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किसानों की कई मांगों का समाधान पहले ही कर चुकी है यूपी सरकार: सीएम योगी
योगी ने कहा, 'भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठन की ओर से आंदोलन किया जा रहा है. उनके जो मुददे हैं, उनमें बहुत से ऐसे हैं, जिनका समाधान प्रदेश सरकार पहले ही कर चुकी है.'

लखनऊ: भारतीय किसान यूनियन के आंदोलन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसान जो मांग कर रहे हैं, उनमें से कई का समाधान राज्य सरकार कर चुकी है. योगी ने कहा, 'भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठन की ओर से आंदोलन किया जा रहा है. उनके जो मुददे हैं, उनमें बहुत से ऐसे हैं, जिनका समाधान प्रदेश सरकार पहले ही कर चुकी है.' मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे आवारा पशुओं के बारे में किसानों ने बात की है. हमने हर जनपद में एक करोड रूपये से अधिक धन, गौशाला निर्माण के लिए दिया है. साथ ही मनरेगा के साथ इसे जोडने की व्यवस्था कर रहे हैं. राज्य सरकार प्रदेश में खेती को मनरेगा के साथ जोडने की भी व्यवस्था करने जा रही है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश है कि दस वर्ष से अधिक पुराने ट्रैक्टरों का इस्तेमाल बंद किया जाए. हम सरकार की ओर से याचिका दायर कर किसानों को राहत पहुंचाने का काम करेंगे. किसानों के हित के जितने भी कार्य हो सकते हैं, केन्द्र और प्रदेश सरकार ने किये हैं. किसान हमारी प्राथमिकता में हैं. दिल्ली जा रहे किसानों पर लाठीचार्ज के बारे में पूछने पर योगी ने कहा, 'लोकतंत्र में किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. जब किसानों का प्रतिनिधिमंडल उच्चस्तरीय केन्द्रीय प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करता है तो उन स्थितियों में धैर्य के साथ हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए.' विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि किसानों का शोषण करने वाले लोग आज किसानों के लिए कथित रूप से घडियाली आंसू बहाने का कार्य कर रहे हैं. ये नहीं चल सकता है. राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और उनकी मदद करने के लिए पूरी तत्परता के साथ काम किया जा रहा है. यह पूछे जाने पर कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, सपा मुखिया अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष अजीत सिंह का साथ किसानों को मिल रहा है, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिन नेताओं का नाम लिया गया है, ये वे नेता हैं जिन्हें आलू और गन्ने का अंतर भी नहीं पता है. उन्होंने चुटकी ली कि ये किसान नहीं हैं बल्कि ये ऐसे घरों में पैदा हुए हैं जिन्होंने खेती किसानी नहीं देखी है. सत्ता में रहते इन्होंने कभी किसानों का हित नहीं किया है.
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