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ABP न्यूज के घोषणापत्र में बोले सीएम अखिलेश, हमारा गठबंधन 300 से ज्यादा सीटें जीतेगा

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम घोषणापत्र में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कहा कि सपा और कांग्रेस का गठबंधन 300 से अधिक सीटें जीतेगा. LIVE UPDATE: यूपी को ये साथ पसंद है का नारा सुल्तान से नहीं लिया- सीएम बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में हमारी नकल की- सीएम बजट में गुमराह करने वाली बातें हो सकती हैं- सीएम मोदी सरकार को जो करना था वो नहीं किया- सीएम यूपी का बजट इतना है कि अगर ठीक से इस्तेमाल हो जाए तो जिंदगियां बदलेंगी- सीएम प्रियंका गांधी के बारे में कुछ नहीं कहूंगा- सीएम क्या आगे चलकर गठबंधन के पीएम उम्मीदवार राहुल होंगे? इस पर अखिलेश ने कहा-इस बारे में राहुल से बात कर लूंगा पांच साल का वक्त सीखने का भी होता है और जमीन पर काम लाने का भी वक्त होता है- सीएम हमने किसानों को मिलने वाले बीज, खाद और मंडी को काफी बेहतर किया है साथ ही किसानों के लिए अलग फंड भी बनाएंगे-सीएम हमारे लैपटॉप बांटने के बाद अब बीजेपी वाले जागे हैं, हम तो अब आगे बढ़ गए और स्मार्टफोन देंगे-सीएम अभी मैं यूपी में रहना चाहता हूं, सपा-कांग्रेस गठबंधन ज्यादा से ज्यादा सीटें लाए यही हमारी प्राथमिकता है-सीएम हमारी लड़ाई पारिवारिक नहीं है ये लड़ाई समाजवादी आंदोलन को कैसे आगे बढ़ाया जाए इसकी लड़ाई थी-सीएम 'अच्छे दिन' वालों को डराने के लिए 300 सीटें जीतना है-सीएम कांग्रेस से हमारा गठबंधन पक्का, इससे प्रदेश की राजनीति को नई दिशा मिलेगी-सीएम हमारी कांग्रेस से बातचीत कैसे शुरु हुई ये आपको नहीं जानना चाहिए, झगड़े का डर है और हम झगड़े से बच रहे हैं- सीएम चुनाव में नेताजी साइकिल के लिए ही वोट मांगेंगे, उनके आशीर्वाद के साथ ही हम चुनाव लड़ेंगे-सीएम शिवपाल के बयान पर बोले अखिलेश, लोकतंत्र और हमारी पार्टी के लोकतंत्र में सबको आजादी है. हमारी कथनी -करनी में फर्क नहीं है जो कहा वो किया भी है-सीएम यूपी में सपा की सरकार ने विकास का एक्सप्रेस-वे बनायाः सीएम पिछले 5 साल में जिसतरह काम हुआ है और अगले 5 सालों में एसपी क्या करेगी ये लेकर हम जनता के बीच में जा रहे हैं- सीएम अखिलेश कैसे अखिलेश बन गये नये 'नेताजी' अखिलेश हॉफ सीएम हैं. ये सुनते सुनते अखिलेश इतने पक गए कि उन्होंने सरकार और अपनी छवि का कायाकल्प कर दिया. पिता के खिलाफ बगावत और पार्टी पर कब्जे से भी नहीं चूकने वाले अखिलेश आज इतने आगे निकल गए कि यूपी में आज खुद ब्रैंड बन गए हैं. पार्टी और परिवार उनकी 'जेब' में हैं. रविवार को लखनऊ में जनेश्वर मिश्रा पार्क में समाजवादी पार्टी अखिलेश के विशेष अधिवेशन में नेताजी नहीं आए, लेकिन इस अधिवेशन में वो हुआ उससे मिलती जुलती कहानियां इतिहास की किताबों में हैं लेकिन देश की राजनीति में नहीं. जिस पिता ने बेटे को राजनीति की विरासत सौंपी थी उसी बेटे ने पिता को अपदस्थ करके खुद को सुप्रीमो घोषित कर दिया. जिस समाजवादी पार्टी और यादव परिवार में नेताजी के इशारे के बिना पत्ता नहीं हिलता था. उस पार्टी और परिवार में अखिलेश यादव सबसे बड़ा नायक बन चुके हैं. उनकी एक पुकार पर सुनामी आ चुकी है. बेटा कसमें खा रहा है कि नेताजी पिता हैं और पिता ही रहेंगे लेकिन पिता भविष्यवाणी कर रहे हैं कि बेटा बर्बाद हो गया. नायक के एक यलगार पर पार्टी बंट चुकी है. परिवार बंट चुका है. अब आखिरी लड़ाई चल रही है. साइकिल पर कब्जे की. अखिलेश स्वयंभू समाजवादी पार्टी अध्यक्ष घोषित करने के बाद समाजवादी पार्टी के चुनाव निशान साइकिल पर दावा ठोंक रहे हैं. अखिलेश यादव ने क्या किया, क्यों किया, कैसे किया? राजनीतिक पंडित ऐसे सवालों के जवाब ढूंढने लगे हैं और मुलायम सिंह बेटे से पार्टी को बचाने के लिए फिर से दंगल में उतर चुके हैं. राजनीति की एबीसीडी अखिलेश यादव ने तब ही सीखी जब मुलायम सिंह यादव ने बेटा होने के नाते गिफ्ट में राजनीतिक विरासत सौंपी. समाजवादी पार्टी जब स्थापित हो चुकी थी, जब सत्ता का सुख भोग चुकी थी तब अखिलेश यादव समाजवादी साइकिल पर सवार हुए. सीधे लोकसभा के दो-दो बार सांसद बने और फिर सीधे उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री. अखिलेश यादव ने जिस पार्टी और परिवार पर कब्जे की लड़ाई छेड़ी है उसमें उनका अपना कुछ नहीं है. जो दिया है वो पिता का दिया है. पिता से एक बड़ी चूक हुई 2012 में. देश का प्रधानमंत्री बनने की ललक में उन्होंने दिल्ली की राजनीति करने के लिए खुद को यूपी की राजनीति से अलग किया था. बेटे अखिलेश को राजनीतिक विरासत सौंपी थी. अखिलेश को सीएम प्रोजेक्ट करके चुनाव लड़ा और जीत गए. यहां तक तो वैसा ही हुआ जैसा मुलायम चाहते थे लेकिन इसके आगे की कहानी अखिलेश ने खुद से लिखनी शुरू कर दी. 2012 में अखिलेश सीएम प्रोजेक्ट हुए तो अखिलेश ने नेताजी को जीत का तोहफा देने का कोडवर्ड निकाला लैपटॉप से. मुलायम दिल से माने नहीं लेकिन अखिलेश की पहली जिद्द पर चुप रहे. मुलायम की तब की चुप्पी ने कमाल किया. अखिलेश ने प्रचंड बहुमत से अकेले दम पर समाजवादी पार्टी की सरकार बनवा दी. 2012 में लैपटॉप के सहारे समाजवादी पार्टी की जीत मुलायम की पहली हार थी. ABP न्यूज सर्वे: हरीश रावत फेवरेट लेकिन बीजेपी खिलाएगी कमल ABP न्यूज सर्वे: चल पड़ी है साइकिल, एसपी- कांग्रेस गठबंधन बहुमत के करीब ABP न्यूज सर्वे: किस इलाके में कौन भारी, क्या आदित्यनाथ बनेंगे बीजेपी के लिए संकट? GRAPHICS: यूपी में एबीपी न्यूज़ के ओपिनियन पोल में कौन मार रहा है बाजी?   GRAPHICS: यूपी में एबीपी न्यूज़ के ओपिनियन पोल में किस पार्टी को मिल रही हैं कितनी सीटें?  एबीपी न्यूज सर्वे की 10 बड़ी बातें महज एक मिनट में यहां पढ़ें
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