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वेनेजुएला में लाल हुआ पूरा आसमान, वायरल VIDEO देख सहमे लोग; आखिर क्या है इस रहस्यमयी नजारे का सच?

Venezuela caracas Sky Turned Red: वेनेजुएला और कई कैरेबियाई देशों में इस तरह के गहरे लाल सूर्यास्त को 'कैंडिलाजो' कहा जाता है. यह शब्द पुराने समय के तेल के दीये 'कैंडिल' से निकला है.

वेनेजुएला की राजधानी काराकास में हाल ही में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने लोगों को हैरान कर दिया. भूकंप से तबाही झेल रहे शहर के ऊपर अचानक पूरा आसमान गहरे लाल रंग का दिखाई देने लगा. सोशल मीडिया पर इसके वीडियो तेजी से वायरल हुए. किसी ने इसे चमत्कार बताया, तो किसी ने आने वाली किसी बड़ी आफत का संकेत मान लिया. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे कोई रहस्य नहीं, बल्कि एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है.

क्या सच में लाल हो गया था आसमान?
30 जून की शाम काराकास का आसमान गहरे लाल रंग में नजर आया. भूकंप के बाद पहले से डरे हुए लोगों के लिए यह नजारा और भी डरावना था. देखते ही देखते इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और तरह-तरह की बातें होने लगीं. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई अलौकिक घटना या भूकंप से जुड़ा रहस्यमय संकेत नहीं था.

आखिर आसमान लाल क्यों दिखाई देता है?
सूरज की रोशनी कई रंगों से मिलकर बनी होती है. जब यह रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो हवा में मौजूद गैसों और धूल के कणों से टकराती है. इस दौरान नीले रंग की रोशनी ज्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग की रोशनी हमारी आंखों तक ज्यादा आसानी से पहुंचती है. यही वजह है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान अक्सर लाल या नारंगी दिखाई देता है.

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वेनेजुएला में लाल रंग इतना गहरा क्यों था?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार लाल रंग सामान्य से ज्यादा गहरा दिखने की दो बड़ी वजहें थीं. पहली वजह अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से आई धूल थी. हर साल गर्मियों में सहारा से उड़ने वाले महीन धूल के कण अटलांटिक महासागर पार कर कैरेबियन और वेनेजुएला तक पहुंचते हैं. ये कण रोशनी को इस तरह बिखेरते हैं कि लाल रंग और ज्यादा उभरकर दिखाई देता है. दूसरी वजह हाल ही में आए भूकंप के बाद हवा में फैली धूल और मलबे के बेहद बारीक कण हो सकते हैं. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका असर सीमित रहा होगा.

'कैंडिलाजो' कहलाता है ऐसा सूर्यास्त
वेनेजुएला और कई कैरेबियाई देशों में इस तरह के गहरे लाल सूर्यास्त को 'कैंडिलाजो' (Candilazo) कहा जाता है. यह शब्द पुराने समय के तेल के दीये 'कैंडिल' से निकला है. जब सूर्यास्त के समय आसमान दीये की लौ की तरह चमकदार लाल दिखाई देता है, तो उसे कैंडिलाज़ो कहा जाता है.

क्या इसका भूकंप से कोई संबंध है?

काराकास में कुछ दिन पहले आए भूकंप के बाद लोगों में डर का माहौल था. इसलिए लाल आसमान को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल गईं, लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह भूकंप से जुड़ी कोई रहस्यमय रोशनी नहीं थी. न ही यह किसी बड़े खतरे या अलौकिक घटना का संकेत है.

अरोरा लाइट्स जैसी घटना नहीं
कई लोगों ने इस लाल आसमान की तुलना स्कैंडिनेवियाई देशों में दिखाई देने वाली ऑरोरा लाइट्स से भी की, लेकिन दोनों घटनाएं बिल्कुल अलग हैं. ऑरोरा सूर्य से आने वाले आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की वजह से बनता है, जबकि काराकास का लाल आसमान सूर्यास्त, वायुमंडल में धूल और प्रकाश के बिखरने (रेले स्कैटरिंग) का सामान्य वैज्ञानिक परिणाम था.

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वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना के पीछे कोई रहस्य, गुप्त हथियार या दैवीय संकेत नहीं है. यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया थी, जिसे हवा में मौजूद धूल के कणों ने और ज्यादा प्रभावशाली बना दिया. यानी, सोशल मीडिया पर भले ही इसे चमत्कार या चेतावनी बताया जा रहा हो, लेकिन विज्ञान के मुताबिक यह प्रकृति का एक दुर्लभ लेकिन सामान्य नजारा था.

नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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