'भारत ने जमीन और पानी के रास्ते से रोहिंग्या मुसलमानों को निकाला', UN मानवाधिकार के प्रमुख का दावा
वोल्कर तुर्क ने कहा कि अमेरिका ने अल सल्वाडोर, दक्षिण सूडान, एस्वातिनी और रवांडा के साथ ऐसे समझौते किए हैं कि तीसरे देशों के नागरिकों को उनके अपने देश के बजाय अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने रोहिंग्या मुसलमानों और विभिन्न देशों में शरण ले रहे लोगों की स्थिति पर चिंता जताई हैं. उन्होंने अमेरिका, पाकिस्तान, ईरान, यूरोपीय देशों और भारत में रह रहे शरणार्थियों को लेकर इन देशों से आग्रह किया है कि वह इस दिशा में प्रयास करें. उनका दावा है कि भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों को जमीन और पानी के रास्ते देश से निर्वासित किया है. सोमवार (8 सितंबर, 2025) को जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 60वें सत्र में अपने ग्लोबल अपडेट पर उन्होंने जानकारी प्रस्तुत करते हुए ये बातें कही हैं.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार वोल्कर तुर्क ने कहा कि कुछ देशों में प्रवासियों और शरणार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाली नीतियों और प्रथाओं को सामान्य बना दिया गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, 'मानवाधिकार, सभी मानवाधिकार समृद्ध समाजों की मजबूत नींव हैं, लेकिन आज इन अधिकारों को कमजोर करने वाले खतरनाक रुझान वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं.'
वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान और ईरान से जबरन बाहर निकाले जा रहे अफगानों को लेकर भी चिंता जताई और उन्होंने कहा कि भारत ने भी रोहिंग्या मुसलमानों के समूहों को देश से निकाल दिया है. उन्होंने जर्मनी, यूनान, हंगरी और अन्य यूरोपीय देशों की उन हालिया नीतियों पर भी चिंता जताई, जिनका मकसद शरण की मांग के अधिकार को सीमित करना है.
वोल्कर तुर्क ने यह भी बताया कि अमेरिका ने अल सल्वाडोर, दक्षिण सूडान, एस्वातिनी और रवांडा समेत कई देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जिनके तहत तीसरे देशों के नागरिकों को उनके अपने देश के बजाय अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की आशंका है.
मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स वॉच' के अनुसार, भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या रह रहे हैं, जिनमें से कम से कम 20,000 संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी में पंजीकृत हैं. उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में प्रयास करें, ताकि हर बच्चा, चाहे वह भविष्य में किसान बने, डॉक्टर बने या दुकानदार, यह समझे कि मानवाधिकार उसका जन्मसिद्ध अधिकार है.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















