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IN DEPTH: वे पांच कदम जो अब मुलायम कैंप और अखिलेश उठा सकते हैं!

नई दिल्ली: मुलायम सिंह यादव ने कल अपने बेटे अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी से निकाल दिया. यूपी के मुख्यमंत्री 6 साल के लिए पार्टी से बाहर हो चुके हैं. नेताजी ने अपने भाई रामगोपाल यादव को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया है. मुलायम सिंह की इस कार्रवाई से यूपी में बड़ा संवैधानिक संकट पैदा हो गया है. साथ ही सवाल उठ रहा है कि अब समाजवादी पार्टी का क्या होगा? एक पिता ने भाई के लिए बेटे को त्याग दिया. महाभारत काल में धृतराष्ट्र ने पुत्रमोह की जो अंधी मिसाल कायम की थी, उसका आर्यावर्त निष्ठापूर्वक पालन करता चला आ रहा था लेकिन अब मुलायम ने एक अनोखी मिसाल कायम कर दी. भाई के लिए बेटे को ही त्याग दिया.

1. मुलायम सिंह बनेंगे सीएम! उत्तर प्रदेश में समाजवादी घमासान के बीच सपा मुखिया पार्टी नेतृत्व के साथ प्रदेश में पार्टी का चेहरा बन सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक़ मुलायम राज्य में सपा सरकार की कमान संभाल सकते हैं. जानकारी के मुताबिक़ रामगोपाल व अखिलेश के पार्टी से निष्कासन के बाद अब राज्य में पार्टी को बड़ी टूट से बचाने के लिए मुलायम ने प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल की सलाह पर इसके लिए हामी भर दी है. अखिलेश की जिस तरह पार्टी में लोकप्रियता है उसके आगे सिर्फ मुलायम सिंह यादव ही एक ऐसा चेहरा हैं जो पार्टी में सबको मान्य होंगे और पार्टी के सभी तबकों को लेकर साथ चल सकेंगे. हालांकि, यह होना इतना आसान नही हैं. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जल्द ही राज्यपाल को बहुमत में होने के प्रमाण के तौर पर विधायकों की सूची सौपने वाले हैं.

2. बरगद चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे अखिलेश! एबीपी न्यूज को सूत्रों के हवाले एक बड़ी खबर मिली है . आज दिन में 11 बजे समाजवादी जनता पार्टी के अध्यक्ष कमल मोरारका ने लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की है . इससे पहले उन्होंने दिल्ली में अखिलेश खेमे के रामगोपाल यादव से मुलाकात की . सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात का मकसद अखिलेश यादव के लिए नई पार्टी और नया चुनाव चिंह्न मुहैया कराना है . सूत्रों के मुताबिक कमल मोरारका ने आज दिन में 11 बजे अखिलेश यादव से मुलाकात की है . खबरों के मुताबिक उन्होंने अखिलेश यादव को अपनी पार्टी और चुनाव चिंह्न देने का प्रस्ताव दिया है . अखिलेश यादव से मुलाकात से पहले उन्होंने दिल्ली में रामगोपाल यादव से मुलाकात की थी और वहां से सलाह मशविरा करके वो अखिलेश यादव से मिले थे

3. अखिलेश खुद इस्तीफा दे दें संभव है कि अखिलेश यादव इस्तीफा देकर खुद चुनाव कराने की सिफारिश कर दें, हालांकि सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव इस्तीफा नहीं देंगे. इससे अखिलेश को फायदा यह है कि तुरंत चुनाव की घोषणा चुनाव आयोग करना पड़ सकता है. इससे केंद्र सरकार के हिस्से राष्ट्रपति शासन लगाने की संभावना क्षीण हो जाएगी.

4. समाजवादी पार्टी का सिंबल जब्त! समाजवादी पार्टी पर दोनों खेमा अपनी दावेदारी ठोक सकता है. सीएम अखिलेश सपा का चुनाव चिन्ह जब्त कराने के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं. अखिलेश खेमे के रामगोपाल यादव ने एक जनवरी को राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाई है. हो सकता है कि इस अधिवेशन में अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह को ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दें और सपा पर अपनी दावेदारी ठोक दें.

5. केंद्र सरकार का राष्ट्रपति शासन से इनकार नहीं! यूपी में राष्ट्रपति शासन भी लग सकता है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार का राष्ट्रपति शासन से इनकार नहीं लेकिन यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि यूपी में कोई संवैधानिक संकट नहीं है.

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