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Israel-Palestine Conflict: कैसे हिटलर के कत्लेआम ने पैदा किया इजराइल-फलस्तीन विवाद? पढ़िए यहूदी मुल्क की पूरी कहानी

Israel-Palestine War: इजराइल और फलस्तीन के बीच विवाद 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. ये विवाद तब से चल रहा है, जब इजराइल नाम का कोई देश नहीं हुआ करता था.

Israel-Palestine Conflict: इजराइल पर गाजा पट्टी की तरफ से हमास ने अचानक हमला किया. ये हमला कितना बड़ा था, इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि हमास ने कुल मिलाकर 5000 मिसाइलों को इजराइल पर दाग दिया. जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइली सेना ने भी गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. इस तरह लगभग दो साल तक शांति रहने के बाद एक बार फिर से मिडिल ईस्ट में खूनी संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है. 

2021 में भी फलस्तीन समर्थक हमास और इजरायल के बीच जंग हुई थी, जो 10 दिनों तक चली थी. वर्तमान में हुए हमलों की वजह से इजराइल में मरने वालों की तादाद 300 के पार जा चुकी है, जबकि 1590 लोग घायल हुए हैं. गाजा पट्टी में 232 लोग मारे गए हैं, जबकि 1800 के करीब लोग घायल हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर किस तरह इजराइल-फलस्तीन विवाद की शुरुआत हुई और कैसे इसमें जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर का बड़ा हाथ रहा है.

कैसे शुरू हुआ इजराइल-फलस्तीन विवाद? 

यूरोप में बीसवीं सदी की शुरुआत में यूरोप में यहूदियों की बड़ी तादाद थी. लेकिन उनके साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा था, जिसकी वजह से उन्होंने यूरोप से निकलर फलस्तीन पहुंचना शुरू कर दिया. फलस्तीन पर एक वक्त ओटोमन साम्राज्य के तहत आता था. यहां पर फलस्तीनी अरब रहा करते थे. इसके अलावा फलस्तीन धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण जगह थी, क्योंकि यहां का यरुशलम शहर मुस्लिमों, यहूदियों और ईसाई धर्म तीनों के लिए पवित्र था. 

यूरोप से आने वाले यहूदी अपने लिए एक नया मुल्क चाहते थे. उनका दावा था कि फलस्तीन उनकी जमीन है. ऐसा वह धार्मिक ग्रंथों का हवाला देकर कहते थे. यहूदियों की बढ़ती आबादी की वजह से अरब लोगों के साथ उनके संघर्ष की शुरुआत हुई. प्रथम विश्व युद्ध में ओटोमन साम्राज्य को हार मिली और फलस्तीन का इलाका ब्रिटेन के कब्जे में आ गया. युद्ध में जीतने के बाद फ्रांस और ब्रिटेन ने मिडिल ईस्ट का बंटवारा किया, इससे यहूदी और अरबों के बीच तनाव पैदा हुआ. 

हिटलर की भूमिका क्या थी? 

प्रथम विश्व युद्ध के बाद यहूदी बड़ी तादाद में यूरोप छोड़कर अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अमेरिका, फ्रांस और फलस्तीन की ओर जाने लगे. यहूदियों के पलायन में सबसे बड़ा इजाफा तब हुआ, जब एडोल्फ हिटलर 1933 में जर्मनी का तानाशाह बना. उसके शासनकाल में यहूदियों पर इतना ज्यादा अत्याचार बढ़ा कि उन्हें मजबूरन अपना मुल्क छोड़कर भागना पड़ा. ज्यादातर यहूदियों ने इजराइल आने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें ये धार्मिक मातृभूमि लगी. 

हिटलर के दौर में 60 लाख यहूदियों को मौत के घाट उतारा गया था. एक वक्त यहां पोलैंड, जर्मनी से लेकर फ्रांस तक में यहूदियों की अच्छी खासी आबादी थी. आज वहां से यहूदियों को भागना पड़ा. इसकी मुख्य वजह हिटलर ही था. 1922-26 में करीब 75 हजार यहूदी फलस्तीन पहुंचे, जबकि 1935 में यहां जाने वाले यहूदियों की संख्या 60 हजार थी. युद्ध खत्म होने के बाद यूरोप में जितने भी यहूदी बचे थे, उन्होंने अपने लिए नया देश बनाने के लिए फलस्तीन जाना शुरू किया. 

कैसे बढ़ता गया इजराइल-फलस्तीन विवाद? 

अरबों के बीच यहूदियों को लेकर पहले से ही नाराजगी थी. मगर जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहूदियों के लिए नए देश की मांग उठी, तो इसका सारा जिम्मा ब्रिटेन को मिल गया. 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फलस्तीन को यहूदियों और अरबों के लिए अलग-अलग देश बनाने के लिए मतदान करवाया. यूएन ने ये भी साफ किया था कि यरुशलम एक अंतरराष्ट्रीय शहर रहेगा. यहूदी तो इससे खुश थे, मगर अरबों के बीच इस फैसले को लेकर काफी रोष था. इसलिए ये प्रस्ताव कभी लागू नहीं हुआ. 

दूसरी ओर, ब्रिटेन 1948 में फलस्तीन को छोड़कर चला गया. इसके बाद यहूदी नेताओं ने 14 मई, 1948 को खुद ही इजराइल की स्थापना कर दी. जैसे ही इजराइल की तरफ से ऐसा किया गया, वैसे ही फलस्तीन की तरफ से मिस्र, जॉर्डन, सीरिया और इराक ने इस इलाके पर धावा बोल दिया. इसे ही पहले इजराइल-फलस्तीन संघर्ष के तौर पर जाना जाता है. इस जंग के बाद अरबों के लिए अलग जमीन तय की गई. मगर युद्ध की वजह से 7.5 लाख यहूदी बेघर हो गए. 

फलस्तीन के लिए लड़ने वाले मुल्कों को जब हार मिली, तो इसकी वजह से अरबों के हाथ फलस्तीन के लिए छोटी जमीन का हिस्सा हाथ लगा. अरबों को जो जमीन हाथ लगी, उसे वेस्ट बैंक और गाजा कहा गया. दोनों जगहों के बीच में इजराइल आता था. वहीं, यरुशलम शहर को पूर्व और पश्चिम में बांट दिया गया. पश्चिम पर इजराइल का कब्जा था, जबकि पूर्व में जॉर्डन के सुरक्षाबल तैनात थे. ये सब बिना किसी शांति समझौते के हो रहा था. 

साल 1967 में एक बार फिर फलस्तीन और इजराइल के बीच युद्ध हुआ. लेकिन इस बार इजराइल ने और भी ज्यादा आक्रामक प्रहार किया और फलस्तीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया. उसने वेस्ट बैंक और गाजा दोनों पर कब्जा जमाया. गाजा स्ट्रिप को तो उसने बाद में छोड़ दिया, मगर वेस्ट बैंक को अपने कंट्रोल में ही रखा. ऊपर से पूर्वी यरुशलम भी इजराइल के कंट्रोल में आ गया. फलस्तीन लोग अब वेस्ट बैंक और गाजा स्ट्रिप में ही रहते हैं. 

यह भी पढ़ें: इजराइल को 5000 रॉकेट से दहलाने वाला हमास क्या है, आखिर क्यों बोला हमला? पढ़िए चरमपंथी संगठन के बारे में A टू Z

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