आंध्र में टीडीपी और जम्मू कश्मीर में पीडीपी के अलग होने के बाद क्या अगला नंबर अब बिहार का है?
नीतीश कुमार की पार्टी कभी विशेष राज्य, कभी किसान बीमा, कभी केजरीवाल को समर्थन तो कभी योग दिवस में शामिल न होकर बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटी है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद मोदी जिस योग का डंका दुनिया में बजा रहे हैं, वहीं नीतीश कुमार ने तो इससे दूरी बनाई. आज योग दिवस के मौके पर उनकी पार्टी के नेताओं ने भी खुद को दूर रखा, ये कहते हुए कि हम दिखावा नहीं करते. ऐसे में सवाल ये है कि क्या जेडीयू ये कहना चाहती है कि जिन लोगों ने आज योग किया वे दिखावा कर रहे थे? इसके साथ ही दूसरा सवाल ये है कि आंध्र में टीडीपी और जम्मू कश्मीर में पीडीपी के अलग होने के बाद क्या अगला नंबर अब बिहार का है?
बिहार में योग दिवस का कार्यक्रम हुआ तो पटना में राज्यपाल से लेकर डिप्टी सीएम सुशील मोदी तक इसमें शामिल हुए. पटना से सटे वैशाली में बीजेपी की सहयोगी एलजेपी के अध्यक्ष रामविलास पासवान और आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा एक मंच पर योग करते दिखे. लेकिन नीतीश कुमार या फिर उनकी पार्टी का कोई नेता योग के मंच पर नजर नहीं आया. पीएम मोदी के शब्दों में योग सबको समृद्ध कर रहा है. दुनिया योग के जरिये जुड़ रही है. लेकिन मोदी के सहयोगी नीतीश कुमार ही योग के जरिए एनडीए को कमजोर करने के संकेत दे रहे हैं.
नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच तल्खी की वजह सीटों को लेकर है. नीतीश की पार्टी 40 में से 25 लोकसभा सीट चाहती है. यानी बाकी 15 में बीजेपी, एलजेपी और आरएलएसपी है. जबकि नीतीश के पास दो सांसद हैं और एनडीए की बाकी पार्टियों के पास 31 सांसद हैं. नीतीश कुमार की पार्टी कभी विशेष राज्य, कभी किसान बीमा, कभी केजरीवाल को समर्थन तो कभी योग दिवस में शामिल न होकर बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटी है.
पहले टीडीपी का विशेष राज्य की मांग पर अलग होना, उसके बाद जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से आतंकवाद के नाम पर रिश्ता तोड़ना और अब जेडीयू का सीटों की मांग को लेकर सामने आना ये बताता है कि एनडीए कमजोर हो रहा है. लेकिन ये सिक्के का एक पहलू है.
दूसरा पहलू ये है कि आंध्र प्रदेश में टीडीपी की जगह वाईएसआर कांग्रेस से बीजेपी संबंध सुधार रही है. वहीं तेलंगाना में चंद्रशेखऱ राव से रिश्ते ठीक हो रहे हैं. इसके अलावा तमिलनाडु में एआईएडीएमके को साथ लाने के लिए मनाया जा रहा है. यानी एक तरफ एनडीए के साथी अलग हो रहे हैं तो दूसरी ओर नए मजबूत साथियों के जरिए नया एनडीए बनाने की कोशिश हो रही है.
वैसे भी टीडीपी के साथ कांग्रेस गठबंधन नहीं करने जा रही है यानी लड़ाई त्रिकोणीय होगी और फायदा बीजेपी उठाएगी. तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखऱ राव और पीएम मोदी की पिछले दिनों हुई मुलाकात के बाद अटकलें हैं कि दोनों में बात बन सकती है. इन तमाम सियासी समीकरणों को देखते हुए ये कह देना कि एनडीए कमजोर हो रहा है जल्दबाजी होगी, क्योंकि बीजेपी की रणनीति दो कदम पीछे जाकर लंबी छलांग लगाने की है.
Source: IOCL

























