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यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी: ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट

लंदन: ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे की ब्रेग्जिट संबंधी योजना को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा जब ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि वे ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से बाहर निकालने की प्रक्रिया एकतरफा ढंग से शुरू नहीं कर सकतीं और इसके लिए उन्हें संसद की मंजूरी लेनी होगी. इस फैसले का अर्थ यह है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ब्रिटेन के सांसदों की मंजूरी हासिल किए बिना आधिकारिक रूप से ब्रेक्जिट करार पर यूरोपीय यूनियन के साथ वातचीत शुरू करने के लिए लिस्बन पैक्ट के आर्टिकल-50 को प्रभाव में नहीं ला सकतीं. सरकार ने यह तर्क दिया था कि उसके पास आर्टिकल-50 को प्रभाव में लाने के लिए पर्याप्त शक्तियां हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने तीन के मुकाबले आठ के बहुमत से इसे नामंजूर कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष लॉर्ड न्यूबर्गर ने कहा, ‘‘तीन के मुकाबले आठ के बहुमत से सुप्रीम कोर्ट आदेश देता है कि सरकार संसद की मंजूरी के बिना आर्टिकल-50 को प्रभाव में नहीं ला सकती.’’ मामले के आधिकारिक आदेश में इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है, ‘‘जनमत संग्रह के नतीजे को लागू करने के लिए कानून में जरूरी बदलाव ब्रिटिश संविधान में दिए गए प्रावधान यानी विधेयक के जरिए होना चाहिए.’’ ब्रिटेन के अटार्नी जनरल जेरेमी राइट ने कहा कि सरकार ‘निराश’ है लेकिन वह इसका ‘अनुपालन’ करेगी और अदालत के फैसले को लागू कराने के लिए ‘सभी जरूरी कदम उठाएगी.’’ ब्रिटिश विदेश मंत्रालय में यूरोपीय यूनियन से हटने के मामलों के प्रभारी मंत्री डेविड डेविस ने हाउस ऑफ कामन्स में कहा, ‘‘इस फैसले से यह तथ्य नहीं बदलता कि ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से अलग हो रहा है. कुछ ही दिनों में एक बिल लाया जाएगा.’’ डेविस ने कहा, ‘‘सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी और संसद को जनमत संग्रह में व्यक्त की गई लोगों की भावना का सम्मान करना चाहिए.’’ ब्रिटिश सरकार पिछले साल नवंबर में ब्रेग्जिट विरोधी कार्यकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट में लाए गए मामले में हार गई थी. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुनवाई में स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की दलीलों को उन्हें मामले में पक्षकार मानते हुए शामिल किया गया. ब्रिटेन की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि ब्रेग्जिट की आधिकारिक प्रक्रिया में स्कॉटिश संसद और वेल्स एंड उत्तरी आयरलैंड की एसेंबलियों को भूमिका की जरूरत नहीं है. डाउनिंग स्ट्रीट कई सप्ताह से फैसले की तैयारी कर रहा था और समझा जाता है कि उसने आर्टिकल-50 को लागू कराने की संसदीय मंजूरी हासिल करने के लिए एक छोटे बिल का मसौदा तैयार कर लिया था. प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने कहा था कि वे मार्च के अंत तक ब्रेक्जिट से बाहर होने की अपनी योजना पर कायम रहेंगी. यूरोपिय देशों के समूह यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन की वापसी को ब्रेक्जिट के तौर पर जाना जाता है. पिछले साल 23 जून को हुए एक जनमत संग्रह (रिफ्रेंडम) के बाद ब्रिटिश सरकार मार्च 2017 तक आर्टिकल-50 को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी. इस रिफ्रेंडम में ब्रिटेन की जनता से इस बात पर वोटिंग करवाई गई थी कि क्या ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन का हिस्सा रहना चाहिए या नहीं. वोटिंग के दौरान हिस्सा नहीं रहने को ज़्यादा वोट मिले थे.
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