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Israel-Hamas Ceasefire: 467 दिन बाद इजरायल-हमास के बीच हुआ युद्धविराम, किन शर्तों पर हुई गाजा डील? जानें

Israel-Hamas: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया था कि अगर 20 जनवरी से पहले हमास समझौता नहीं करता है तो इसका बड़ा खामियाजा भुगतना होगा.

Israel-Hamas Ceasefire: पश्चिम एशिया को राहत देने वाली साल 2025 की सबसे बड़ी खबर इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम से जुड़ी है. 15 जनवरी, 2025 को कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम डील का ऐलान किया. इसी ऐलान के साथ पिछले 467 दिनों से जारी इजरायल-हमास युद्ध रूक गया है. हालांकि सीजफायर की डील 19 जनवरी, 2025 से लागू होगी. इस सीजफायर डील को लेकर इजरायल और हमास के बीच कई दौर की बातचीत कतर की राजधानी दोहा में हुई. इस बातचीत में मध्यस्थता अमेरिका, मिस्त्र और कतर ने कराई. हालांकि समझौते में क्या क्या नियम तय किए गए हैं, इसे जल्द ही काहिरा में सार्वजनिक किए जाने की योजना है.

लेकिन सूत्रों के मुताबिक युद्धविराम डील के तहत हमास बंधकों को रिहा करेगा और इसके बदले में इजरायल लगभग 1,000 फिलिस्तीनी नागरिकों को अपनी जेल से छोड़ेगा. इजरायल-हमास युद्ध विराम के कुल 3 चरण होंगे. पहले चरण में हमास 42 दिनों में 34 बंधकों को रिहा करेगा, जिसमें महिलाएं और बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके बदले में इजरायल उत्तरी ग़ाज़ा में लोगों को वापसी करने देगा. इजरायल चरणबद्ध तरीके से गाजा पट्टी से सैनिकों की वापसी करेगा. हमास ने लगभग 98 बंधकों को अपने कब्जे में ले रखा है, जिसमें 7 अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं. पहले चरण में इजरायल गाजा के रिहायशी इलाकों से अपने सैनिकों की वापसी कराएगा. दूसरे चरण में हमास सभी बंधकों को रिहा करेगा और इजरायल गाजा से पूरी तरह अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा. तीसरे चरण में गाजा पट्टी में पुनर्निमाण की परियोजनाओं पर ध्यान दिया जाएगा. इजरायल-हमास सीज फायर डील को लागू कराने की जिम्मेदारी अमेरिका, कतर और मिस्त्र की मानी जा रही है, क्योंकि इन तीनों देशों की मध्यस्थता के चलते युद्धविराम पर सहमति बन पाई है.

ट्रंप की इस धमकी के बाद युद्ध विराम की चर्चा
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया था कि अगर 20 जनवरी से पहले हमास समझौता नहीं करता है तो इसका बड़ा खामियाजा भुगतना होगा. ट्रंप की इस धमकी के बाद इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम को लेकर एक प्रस्ताव पर चर्चा होती है, जिसमें हमास के कब्जे से बंधकों की रिहाई और गाजा पट्टी से इजरायली सैनिकों की वापसी का प्लान शामिल था. हालांकि बाइडेन प्रशासन भी लगातार कतर, मिस्त्र, इजरायल के संपर्क में बना रहा. ट्रंप ने सबसे पहले युद्धविराम का ऐलान करते हुए लिखा कि युद्ध विराम नवंबर में हुई हमारी ऐतिहासिक जीत का परिणाम है, क्योंकि चुनावों में मेरी जीत ने पूरी दुनिया को यह संदेश दे दिया था कि हम शांति की तलाश और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. ट्रंप ने इस समझौते के लिए अपने मिडिल ईस्ट के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की तारीफ़ भी की. 

राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की युद्ध विराम की घोषणा
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इजरायल-हमास युद्ध विराम की घोषणा अपने प्रशासन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताई. बाइडेन ने कहा कि हमारा प्रशासन पिछले एक साल से इस सीजफायर प्लान पर काम कर रहा था. बाइडेन से प्रेस कॉफ्रेंस में जब एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि इसका क्रेडिट किसे मिलेगा तो उन्होंने कहा कि क्या आप जोक कर रहे हो. दरअसल बाइडेन और ट्रंप दोनों ही युद्ध विराम को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं. बाइडेन दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले उनके प्रशासन ने इजरायल-हमास का युद्ध रूकवा दिया. तो वहीं ट्रंप प्रशासन यह बता रहा है कि यह ट्रंप के व्यक्तित्व का असर है कि उनके शपथग्रहण से पहले ही दोनों पक्षों को युद्ध विराम का समझौता करना पड़ा.

अमेरिका और मिस्त्र की मध्यस्थता से सीज फायर डील
कतर के प्रधानमंत्री ने भी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कतर, अमेरिका और मिस्त्र की मध्यस्थता से सीज फायर डील हुई है. इस डील के साथ युद्ध के काले अध्याय का अंत होगा और उम्मीद है कि डील का पालन और सम्मान दोनों ही तरफ से किया जाएगा. कतर के पीएम शेख मोहम्मद अल थानी ने कहा कि हम हरसंभव प्रयास करेंगे कि ये प्लान लागू हो. वहीं मिस्त्र के राष्ट्रपति ने भी इस समझौते का स्वागत किया है.

भारत ने भी जारी की प्रेस रिलीज
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी एक प्रेस रिलीज जारी कर सीजफायर और बंधकों की रिहाई का स्वागत किया है. भारत ने अपने बयान में कहा कि हमें उम्मीद है कि इससे ग़ाज़ा के लोगों को मानवीय सहायता की सुरक्षित और लगातार आपूर्ति होगी. भारत ने कहा कि हमने लगातार सभी बंधकों की रिहाई, युद्ध विराम और बातचीत व कूटनीति के रास्ते पर लौटेने की अपील की है. हालांकि इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से अभी तक इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. 

 इजरायल पर बीते साल हुआ था हमला
7 अक्टूबर, 2023 को हमास ने दक्षिणी इजरायल के कई किबुत्ज़ और बड़े शहरों पर हमला किया था. इस हमले में इजरायल के लगभग 1,200 से भी ज्यादा नागिरकों की मौत हुई थी. इस आतंकी हमले से इजरायल को बड़ा झटका लगा था, हमास ने लगभग 250 इजरायली व अन्य देशों के नागरिकों को बंधक बना लिया था, जिन्हें अपने साथ गाजा पट्टी ले गए थे. इजरायल ने 7 अक्टूबर 2023 से ही हमास के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया. इस युद्ध में फिलिस्तीन के लगभग 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ना पड़ा. धीरे-धीरे इस युद्ध का दायरा इतना बढ़ गया कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी लेबनान में युद्ध की शुरूआत हो गई. इजरायल और ईरान ने भी एक दूसरे के चुनिंदा ठिकानों पर हमले किए. इजरायल ने हिजबुल्लाह, हमास और हूती के कई टॉप कमांडर्स को भी मार गिराया. वहीं अब जब 467 दिनों बाद युद्ध विराम हुआ है तो देखना यही होगा कि बंधकों की रिहाई कितनी जल्दी होती है और पूरे क्षेत्र में शांति कब तक बनी रहेगी.

ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप या जो बाइडेन नहीं इस एक शख्स ने रुकवा दी इजरायल-हमास जंग, सीजफायर के पीछे असली चेहरा कौन जानिए

पत्रकारिता के क्षेत्र में 12 साल से सक्रिय, सितंबर 2024 में ABP News के साथ जुड़े. विदेश मंत्रालय, संसद भवन, भारतीय राजनीति कवर करते हैं. यूपी की राजनीति को बहुत करीब से फॉलो करते हैं. ग्राउंड रिपोर्ट और स्पेशल स्टोरी पर फोकस. हाल ही में इजरायल वॉर डायरी पुस्तक भी लिखी है.
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