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कुशीनगर की इन बेटियों से सचिन तेंदुलकर ने कराई शेविंग, कही ये बड़ी बात
कुशीनगर की दो लड़कियों के बारे में सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया है. दरअसल मामला ही कुछ ऐसा है कि जान कर आप भी इन लड़कियों की तारीफ करेंगे.

कुशीनगर: कुशीनगर की दो लड़कियों के बारे में सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया है. दरअसल मामला ही कुछ ऐसा है कि जान कर आप भी इन लड़कियों की तारीफ करेंगे. पिता की मदद करने के लिए इन दोनों लड़कियों ने हाथ में उस्तरा उठा लिया और दुकान पर मर्दों के बाल काटने और शेविंग करने का काम संभाल लिया. इन लड़कियों की हिम्मत की तारीफ अब पूरा देश कर रहा है. इन दोनों लड़कियों से सचिन तेंदुलकर ने अपनी शेविंग कराई और अपने ट्विटर अकाउंट पर शेविंग कराते फ़ोटो भी अपलोड किया. जिलेट के तरफ से आयोजित कार्यक्रम में इन दोनों महिला बार्बर को सम्मानित भी किया गया.
ये है पूरी कहानी बनवारी टोला गांव निवासी ध्रुव नारायण गांव में गुमटी लगा दाढ़ी-बाल बनाने का काम किया करते थे. छह बेटियों के पिता ने छोटी सी दुकान की कमाई के बूते चार बेटियों के हाथ पीले कर दिए. सब ठीक चल रहा था. अब दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी ही सिर पर थी. 13 साल की ज्योति और 11 साल की नेहा. दोनों स्कूल में पढ़ती थीं. साल 2014 में ध्रुव नारायण को लकवा मार गया. हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया. अब दुकान बंद हो गई. घर का चूल्हा जलना दूभर हो उठा परिवार में फांकाकशी की नौबत आ गई. ऐसे में इस परिवार की बेटी ज्योति ने पिता की बंद पड़ी दुकान को खोला और वहां हेरकटिंग करना शुरू कर दिया. काम कतई आसान न था लेकिन विकल्प भी तो न था इसलिए ज्योति को लोगों का ताना सुनने के बाद भी काम करना पड़ा. आज ज्योति 18 की और नेहा 16 की है. इंटर पास ज्योति ने पांच साल में पिता की गुमटीनुमा दुकान को सलून की शक्ल दे दी. काम बढ़िया चल रहा है. छोटी नेहा भी दीदी का हाथ बंटाने लगी है. दोनों बहनों ने परिवार को भंवर से उबार लिया है. आज लोग इन्हें हैरत से देखते हैं जो स्वाभाविक भी है. इलाके में लोगों ने लड़कियों को ये काम करते न तो कभी देखा था न सुना था. ज्योति बताती है, यह काम बहुत कठिन था. तमाम तरह की परेशानियां आईं लेकिन मेरे पास कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं था. जैसे-जैसे हिम्मत बढ़ती गई हालात बदलते गए. आज नेहा भी मेरे साथ दुकान में लोगों के दाढ़ी-बाल बनाने का काम करने लगी है. हमारी कमाई से ही घर का खर्च चल रहा है और पिता का इलाज भी चल रहा है.
परेशानी भी कम नहीं थी ज्योति का कहना है कि हमारे समाज में यह काम पुरुष ही करते आए हैं. जैसे मेरे दादा-परदादा और पिता ने भी किया. मैंने जब पिता की दुकान संभाली तो बहुत परेशानी हुई. इतनी कि मुझे अपना वेश बदलने को मजबूर होना पड़ा. लड़कों जैसे बाल रखे, लड़कों जैसे कपड़े पहने और लड़कों सा बर्ताव करती. नाम भी बदल कर दीपक उर्फ राजू कर लिया. इन सब से थोड़ी आसानी हुई लेकिन लोगों को पता चल ही जाता है. हालांकि लोग भी इस नई व्यवस्था में ढलते गए. आज यहां सभी को पता है कि हम लड़कियां हैं. ज्योति और नेहा बतातीं हैं कि दुकान से रोजाना 400 तक कमा लेती हैं. आजकल पिता भी साथ आते हैं. दुकान के बाहर बैठे रहते हैं. इससे संबल मिलता है.
मां-पिता को नाज है बेटियों पर पिता ध्रुव नारायण ने कहा, ईमानदारी के काम से कमाती हैं मेरी बेटियां. समाज क्या कहता है, इसकी चिता नहीं हैं. मुझे खुशी है इनके इस साहस ने परिवार को संभाल लिया. मेरी बेटियां बेटों के समान हैं. उनके इस साहस और संघर्ष को देख आंखें भर आती हैं, लेकिन सीना गदगद हो जाता है. मां लीलावती कहती हैं कि पति के लकवा मारने के बाद परिवार पर मुसीबत आ गई जिसके बाद दोनों बेटियों ने हेयरकटिंग शुरू कर दिया. उनका कहना है कि मेरी बेटियों ने जिस तरह हिम्मत जुटा परिवार को संकट से उबारा, पूरा घर संभाला है, मुझे उनके इस साहस पर लाज नहीं, नाज है. बावजूद इसके लीलावती अब अपनी दोनों बेटियों को काम छोड़ने के लिए कहती हैं लेकिन नेहा और ज्योति परिवार की बिगड़ी माली हालत देखकर अभी भी काम करती है. जिलेट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर ने अपनी शेविंग भी इनसे करायी और सम्मानित भी किया. इन दोनों फोटो को सचिन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपलोड किया. जिलेट ने इनको हेयर सैलून खोलने के लिए पूरा सामान दिया.
ऐसे संभाला पिता का काम कौन कहता है कि आसमां छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों. कुछ ऐसा ही कारनामा कुशीनगर की दो बेटियां कर रही हैं. पिता को लकवा मारने के बाद इन दोनों बेटियों ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा रखी है. बेटियों ने बिना लाज शर्म संकोच के पिता का काम सीखा और फिर खुद नाई की दुकान को संभाल लिया. परिवार चलाने के लिए इन दोनों बहनों ने अपना हुलिया तक बदल दिया. दोनों बहनों ने अपना नाम भी बदलकर लड़कों वाला रख दिया. कुशीनगर के कसया तहसील के बनवारी टोला चौराहे पर अपने पिता की छोटी सी दुकान को दोनों बेटियां चलाती हैं. सामाजिक बंधनों को दरकिनार करते हुए बारबर बनी इन बेटियों नें अपने परिवार को सहारा दिया है जिससे आज इस परिवार का पेट भरता है. कुशीनगर के एक छोटे से चौराहे पर अपने बुलंद हौंसलों और समाज की परवाह किये बिना इन बेटियों ने हेयरकटिंग का जो काम शुरू किया है वह अपने आप में नजीर है. इन दोनों बेटियों के हौंसलों को स्थानीय लोगों के साथ सुनने वाले सभी लोग सैल्यूट कर रहे हैं. इन्होंने खुद कभी नही सोचा था कि उन्हें सचिन तेंदुलकर के हाथों सम्मान मिलेगा और उनकी शेविंग करने का मौका मिलेगा.A First for me! You may not know this, but I have never gotten a shave from someone else before. That record has been shattered today. Such an honour to meet the #BarbershopGirls and present them the @GilletteIndia Scholarship.#ShavingStereotypes#DreamsDontDiscriminate pic.twitter.com/DNmA8iRYsb
— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) May 3, 2019
ये है पूरी कहानी बनवारी टोला गांव निवासी ध्रुव नारायण गांव में गुमटी लगा दाढ़ी-बाल बनाने का काम किया करते थे. छह बेटियों के पिता ने छोटी सी दुकान की कमाई के बूते चार बेटियों के हाथ पीले कर दिए. सब ठीक चल रहा था. अब दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी ही सिर पर थी. 13 साल की ज्योति और 11 साल की नेहा. दोनों स्कूल में पढ़ती थीं. साल 2014 में ध्रुव नारायण को लकवा मार गया. हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया. अब दुकान बंद हो गई. घर का चूल्हा जलना दूभर हो उठा परिवार में फांकाकशी की नौबत आ गई. ऐसे में इस परिवार की बेटी ज्योति ने पिता की बंद पड़ी दुकान को खोला और वहां हेरकटिंग करना शुरू कर दिया. काम कतई आसान न था लेकिन विकल्प भी तो न था इसलिए ज्योति को लोगों का ताना सुनने के बाद भी काम करना पड़ा. आज ज्योति 18 की और नेहा 16 की है. इंटर पास ज्योति ने पांच साल में पिता की गुमटीनुमा दुकान को सलून की शक्ल दे दी. काम बढ़िया चल रहा है. छोटी नेहा भी दीदी का हाथ बंटाने लगी है. दोनों बहनों ने परिवार को भंवर से उबार लिया है. आज लोग इन्हें हैरत से देखते हैं जो स्वाभाविक भी है. इलाके में लोगों ने लड़कियों को ये काम करते न तो कभी देखा था न सुना था. ज्योति बताती है, यह काम बहुत कठिन था. तमाम तरह की परेशानियां आईं लेकिन मेरे पास कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं था. जैसे-जैसे हिम्मत बढ़ती गई हालात बदलते गए. आज नेहा भी मेरे साथ दुकान में लोगों के दाढ़ी-बाल बनाने का काम करने लगी है. हमारी कमाई से ही घर का खर्च चल रहा है और पिता का इलाज भी चल रहा है.
परेशानी भी कम नहीं थी ज्योति का कहना है कि हमारे समाज में यह काम पुरुष ही करते आए हैं. जैसे मेरे दादा-परदादा और पिता ने भी किया. मैंने जब पिता की दुकान संभाली तो बहुत परेशानी हुई. इतनी कि मुझे अपना वेश बदलने को मजबूर होना पड़ा. लड़कों जैसे बाल रखे, लड़कों जैसे कपड़े पहने और लड़कों सा बर्ताव करती. नाम भी बदल कर दीपक उर्फ राजू कर लिया. इन सब से थोड़ी आसानी हुई लेकिन लोगों को पता चल ही जाता है. हालांकि लोग भी इस नई व्यवस्था में ढलते गए. आज यहां सभी को पता है कि हम लड़कियां हैं. ज्योति और नेहा बतातीं हैं कि दुकान से रोजाना 400 तक कमा लेती हैं. आजकल पिता भी साथ आते हैं. दुकान के बाहर बैठे रहते हैं. इससे संबल मिलता है.
मां-पिता को नाज है बेटियों पर पिता ध्रुव नारायण ने कहा, ईमानदारी के काम से कमाती हैं मेरी बेटियां. समाज क्या कहता है, इसकी चिता नहीं हैं. मुझे खुशी है इनके इस साहस ने परिवार को संभाल लिया. मेरी बेटियां बेटों के समान हैं. उनके इस साहस और संघर्ष को देख आंखें भर आती हैं, लेकिन सीना गदगद हो जाता है. मां लीलावती कहती हैं कि पति के लकवा मारने के बाद परिवार पर मुसीबत आ गई जिसके बाद दोनों बेटियों ने हेयरकटिंग शुरू कर दिया. उनका कहना है कि मेरी बेटियों ने जिस तरह हिम्मत जुटा परिवार को संकट से उबारा, पूरा घर संभाला है, मुझे उनके इस साहस पर लाज नहीं, नाज है. बावजूद इसके लीलावती अब अपनी दोनों बेटियों को काम छोड़ने के लिए कहती हैं लेकिन नेहा और ज्योति परिवार की बिगड़ी माली हालत देखकर अभी भी काम करती है. जिलेट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर ने अपनी शेविंग भी इनसे करायी और सम्मानित भी किया. इन दोनों फोटो को सचिन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपलोड किया. जिलेट ने इनको हेयर सैलून खोलने के लिए पूरा सामान दिया. हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें ABP News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ लाइव पर पढ़ें बॉलीवुड, लाइफस्टाइल, न्यूज़ और खेल जगत, से जुड़ी ख़बरें
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