राम मंदिर: बदले डिप्टी सीएम केशव मौर्य के सुर, कहा- कोर्ट और आपसी सहमती का विकल्प मौजूद
केशव मौर्य ने आज कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए जब तक कोर्ट के फैसले या आपसी समझौते के दो विकल्प खुले हैं, तब तक तीसरे विकल्प यानी क़ानून बनाए जाने या अध्यादेश लाए जाने पर विचार नहीं होगा.

इलाहाबाद: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई टलने के बाद बीजेपी और उसकी सरकारें अब पशोपेश में पड़ गई हैं. कल तक राम मंदिर के लिए क़ानून बनाने और अध्यादेश लाए जाने की वकालत करने वाले यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अब सुर बदल लिए हैं. केशव मौर्य ने आज कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए जब तक कोर्ट के फैसले या आपसी समझौते के दो विकल्प खुले हैं, तब तक तीसरे विकल्प यानी क़ानून बनाए जाने या अध्यादेश लाए जाने पर विचार नहीं होगा. उन्होंने कहा है कि कोर्ट और आपसी समझौते का विकल्प ख़त्म होने के बाद ही पार्टी तीसरे विकल्प पर विचार करेगी.
केशव मौर्य ने साफ़ तौर पर कहा है कि मंदिर निर्माण को लेकर साधू-संतों व रामभक्तों की मांग अनुचित नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें कोई डेडलाइन या निश्चित समय सीमा नहीं बताई जा सकती है. उनके मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट में अभी सिर्फ सुनवाई टली भर है और कोर्ट से फैसले से मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ होने का विकल्प अब भी खुला हुआ है.
इलाहाबाद में मीडिया से बात करते हुए डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि मंदिर निर्माण को लेकर कुंभ मेले में होने वाली धर्म संसद को लेकर अभी से परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. सरकार का सारा ध्यान फिलहाल कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना है. मुलायम सिंह यादव द्वारा आज छोटे भाई शिवपाल के दफ्तर जाने पर केशव मौर्य ने कहा कि मुलायम अखिलेश के साथ रहें या फिर शिवपाल के साथ, बीजेपी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. बीजेपी का सारा फोकस तो यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर है और पार्टी उसी मुहिम में लगी भी हुई है.
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