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दिलचस्प: तो इलाहाबाद की इस सीट से बीएसपी विधायक के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी मायावती

इलाहाबाद: उसका नाम मायावती है. वह दलित की बेटी है. उसे लोग बहनजी कहकर बुलाते हैं. सियासत उसकी रग-रग में बसी हुई है. अपने विरोधियों पर तीखे अंदाज़ में सियासी हमला बोलना उसकी आदत में शुमार है. उसने शादी नहीं की है और अपने नाम के साथ सुश्री लगाना पसंद करती है. बरसों के संघर्ष के बाद उसे राजनीति में एक अलग मुकाम हासिल हुआ है.

विधानसभा चुनाव में पहली बार किस्मत आजमाने जा रही है-

यूपी में हो रहा विधानसभा चुनाव उसके लिए बेहद अहम है. उसकी अपनी अलग पहचान है, फिर भी वह इस चुनाव में ऐसी कामयाबी चाहती है कि उसका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाए. दूसरे चुनाव तो उसने लड़े हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह पहली बार किस्मत आजमाने जा रही है. उसने इसके लिए इलाहाबाद की एक रिजर्व सीट को चुना है.

इलाहाबाद की रिजर्व सीट कोरांव में वह बीएसपी के मौजूदा विधायक के खिलाफ चुनाव लड़ेगी. इस चुनाव में वह बीएसपी विधायक को करारी मात देने के संकल्प के साथ मैदान में है. उसका मानना है कि बीएसपी विधायक ने इस सीट के वोटरों के साथ इंसाफ नहीं किया है, लिहाजा वह उन्हें धूल चटाकर खुद चुनाव जीतने की फिराक में है.

चार फरवरी को जुलूस निकालकर नामांकन करने पहुंचेंगी-

यह बातें सुनकर आप हैरत में पड़ गए होंगे. हालांकि इसमें झूठ कुछ भी नहीं है. एक-एक बात पत्थर की लकीर की तरह सौ फीसदी सच है. कुमारी मायावती इस चुनाव में इलाहाबाद के यमुनापार इलाके की कोरांव सीट से बीएसपी के मौजूदा विधायक और उम्मीदवार राजबली जैसल के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं. वह चार फरवरी को सैकड़ों समर्थकों की भीड़ के साथ जुलूस निकालकर डीएम दफ्तर पर अपना नामांकन करने पहुंचेंगी.

हालांकि यह मायावती यूपी की पूर्व सीएम और बीएसपी की सुप्रीमो नहीं, बल्कि चौधरी अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी की नेता है. उसकी उम्र महज पचीस साल है और उसने इलाहाबाद युनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की हुई है. राजनीति की दुनिया में वह अपनी हमनाम यूपी की पूर्व सीएम मायावती से भी आगे बढ़कर नाम कमाना चाहती है. किसानों को लेकर उसके दिल में खासी हमदर्दी है. पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह उसके आदर्श हैं, इसलिए वह शुरू से ही उनकी बनाई पार्टी आरएलडी में है.

ज़िला पंचायत का चुनाव भी लड़ चुकी हैं मायावती

यह अलग बात है कि मां-बाप ने उसका नाम बीएसपी सुप्रीमो मायावती के नाम पर ही रखा है. दलित परिवार में जन्मी यह मायावती इलाहाबाद शहर से करीब पचहत्तर किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव की रहने वाली है. उसके पिता की जूते-चप्पलों की गुमटी है. मायावती कुछ दिनों पहले आरएलडी के टिकट पर ज़िला पंचायत का चुनाव भी लड़ चुकी है. करीब पचास हजार वोटरों वाले इस चुनाव में उसे महज सात वोटों से हार का सामना करना पड़ा था.

मायावती की मंशा राजनीति में सही मुकाम हासिल कर अपने दलित समाज को शिक्षित और जागरूक करना है. उसका कहना है कि वह कुछ पाने के लिए नहीं बल्कि लोगों को कुछ देने और चुनावी राजनीति में धनबल व बाहुबल के प्रभाव को ख़त्म करने के लिए आई हुई है. अपना औपचारिक प्रचार वह चार फरवरी को नामांकन दाखिल करने के बाद ही शुरू करेंगी.

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