क्या NATO की तरह एक साथ आ पाएंगे मुस्लिम देश या सिर्फ हवाबाजी? भारत से पिटे पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने फिर रोया रोना
Khawaja Asif: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मुस्लिम देशों को NATO की तर्ज पर एक मिलिट्री गठबंधन बनाना चाहिए. इसे लेकर कतर में 15 सितंबर को इस्लामिक देशों की बैठक हुई थी.

इजरायल ने पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में हमास वार्ताकारों की बिल्डिंग पर एयर स्ट्राइक की थी. इस हमले के बाद NATO की तरह अरब सैन्य गठबंधन बनाने पर विचार किया जाने लगा है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हमें भी नाटो की तर्ज पर एक मिलिट्री गठबंधन बनाना चाहिए. हाल ही में अरब देशों की बैठक में भी पाकिस्तान की ओर से इस तरह की पहल की गई थी.
'खुद की रक्षा के लिए होगा सैन्य गठबंधन'
पाकिस्तान के न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह सैन्य गठबंधन किसी के खिलाफ नहीं होगा, बल्कि अपनी रक्षा के लिए होगा. इजरायल के हमले के बाद कतर ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को अरब और इस्लामी देशों के एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें पाकिस्तान, तुर्किए, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन और मोरक्को सहित कई देशों के नेताओं ने भाग लिया. इस बैठक में इस्लामिक देशों के लिए नाटो की तरह सैन्य गठबंधन बनाने का सभी देशों ने स्वागत किया.
कतर में नए सैन्य गठबंधन बनाने को लेकर हुई बैठक
इस बैठक में पाकिस्तान को ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार शामिल हुए थे. इशाक डार ने कहा कि इजरायल को इस्लामिक देशों पर हमला करने और लोगों की हत्या करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए. तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि इजरायल को आर्थिक रूप से भी दबाया जाना चाहिए. मिस्र, ईरान और इराक ने भी नाटो की तर्ज पर सैन्य गठबंधन बनाने पर जोर दिया ताकि इजरायल समेत बाकी दुश्मनों से निपट सके.
पाकिस्तान ने अरब-इस्लामी टास्क फोर्स पर जोर दिया
इराक के पीएम मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अल जजीरा के दिए इंटरव्यू में कहा कि इस्लामी दुनिया के पास अनेक हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल इज़रायल को रोकने के लिए किया जा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि इज़रायल की आक्रामकता कतर तक ही सीमित नहीं रहेगी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार ने 'अरब-इस्लामी टास्क फोर्स' के गठन पर भी जोर दिया.
नए सैन्य गठबंधन बनाने के लिए पहले भी साथ आए ये देश
अरब और इस्लामी देशों के एक सैन्य गठबंधन में एकजुट होने का विचार नया नहीं है. 2015 में, मिस्र ने यमन और लीबिया की समस्याओं से निपटने के लिए एक संयुक्त अरब सैन्य बल बनाने का सुझाव दिया था. कई देशों ने कहा था कि वे इसका समर्थन करेंगे, लेकिन इस योजना का नेतृत्व कौन करेगा और इसके लिए पैसे कैसे जुटाए जाएंगे, इस पर बहस के कारण यह प्रस्ताव रुक गया.
अरब-इस्लामिक देशों का सैन्य गठबंधन जिसमें पाकिस्तान मौजूद हो वह भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है. पाकिस्तान लंबे समय से बहुपक्षीय गठबंधनों और मंचों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता रहा है. इससे इस्लामाबाद को प्रोत्साहन मिलेगा और उसे भारत विरोधी गतिविधियों के लिए एक और मंच मिल जाएगा.
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