्रम्प और किम जोंग उन के बीच ने केवल रिश्तों की केमिस्ट्री नज़र आई बल्कि अनपेक्षित तरीके से दोनों देशों ने रजामंदी के करारनामे पर दस्तखत भी कर दिए. महज़ आठ महीने में उत्तर कोरिया को तबाह करने की धमकी देने वाले र्राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चेयरमैन किम जोंग उन को एक बेहतरीन वार्ताकार और स्मार्ट व्यक्ति करार देते दिखे. जानें- दुनिया का सुपरपावर अमेरिका क्यों उत्तर कोरिया से डरता है?

सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप पर स्थित कैपिला रिसोर्ट में दोनों नेता कई बार साथ हाथ मिलाते, चहलकदमी करते और मुस्कुराते हुए कैमरों में कैद हुए. यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने किम जोंग उन को अपनी किडिलैक लिमोजीन कार भी भीतर से दिखाई.

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से अब तक दूर रहने वाले उत्तर कोरिया के शासक ने भी इस बड़ी मुलकात की टेबल पर किसी साधे खिलाड़ी की तरह पत्ते चले. उन्होंने वार्ता शुरू होने के पहले ही कहा कि हम कई अड़चनों को पार कर यहां मिलने पहुंचे हैं. हम आगे साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. किम के लिए ट्रंप ने पहनी लाल टाई, 12 सेकेंड तक मिलाया हाथ, 50 मिनट चली बातचीत, 10 खास बातें

आमने-सामने की सीधी मुलाकात, प्रतिनिधिमंडल स्तर वार्ता और फिर भोज की मेज पर बातचीत. करीब पांच घंटे तक चली बातचीत के बाद पूरी दुनिया को चौंकाते हुए डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग उन ने करारनामे पर दस्तखत कर शिखर वार्ता पर कामयाबी की मुहर लगा दी. बाद में मीडिया से रूबरू हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के नेता ने अपनी वार्ता को सफल और संतोषजनक बताया. ट्रम्प ने कहा कि उत्तर कोरिया के पास काफी परमाणु हथियार हैं और दक्षिण-कोरिया, जापान समेत कई मुल्कों में लाखों जानों पर इन हथियारों का खतरा है. ऐसे में ऐसे किसी खतरे को कम करने की हमारी कोशिश थी और इसी लिए मैं सिंगापुर आया हूँ. हम दोनों इसके बाद भी मिलेंगे. वही हमारे प्रतिनिधि जल्द ही फिर से मुलाकात करेंगे. ट्रंप और किम ने सिंगापुर समझौते पर किए साइन, उत्तर कोरियाई नेता ने कहा- दुनिया अब बदलाव देखेगी

इस मुलाकात से दोनों पक्षों ने आखिर क्या हासिल किया -

अमेरिका ने क्या पाया? उत्तर कोरिया के अपने परमाणु हथियार खत्म करने का वादा. आगे कोई परमाणु परीक्षण या खतरनाक मिसाइल टेस्ट न करने का वादा. उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल इंजन फेसिलिटी खत्म करेगा. उत्तर कोरिया अपनी मुख्य परमाणु परीक्षण साइट को खत्म करेगा. उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को परमाणु उत्तर कोरिया करार के तहत कैद में मौजूद अमेरिकी नागरिकों की रिहाई. कोरिया युध्द के दौरान मारे गए अमेरिकी सैनिकों के अवशेष ले जाने की इजाजत.

उत्तर कोरिया को क्या हासिल हुआ?

उत्तर कोरिया के पड़ोसी दक्षिण कोरिया के साथ आक्रामक सैन्य अभ्यास बन्द करेगा अमेरिका. उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार खत्म होने और संबंध सामान्य होने पर अमेरिका के दक्षिण कोरिया से अपने 32 हज़ार सैनिकों हटाने का आश्वासन.

परमाणु फसेलिटीज़ के खत्म होने की पुष्टि के साथ अमेरिका उत्तर कोरिया पर लगी पाबंदियां हटाएगा.

दोनों देशों के बीच वार्ता का सिलसिला शुरू होगा.

उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध का सिलसिला शुरू होगा.

अन्तरराष्ट्रीय बिरादरी में सम्मान के साथ किम जोंग उन को जगह.

अमरीकी राष्ट्रपति किम जोंग उन को व्हाइट हाउस आमंत्रित करेंगे.

बातचीत की मेज़ पर दोनों पक्षों को हासिल हुई आश्वासनों की अपनी अहमियत है. मसलन उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर लगाम लग कर अमेरिका ने जहां एक बड़े खतरे को टाला है वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने लिए भी बढ़ी कामयाबी बटोरी है. इससे पहले कोई अमेरिकी राष्ट्रपति यह हासिल नहीं कर पाया. वहीं उत्तर कोरिया को अपने खिलाफ पाबंदियों का फंदा ढीला करने का रास्ता मिल गया है.

कितना भरोसेमंद है किम का वादा?

हालांकि ट्रम्प और किमजोंग उन की मुस्कुराती और साथ चहलकदमी करती तस्वीरों के बीच अब भी रह-रह के सवाल उठता है कि क्या सचमुच में अपने सारे परमाणु हथियारों को खत्म कर देंगे किम जोंग उन ? ऐसा करने के बदले में ऐसी कौन सी बड़ी चीज है जो बातचीत की टेबल से उन्हें हासिल हुई है? भीतरखाने बनी समझ कितनी स्थायी है? अगर  उत्तर कोरिया अमेरिका के लिए अपने दरवाजे खोलता है तो उसका ताकतवर पड़ोसी चीन कितना सहज होगा?

हालांकि उत्तर कोरिया के वादों की विश्वसनीयता के बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि किम खुद ऐसा चाहते है क्योंकि इसमें उनके देश की भलाई है. ट्रम्प के मुताबिक किम उत्तर कोरिया के विकास के लिए निवेश का दरवाज़े खोलने पर भी राजी हैं.

पर्दे के पीछे चीन के हाथ भी थे  बहरहाल, डोनाल्ड ट्रम्प ने भी माना कि इस बैठक को कामयाब बनाने में पर्दे के पीछे चीन की भी अहम भूमिका थी. ट्रम्प ने माना कि चीन अपने करीब किसी परमाणु हथियार वाले ऐसे मुल्क की मौजूदगी नहीं चाहता था और इस बात ने भी उत्तर कोरिया को वार्ता की मेज पर लाने में मदद की. वार्ता के बाद में दी प्रतिक्रिया में चीनी विदेशमन्त्री वांग यी ने कहा कि कि चीन अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हुई वार्ता से उम्मीद है कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने और शांति स्थापित करने की स्थायी व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी. दरअसल चीन इस वार्ता में इसलिए भी निवेश कर रहा है क्योंकि उसे भी उत्तर कोरिया पर लगी पाबंदियों के कारण कारोबार में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. यदि पाबंदियां हटती हैं तो इसका सबसे ज़्यादा फायदा चीन को होगा. परमाणु हथियार खत्म करने के बदले में चीन उत्तर कोरिया को उसी तरह की सुरक्षा गारंटी मुहैय्या कर सकता है जैसी दक्षिण कोरिया को अमेरिका ने दे रखी है.

भारत ने भी किया है स्वागत

अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हुई बैठक का भारत ने भी स्वागत किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत हमेशा इस बात का पक्षधर है कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से हर मुद्दे को सुलझाया जाए.

 

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