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Gurcharan Singh Banwait: कनाडा की एक और साजिश बेनकाब! जिसे बता रहा था समाजसेवी, वह निकला खालिस्तान समर्थक

Gurcharan Singh Banwait: गुरचरण सिंह बनवैत को लेकर कनाडा की ओर से लगातार भारत पर निशाना साधा जा रहा है. उसे समाजसेवी बताया जा रहा है जबकि उसके रिकॉर्ड उसे एक खालिस्तान समर्थक बताते हैं.

Gurcharan Singh Banwait: कनाडा की मीडिया और वहां के सियासी गुट पिछले कुछ दिनों से लगातार गुरचरण सिंह बनवैत नाम के एक कनाडाई नागरिक का महिमामंडन कर रहे हैं. गुरचरण को समाजसेवी बताया जा रहा है और उसकी तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं. इस पर एबीपी न्यूज ने जब पड़ताल की और इस शख्स का रिकॉर्ड खंगाला तो सामने आया कि वह समाजसेवा की आड़ में एक खालिस्तान समर्थक है.

मामला कुछ ऐसा है कि 20 जनवरी को कनाडा के सरकारी समाचार चैनल (CBC) की खबर में बताया गया था कि भारत पहुंचे कनाडा के नागरिक गुरचरण सिंह बनवैत को 36 घंटे तक एयरपोर्ट पर हिरासत में रखा गया और उसके बाद वापस कनाडा भेज दिया गया. अपनी इस खबर में कनाडा के इस सरकारी चैनल ने यह भी दावा किया था कि गुरचरण सिंह बनवैत एक समाजसेवी है और उसे हिरासत में रखना भारत की कनाडाई सिखों को ब्लैकलिस्ट करने की नीति का हिस्सा है. इसके बाद लगातार वहां के सियासी गुटों ने भी भारत पर निशाना साधना शुरू कर दिया था.


Gurcharan Singh Banwait: कनाडा की एक और साजिश बेनकाब! जिसे बता रहा था समाजसेवी, वह निकला खालिस्तान समर्थक

अब एबीपी की पड़ताल में सामने आया है कि गुरचरण सिंह न केवल खालिस्तान समर्थक है बल्कि आतंकवादी भी है. उस पर एयर इंडिया के विमान को बम से उड़ाने की कोशिश करने तक के आरोप लग चुके हैं.

40 साल से सक्रिय है गुरचरण
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की 31 मई 1986 की एक रिपोर्ट में एसोसिएट प्रेस के हवाले से बताया गया था कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने एयर इंडिया के विमान को न्यूयॉर्क में बम से उड़ाने की कोशिश के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें तब 38 वर्ष के गुरचरण सिंह बनवैत का नाम भी शामिल था. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा था कि इन पांचों अभियुक्त का संबंध खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा से हो सकता है. 

गुरचरण सिंह बनवैत समेत इन 5 अभियुक्तों पर कनाडा की अदालत में केस भी चलाया गया लेकिन सबूतों के अभाव में इन्हें छोड़ना पड़ा. एयर इंडिया को बम से उड़ाने की कोशिश में नाम सामने आने के बाद कई वर्षों तक गुरचरण सिंह बनवैत अंडरग्राउंड रहा और भारत नहीं आया लेकिन साल 2010 के बाद जब उसे लगा कि भारत की जांच एजेंसियों की उसके ऊपर से नजर हट गई है तो वह NGO बना कर भारत आने-जाने लगा.

'बिहार बन गया खालिस्तान'
गुरचरण सिंह बनवैत के खालिस्तानी समर्थक होने के साथ साथ भारत में भी खालिस्तान का प्रचार करने के सबूत मिले हैं. 4 जनवरी 2017 को सिख गुरु गुरुगोबिंद सिंह के 350वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर गुरचरण सिंह बनवैत बिहार की राजधानी पटना आया था. यहां उसने फेसबुक लाइव किया था और उसका टाइटल रखा था 'बिहार बन गया खालिस्तान'. यह वीडियो आज भी गुरचरण सिंह बनवैत के फेसबुक अकाउंट पर मौजूद है.

साल 2016 में भी गुरचरण सिंह बनवैत ने अपने फेसबुक अकाउंट से खालिस्तान रेफरेंडम पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, 'खालिस्तान जिंदाबाद(किंदाबाद)'. हालांकि बाद में उसने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था.

गुरचरण सिंह बनवैत सोशल मीडिया पर खालिस्तान की विचारधारा शेयर करने के साथ साथ पाकिस्तान के समर्थन और भारत के विरोध में भी लिखता रहा है. 1 मार्च 2019 को गुरचरण सिंह बनवैत ने फेसबुक पर विंग कमांडर अभिनंदन का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था 'इंडिया वालों शर्म करो'.

गुरचरण सिंह बनवैत के पाकिस्तान जाने की भी कई तस्वीरें हैं. वहां उसका स्वागत भी होता रहा है. एक तस्वीर में पाकिस्तानी पुलिस के कुछ अधिकारी उसके साथ तस्वीरें खिंचवाते नजर आए हैं.

सवाल यह भी है
गुरचरण सिंह बनवैत पर जिस तरह से विमान को उड़ाने के आरोप हैं और वो सोशल मीडिया पर खालिस्तान के समर्थन में लिखता रहता है ऐसे में भारतीय एजंसियों के पास उसके खिलाफ ठोस सबूत हैं. हैरानी की बात यह है कि भारत विरोधी प्रयासों के बावजूद वह भारत में बिना किसी रोक-टोक के कैसे आता जाता रहा. गुरचरण सिंह बनवैत साल 2010 से 2024 तक कई बार भारत आया और साल 2020 में तो भारत के प्रसिद्ध कॉमेडी शो में भी गया. इतना ही नहीं गुरचरण सिंह बनवैत के पास भारत सरकार द्वारा जारी किया गया ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड भी है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतने सालों तक भारतीय खुफिया एजेंसीयों की नजर गुरचरण सिंह बनवैत पर कैसे नहीं पड़ी?

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शिवांक मिश्रा साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस वक्त एबीपी न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं. उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मामलों की गहन पड़ताल में है. कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों के शरण मॉड्यूल से लेकर भारत में दवा कंपनियों की अवैध वसूली जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. क्रिकेट और फुटबॉल देखना और खेलना पसंद है.
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