नीतीश कुमार की मांग, बुनकरों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए
नीतीश कुमार ने कहा, ''बहुत पहले एक बार चरखा चलाने वालों से पूछा कितना कमाते हैं, लोगों ने बताया 40 से 50 रुपया. तब हमलोगों ने इसका उपाय किया. सात साल पहले त्रिपुरारी चरखा वितरण कराया. इसके बाद उन्हें 150 से 200 रुपया मिलने लगा.''

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मांग कि की बुनकरों को भी अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए. पटना के अधिवेशन भवन में राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के उद्घाटन समारोह में सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बुनकरों के लिए उनकी सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं.
सीएम नीतीश ने कहा, ''बुनकर भाई-बहन की कठिनाई दूर हो, यही हमारी इच्छा है. प्रारम्भ से ही खादी और हस्तकरघा को बढ़ावा दिया. भागलपुर के बुनकर से चर्चा कर कठिनाई दूर किया गया. हस्तकरघा में आने वाली परेशानी दूर किया गया. हमने निर्णय लिया कि सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बेडशीट बदला जाएं. हमने सतरंगी योजना शुरू की, जिसके जरिये हर दिन अलग-अलग रंग के बेडशीट लगाए जाएंगे. खादी और हैंडलूम सेक्टर से बने चादर ही अस्पतालों में बिछाये जाएंगे. राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में पर्दा, चादर, टेबल क्लॉथ आदि भी खादी और हैंडलूम से बने ही इस्तेमाल किए जाएंगे. हमलोग मिलकर इसको बढ़ावा दे रहे हैं.''
चरखा चलाने वालों की आमदनी बढ़ी: नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने आगे कहा, ''बहुत पहले एक बार चरखा चलाने वालों से पूछा कितना कमाते हैं, लोगों ने बताया 40 से 50 रुपया. तब हमलोगों ने इसका उपाय किया. सात साल पहले त्रिपुरारी चरखा वितरण कराया. इसके बाद उन्हें 150 से 200 रुपया मिलने लगा. पालीगंज में यात्रा के दौरान जाना हस्तकरघा का काम होता है. आज 500 लाभकों की सूची का विमोचन किया गया. फ्रेम लूम ख़रीदने के लिए अब बुनकरों के खाते में सीधे पैसा भेजा जाएगा.''
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब लोग गड़बड़ नहीं करते, बहुत ईमानदारी से काम करते हैं. प्रभाव वाले गड़बड़ी करते हैं. जिन्हें सत्ता का अधिकार मिलता है वे गड़बड़ी करते हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि सभी बुनकरों को 10 हजार रुपया दिया जाएगा. 6727 हस्तकर्घों को चिन्हित किया गया है. सीधे बैंक खाते में पैसा मिलेगा.
Source: IOCL


























