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Exclusive: ईरान में अब कैसे हैं हालात और क्यों भड़की थी हिंसा? ग्राउंड से भारतीय एक्सपर्ट ने बताया

Iran Protests: ईरान में हफ्तों प्रदर्शन के बाद शांति है. जिंदगी सामान्य हो चली है. हालांकि प्रवासी लोगों में डर जारी है और वो ईरान छोड़कर वतन वापसी कर रहे हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ हफ्तों चले प्रदर्शनों के बाद अब सड़कों पर शांति है. हालांकि स्थानीय प्रदर्शनकारियों में बल प्रयोग का डर अब भी बना है. प्रवासी देश छोड़ रहे हैं. इस बीच अल मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पश्चिम एशिया एक्सपर्ट ज़मीर अब्बास जाफ़री ने एबीपी लाइव को बताया कि यहां के हालात के बारे में दुनिया को जैसा दिखाया जा रहा है, वैसा नहीं है. 

उन्होंने सामान्य तौर पर सड़कों पर चलती गाड़ियां दिखाते हुए कहा कि ईरान के अंदर प्रोटेस्ट खत्म हो चुका है. 12 जनवरी को यहां की व्यवस्था के समर्थन में और आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, उसके बाद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन खत्म हो गया. मैं आपको पूरा विवाद बताता हूं कि ईरान में हुआ क्या था.

खामेनेई के समर्थन में रैली क्यों?

ईरान के कुम में रह रहे भारतीय ज़मीर अब्बास जाफ़री ने कहा कि ईरान के अंदर सरकार के समर्थन में एक करोड़ से ज्यादा लोग आए थे, सिर्फ तेहरान में 30 लाख से ज्यादा लोग आए थे. इसके 3 मकसद थे; पहला गवर्नमेंट को इकोनॉमी के प्रॉब्लम के लिए कहना था कि हमें प्रॉब्लम है, उसे सॉल्व करना है. दूसरा हम टेररिज़म के मुखालिफ (विरोधी) हैं, तीसरा अमेरिका और इजरायल को हम जानते हैं कि ये दुश्मन है और इनकी साजिशों से हम आगाह हैं.

उन्होंने आगे कहा, ''ईरान में सरकार के खिलाफ दिसंबर के आखिरी हफ्ते में प्रोटेस्ट शुरू हुआ. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात होती है. उसी दौरान ईरान की करेंसी को 30-40 फीसदी गिरा दिया गया. अमेरिका ने ईरान में प्रेशर क्रिएट किया और यहां महंगाई 30-40 फीसदी बढ़ गई ईरान के अंदर इकनॉमिक समस्या बढ़ गई. चीजों की कीमत बढ़ने की वजह से लोगों में नाराजगी होती है और इसी का फायदा देख इजरायल ईरान के अंदर घुसना चाहता था.''

सरकार विरोधी प्रदर्शन से क्यों दूर हुए लोग?

ईरान का पक्ष रख रहे ज़मीर अब्बास जाफ़री कहते हैं, ''जब जायज प्रदर्शन होते हैं तब उसी में नकाबपोश लोग दाखिल होते हैं और प्रोटेस्ट के अंदर हिंसा करना शुरू कर देते हैं. रिजल्ट ये होता है कि ईरान कि आवाम आहिस्ते आहिस्ते इस हिंसा से दूर हो जाते हैं. जनवरी के पहले सप्ताह होते होते ये प्रोटेस्ट कम होना शुरू होता है, लेकिन ईरान के दिवंगत शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी लोगों से सड़कों पर आने की अपील करते हैं, जिनका ईरान से अब ताल्लुक नहीं है. वो और इजरायल ऐलान करता है कि 8 जनवरी को हम हमला करेंगे और टेररिस्ट हमले ईरान में होते हैं.''

जाफ़री ने दावा किया कि, ''तकरीबन 50 से ज्यादा मस्जिद को जला दी जाती है. इमामबारगाहों को जलाया जाता है. बैंकों पर हमला होता है. शॉपिंग सेंटर पर हमला होता है, बहुत बड़ी संख्या में हमले ईरान में होते हैं. इस हमले में 100 ज्यादा गवर्नमेंट ऑफिशियल मारे जाते हैं, 8 जनवरी को इंटरनेट बंद होता है. 9 जनवरी को तकरीबन 90 फीसदी हिंसा कम होती है.''

पिछले प्रदर्शनों को किया याद

उन्होंने पिछले प्रदर्शन को याद करते हुए कहा, ''पिछली बार जनवरी में जब जंग कि बात हुई थी तो ईरान ने इजरायल को मुंहतोड़ जवाब दिया था. इजरायल ने खुद सीजफायर करवाया था. अमेरिकन एयर बेस पर ईरान ने हमला किया था. जिससे अमेरिका और इजरायल ने सीजफायर करवाया था और वो दोबारा ये नुकसान नहीं उठान चाहते थे. इसीलिए उन्होंने ईरान में अब ऐसी स्थिति पैदा किया कि ईरान के लोग सड़कों पर आएं और प्रोटेस्ट के नाम पर हिंसा करवाएं  और फिर इजरायल हमला करे, लेकिन जब लोगों ने गवर्नमेंट के फ़ेवर में प्रोटेस्ट किया तो उनका पूरा प्लान बेकार हो गया. ईरान में हमला होगा तो अमेरिका और इजरायल के लिए बहुत खतरनाक होगा. उनको बहुत मुश्किलों का सामना करना होगा.''

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, ईरान में प्रदर्शन शुरू होने के बाद करीब 3,000 लोगों की मौत हुई. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार चेतावनी दे रहे थे कि अगर ईरानी शासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा. लेकिन माना जा रहा है कि कतर, ओमान, सऊदी अरब और मिस्र ने अमेरिका से ईरान पर हमला न करने की अपील की और चेतावनी दी कि इससे सुरक्षा और आर्थिक जोखिम पैदा हो सकते हैं. कूटनीतिक कदमों के बाद ईरान में फिलहाल शांति है.

जीवन प्रकाश, एबीपी न्यूज़ में नेशनल टीम लीड हैं. राजनीतिक खबरों में दिलचस्पी है और लगातार लिखते रहे हैं. नई और बड़ी खबरों की तलाश रहती है. ब्रेकिंग न्यूज़ पर खास फोकस रखते हैं. 8 सालों से अधिक समय से एबीपी में कार्यरत है. 2019 के लोकसभा चुनाव में कवरेज के लिए एबीपी न्यूज ने श्रेष्ठ सम्मान से नवाजा. पत्रकारिता जगत में करीब 11 सालों का अनुभव है. एबीपी न्यूज़ से पहले न्यूज़ नेशन में बतौर सब एडिटर कार्यरत रहे. 2015 में जिया न्यूज से इंटर्नशिप शुरू करने के बाद एनएनआईएस न्यूज एजेंसी, न्यूजरूम पोस्ट वेबसाइट में काम किया. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन में 2015 में मास्टर की डिग्री ली. पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं. फैक्ट चेक और सोशल मीडिया को लेकर कई वर्कशॉप किए हैं.

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