Telangana: हेट स्पीच बिल पर बढ़ती सियासत के बीच सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया विधेयक, BJP ने बताया राजनीतिक हथियार
तेलंगाना में हेट स्पीच एंड हेट क्राइम प्रिवेंशन बिल 2026 को लेकर राजनीतिक घमासान मचा है. बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि बीजेपी इस कानून का विरोध करेगी.

तेलंगाना में प्रस्तावित हेट स्पीच एंड हेट क्राइम्स (प्रिवेंशन) बिल, 2026 को कई व्यापक प्रावधानों और संभावित दुरुपयोग को लेकर उठी चिंताओं और राजनीतिक बवाल के बाद इसे विस्तृत जांच के लिए एक चयन समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेज दिया गया है. इस बिल में हेट क्राइम्स के लिए 1 से 7 साल की जेल और 50 हजार तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, जबकि बार-बार अपराध करने वालों को 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने सोमवार को इस बिल की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक एजेंडा करार दिया. मीडिया से बातचीत में राव ने कहा कि यह कानून विशेष रूप से बीजेपी और उसके नेताओं को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से घबराई हुई है और उसी के चलते इस तरह के कानून लाकर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है. राव ने कहा, “यह बिल सिर्फ बीजेपी को टारगेट करने के लिए बनाया गया है. कर्नाटक में भी इसी तरह का कदम उठाया गया था, जहां बीजेपी कार्यकर्ताओं को दबाने और परेशान करने का काम किया गया. अब तेलंगाना में भी वही स्क्रिप्ट दोहराई जा रही है.”
कालेश्वरम परियोजना की जांच को लेकर उठाए सवाल
उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी कि बीजेपी इस कानून का विरोध करेगी और जरूरत पड़ने पर इसे अदालत में चुनौती भी देगी. राव के मुताबिक यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ दुरुपयोग का रास्ता खोल सकता है. इस मुद्दे के साथ ही राव ने कालेश्वरम परियोजना की जांच को लेकर भी राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले को पूरी तरह से सीबीआई को नहीं सौंपा है, जिससे उसकी मंशा पर संदेह पैदा होता है. राव ने आरोप लगाया, “मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केसीआर आपस में मिले हुए हैं. इसी कारण कालेश्वरम भ्रष्टाचार मामले को पूरी तरह सीबीआई को नहीं दिया जा रहा, ताकि केसीआर को बचाया जा सके.”
बीजेपी ने बताया राजनीतिक हथियार
उन्होंने कहा कि अगर सरकार पारदर्शिता चाहती है तो उसे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और किसी भी तरह की राजनीतिक मिलीभगत से बचना चाहिए. बीजेपी के इन आरोपों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. जहां एक ओर सरकार इस बिल को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार करार दे रहा है.
अब नजर इस बात पर है कि यह विधेयक आगे किस दिशा में जाता है और क्या यह राजनीतिक विवाद कानूनी लड़ाई में तब्दील होगा. फिलहाल, तेलंगाना की सियासत में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है.
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Source: IOCL



























