‘अखिलेश के घोषणा पत्र में ‘झूठे’ दावों के आरोप पर निर्णय करे चुनाव आयोग’

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को उस जनहित याचिका पर तेजी से निर्णय करने का आज निर्देश दिया जिसमें उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी पर उसके चुनावी घोषणा पत्र में कई परियोजनाओं को पूरा किए जाने के ‘झूठे’ दावे करने की बात कही गयी है.
मतदाताओं को ‘गुमराह’ करके लुभाने का प्रयास
मुख्य न्यायधीश डी.बी. भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने अधिवक्ता प्रभूति कांत द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया. इस याचिका में कांत ने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी ताज एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और लखनउ मेट्रो जैसी परियोजनाओं को पूरा करने के दावों के साथ मतदाताओं को ‘गुमराह’ करके लुभाने का प्रयास कर रही है.
जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (2) का उल्लंघन
याचिकाकर्ता का दावा है कि इनमें से एक भी परियोजना आज की तिथि तक पूरी नहीं की गई और इस तरह से इस राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा उसके चुनावी घोषणा पत्र में किए गए दावे ‘झूठे’ और ‘भ्रामक’ हैं और ये जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (2) का उल्लंघन है.
नहीं की गई कोई कार्रवाई
उसने यह दलील भी दी कि पिछले महीने पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी किए जाने के तुरंत बाद उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष एक प्रतिवेदन दिया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
Source: IOCL
























