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स्टूडेंट पॉलिटिक्स बैन, विरोधियों को जेल और भारत से करीबी.... नेपाल को बालेन ने किया रीसेट, 100 प्वाइंट एक्शन प्लान पर फोकस

नेपाल के प्रधानमंत्री बनते ही बालेन शाह ने 48 घंटों के अंदर ही सरकारी संस्थानों को नया रूप देने के लिए 100 सूत्री कार्य योजना पेश की. बालेन नई दिल्ली के साथ करीबी से काम करने के लिए उत्सुक हैं.

नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं. शपथ ग्रहण के 48 घंटों के अंदर ही उन्होंने सरकारी संस्थानों को नया रूप देने के लिए 100 सूत्री कार्य योजना पेश की. सबसे विवादास्पद कदम है छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना. मात्र 35 वर्ष की आयु में शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने. 

स्टूडेंट पॉलिटिक्स बैन
जेनरेशन जेड (Gen Z) जिसने सितंबर 2025 की क्रांति के जरिए उन्हें सत्ता में पहुंचाया, अब अपने पंख कटने से बैचेन दिख रहा है. बालेन शाह सरकार के पहले फैसलों में से एक था छात्रों के राजनीतिक संगठनों को कैंपस से बाहर करने का आदेश देना. इनकी जगह 90 दिनों के भीतर 'छात्र परिषद' या 'छात्रों की आवाज' जैसे गैर-पक्षपातपूर्ण संगठन स्थापित किए जाएंगे. यह कदम बालेन शाह की सत्ता-विरोधी विद्रोही छवि के बिल्कुल विपरीत है क्योंकि अपने गानों से युवाओं में आक्रोश पैदा करने के बाद अब उनका तर्क है कि कैंपस को राजनीति का अड्डा नहीं होना चाहिए.

इसका कारण है माओवादी समूहों से जुड़े छात्र संगठनों पर लंबे समय से हिंसा, तोड़फोड़ और जबरन वसूली के आरोप लगते रहे हैं. इस कारण परीक्षाएं स्थगित की जाती हैं और शिक्षकों पर भी हमले हो चुके हैं. शाह ने जोर देकर कहा कि इसका एकमात्र समाधान शिक्षा को राजनीति के चंगुल से मुक्त करना है.

नौकरशाही का गैर-राजनीतिकरण
नए युवा मंत्रिमंडल ने सिविल सेवकों और शिक्षकों को किसी भी पार्टी से संबद्ध होने से भी रोक दिया है. सरकारी निकायों के भीतर पक्षपातपूर्ण ट्रेड यूनियनों को समाप्त कर दिया जाएगा. बालेन शाह के समर्थकों का दावा है कि इससे शासन व्यवस्था सुव्यवस्थित हो सकती है और हस्तक्षेप कम हो सकता है. आलोचकों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि इससे श्रमिकों के संरक्षण को छीनने और संस्थानों के भीतर असहमति को दबाने का खतरा है.

शाह के सुधार शिक्षा व्यवस्था में गहराई तक फैले हुए हैं. सरकार स्नातक प्रवेश के लिए नागरिकता की अनिवार्यता को समाप्त करेगी और परीक्षा परिणामों के प्रकाशन के लिए सख्त शैक्षणिक कैलेंडर लागू करेगी. अगले शैक्षणिक वर्ष से कक्षा 5 तक की आंतरिक परीक्षाएं समाप्त कर दी जाएंगी और उनकी जगह वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाएगी. इसके अलावा ऑक्सफोर्ड, पेंटागन, सेंट जोसेफ और सेंट जेवियर जैसे विदेशी नामों का उपयोग करने वाले संस्थानों को इस वर्ष से अपने मूल नाम अपनाने के लिए कहा गया है.

विरोधियों की गिरफ्तारी
सुधारों के लागू होने के साथ ही नई सरकार ने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई की. Gen-Z विरोध प्रदर्शनों की जांच के निष्कर्षों को लागू करने के एक दिन बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया. एक अन्य पूर्व मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया. दोनों पर सितंबर के विद्रोह को दबाने से जुड़े आरोप हैं, जिसमें कम से कम 77 लोग मारे गए थे. 

एक अलग मामले में विधायक रेखा शर्मा को रविवार रात को 8 साल से अधिक समय तक एक नाबालिग घरेलू कामगार के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. यह मामला पहले दर्ज किया गया था, लेकिन पूर्व की ओली सरकार के दौरान इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. तत्कालीन काठमांडू मेयर बालेन शाह ने पीड़िता को न्याय दिलाने का वादा किया था.

जनरेशन जेड के शहीद प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि
बालेन शाह ने अपने एक प्रमुख चुनावी वादे को तुरंत पूरा किया. Gen-Z विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को बालेन सरकार रोजगार देगी. यह निर्णय पहली कैबिनेट बैठक में पारित किया गया और इसे लागू किया जा रहा है. नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने प्रत्येक पीड़ित के परिवार के एक योग्य सदस्य को भर्ती करने के लिए नोटिस जारी किए हैं और योग्यता के आधार पर उनके गृह जिलों में पोस्टिंग की जाएगी.

भारत के साथ संबंध 
भारत के प्रति कुछ हद तक रूढ़िवादी रुख रखने वाले बालेन शाह ने कहा कि वे नई दिल्ली के साथ करीबी से काम करने के लिए उत्सुक हैं. अपने नए नेपाली समकक्ष को भेजे गए बधाई संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नेपाल संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कही थी और बालेन शाह ने उनसे सहमति जताई है. यह पहल गहरे आपसी निर्भरता और समय-समय पर पैदा होने वाले तनावों से भरे संबंधों में नए सिरे से शुरुआत का संकेत देती है. 

काठमांडू के महापौर के रूप में बालेन शाह अक्सर खुलकर राष्ट्रवाद का प्रदर्शन करते थे और हिमालयी राष्ट्र के आस-पास के भारत और अन्य देशों के वर्चस्व को खारिज करते थे. ग्रेटर नेपाल को लेकर उनके बयानों ने नई दिल्ली में चिंता पैदा कर दी थी.

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की नीति 'पड़ोसी पहले' है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बालेन शाह को भेजे संदेश में भारत आने का निमंत्रण नहीं दिया, जिससे संकेत मिलता है कि नई दिल्ली वेंट एंड वॉच पॉलिसी अपना रही है. 

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